Paddy Farming: छत्तीसगढ़ में सितंबर के आखिरी सप्ताह में लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में धान के खेतों में पानी भर गया है। धान दूसरी कई फसलों की तुलना में पानी को ज्यादा सहन कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खेत में कितनी भी गहराई तक पानी लंबे समय तक जमा रहे तो फसल सुरक्षित रहेगी। पानी की गहराई और जलभराव की अवधि दोनों महत्वपूर्ण हैं।
धान की फसल में जलभराव सहने की क्षमता उसकी किस्म और बढ़वार की अवस्था पर निर्भर करती है। कुछ समय तक खेत में पानी रहना सामान्य परिस्थितियों में बड़ी समस्या नहीं होता। लेकिन लंबे समय तक गहरा पानी जमा रहने या पौधों के पूरी तरह डूबे रहने से नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए सिर्फ बारिश की अवधि नहीं, खेत में पानी की स्थिति देखना जरूरी है।
लगातार पानी जमा रहने से बढ़ सकता है नुकसान
धान के खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने पर पौधों की जड़ों तक हवा और ऑक्सीजन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। अगर पानी बहुत गहरा है या पौधे लंबे समय तक डूबे रहते हैं तो उनकी सामान्य वृद्धि पर असर पड़ सकता है। बाढ़ जैसी स्थिति में पौधों के पूरी तरह डूबने से नुकसान का जोखिम और बढ़ जाता है।
धान में पानी की गहराई सबसे अहम
धान के लिए खेत में नियंत्रित मात्रा में पानी रहना सामान्य खेती का हिस्सा है, लेकिन अत्यधिक गहराई वाला पानी अलग स्थिति पैदा करता है। तेज बारिश के बाद अगर खेत में पानी लगातार बढ़ रहा है और निकासी का रास्ता बंद है तो किसान को स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। पानी की गहराई बढ़ने पर पौधों के डूबने का खतरा भी बढ़ता है।
पौधों के पूरी तरह डूबने पर ज्यादा खतरा
धान की फसल अगर पूरी तरह पानी के अंदर चली जाती है तो लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहना नुकसानदायक हो सकता है। पौधों को पर्याप्त प्रकाश और गैसों का आदान-प्रदान नहीं मिल पाता। खासकर ऐसी फसल जो पहले से कमजोर हो या फूल और दाना बनने की अवस्था में हो, उसमें लंबे समय तक जलभराव का असर अधिक गंभीर हो सकता है।
फूल और दाना बनने की अवस्था में रखें खास नजर
धान की फसल में फूल आने और दाना बनने की अवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान लगातार गहरा पानी जमा रहने से फसल की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसानों को इस अवस्था में खेत का नियमित निरीक्षण करना चाहिए। अगर अतिरिक्त पानी निकलने का रास्ता है तो उसे खुला रखना जरूरी है, ताकि खेत में अनावश्यक रूप से पानी जमा न रहे।
खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी करें
अगर भारी बारिश के कारण खेत में जरूरत से ज्यादा पानी जमा हो गया है तो किसान खेत की मेड़ और निकासी नालियों की जांच करें। जहां से अतिरिक्त पानी बाहर निकल सकता है, वहां रास्ता साफ रखें। हालांकि पानी निकालते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि खेत की मिट्टी और पौधों को नुकसान न पहुंचे।
बारिश के बीच खाद डालने से बचें
लगातार बारिश के दौरान धान की फसल में बिना कृषि सलाह के खाद डालने से बचना चाहिए। बारिश के पानी के साथ पोषक तत्व बह सकते हैं और अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। मौसम सामान्य होने और खेत की स्थिति देखने के बाद ही जरूरत के अनुसार खाद देने का निर्णय लेना बेहतर है।
फसल पर रोग और कीट का भी रखें ध्यान
लगातार बारिश और अधिक नमी के बाद धान में कुछ रोगों और कीटों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए किसान खेत में पौधों की पत्तियों, तनों और बालियों की स्थिति पर नजर रखें। किसी तरह के असामान्य लक्षण दिखाई देने पर स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही दवा का इस्तेमाल करें।
24-48 घंटे का कोई तय नियम नहीं
धान के मामले में यह कहना सही नहीं होगा कि 24 या 48 घंटे पानी जमा रहने के बाद हर खेत में फसल खराब हो जाएगी। धान की किस्म, पौधे की अवस्था, पानी की गहराई, खेत की मिट्टी और पानी की निकासी जैसे कई कारक नुकसान तय करते हैं। इसलिए किसानों को एक तय समय के बजाय खेत की वास्तविक स्थिति देखकर फैसला लेना चाहिए।



