Agriculture News: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड स्थित परसाही गांव के किसान फागूराम पटेल ने पारंपरिक धान की खेती के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाकर अपना शुद्ध मुनाफा 20 हजार रुपये बढ़ाया है।
उन्होंने 0.400 हेक्टेयर जमीन में करीब 120 क्विंटल बैंगन का उत्पादन किया। बिक्री से 1.20 लाख रुपये मिले और लगभग 65 हजार रुपये की लागत निकालने के बाद 55 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय योजना के तहत मिले सहयोग से उन्होंने खेती का यह तरीका अपनाया।
धान की खेती से बेहतर आमदनी की तलाश
फागूराम पटेल पहले मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। इससे उन्हें बेहतर आमदनी हासिल करने और अपनी जमीन का अधिक लाभकारी इस्तेमाल करने की जरूरत महसूस हुई। इसी उद्देश्य से उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया। विभागीय अधिकारियों से ग्राफ्टेड बैंगन और दूसरी सब्जियों की खेती के बारे में जानकारी लेने के बाद उन्होंने नई तकनीक अपनाने का फैसला किया। विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें फसल प्रबंधन और आधुनिक उद्यानिकी पद्धतियों को समझने में मदद की।
धान और ग्राफ्टेड बैंगन की कमाई का पूरा गणित
फागूराम पटेल की खेती से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि दोनों फसलों से मिलने वाले शुद्ध लाभ में अंतर रहा है।
- धान की खेती: करीब 20 क्विंटल उत्पादन से 62 हजार रुपये की बिक्री हुई। बीज, खाद, श्रमिक और अन्य कृषि कार्यों पर लगभग 27 हजार रुपये खर्च हुए। लागत घटाने के बाद 35 हजार रुपये का शुद्ध लाभ मिला।
- ग्राफ्टेड बैंगन की खेती: 0.400 हेक्टेयर में करीब 120 क्विंटल उत्पादन हुआ। इससे 1 लाख 20 हजार रुपये की बिक्री हुई। लगभग 65 हजार रुपये खर्च होने के बाद 55 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
इस तरह दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से धान की तुलना में 20 हजार रुपये अधिक शुद्ध लाभ मिला।
उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से मिली मदद
फागूराम पटेल ने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती में विभागीय अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ लिया। फसल प्रबंधन और आधुनिक खेती की पद्धतियों को अपनाकर उन्होंने बेहतर उत्पादन हासिल किया। उनकी यह पहल दिखाती है कि पारंपरिक खेती के साथ दूसरी फसलों को अपनाना किसानों के लिए आमदनी के नए अवसर तलाशने का एक तरीका हो सकता है। हालांकि, किसी भी फसल से मिलने वाला लाभ उसकी लागत, उत्पादन और बिक्री पर निर्भर करता है।
दूसरे किसानों के लिए भी बनी प्रेरणा
ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से मिली सफलता के बाद फागूराम पटेल का आत्मविश्वास बढ़ा है। दी गई जानकारी के अनुसार, आसपास के दूसरे किसान भी धान के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।फागूराम की कहानी में मुख्य बात केवल फसल बदलना नहीं, बल्कि उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग करने के लिए नई तकनीक और विभागीय सलाह का सहारा लेना है। फसल विविधीकरण के जरिए किसान अपनी खेती के विकल्प बढ़ा सकते हैं। इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों, बाजार और लागत को ध्यान में रखना भी जरूरी है।



