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गन्ने में लाल सड़न का खतरा! सितंबर में किसान तुरंत करें ये काम, वरना फसल हो सकती है बर्बाद

Sugarcane Farmer Tips: गन्ने की खेती के लिए सितंबर का समय बेहद अहम माना जाता है। मानसून के दौरान खेतों में नमी बढ़ने और बारिश का दौर जारी रहने से फसल में कई तरह के रोगों का खतरा बढ़ सकता है। इनमें लाल सड़न यानी रेड रॉट गन्ने की गंभीर बीमारियों में शामिल है, इसलिए […]

Sugarcane Red Rot Disease
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Sugarcane Farmer Tips: गन्ने की खेती के लिए सितंबर का समय बेहद अहम माना जाता है। मानसून के दौरान खेतों में नमी बढ़ने और बारिश का दौर जारी रहने से फसल में कई तरह के रोगों का खतरा बढ़ सकता है। इनमें लाल सड़न यानी रेड रॉट गन्ने की गंभीर बीमारियों में शामिल है, इसलिए इस दौरान किसानों को खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए।

लाल सड़न गन्ने का एक प्रमुख रोग है, जो पौधे के तने के अंदर के ऊतकों को प्रभावित करता है। संक्रमण बढ़ने पर पौधे की बढ़वार कमजोर हो सकती है और उपज तथा गन्ने की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण हर पौधे में स्पष्ट नहीं दिखते, जिससे समय पर पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

गन्ने में ऐसे करें लाल सड़न की पहचान
इस रोग की पहचान केवल पत्तियों को देखकर नहीं की जा सकती। संक्रमित पौधे की ऊपरी पत्तियां पीली पड़ने और धीरे-धीरे सूखने लग सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण जांच के लिए संदिग्ध गन्ने के तने को बीच से चीरकर देखना चाहिए। यदि तने के अंदर लाल रंग का ऊतक दिखाई दे और उसके बीच सफेद अनुप्रस्थ धारियां नजर आएं तो यह लाल सड़न का प्रमुख संकेत हो सकता है। संक्रमित ऊतक से खट्टी या सिरके जैसी गंध भी आ सकती है।

सितंबर में किसान रहें अलर्ट
मानसून के दौरान खेत में नमी और बारिश की स्थिति लगातार बदलती रहती है। ऐसे में किसानों को खेत का नियमित निरीक्षण करना चाहिए। अचानक पीले पड़ने या सूखने वाले पौधों पर विशेष ध्यान दें और संदिग्ध पौधे की आंतरिक जांच कराएं। रोगग्रस्त पौधों को स्वस्थ फसल के बीच छोड़ना या उनसे अगली फसल के लिए बीज गन्ना तैयार करना उचित नहीं है। संक्रमित पौधों को कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार खेत से हटाना चाहिए।

संक्रमित बीज गन्ने से फैल सकता है रोग
लाल सड़न के प्रसार में संक्रमित बीज गन्ने की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। रोगग्रस्त खेत से गन्ने के टुकड़े लेकर अगली फसल में इस्तेमाल करने पर संक्रमण नए खेत तक पहुंच सकता है। इसलिए बुवाई के लिए हमेशा स्वस्थ और रोगमुक्त रोपण सामग्री का इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। रोग प्रभावित खेत में लगातार पेड़ी लेने से भी समस्या बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार फसल प्रबंधन और अगली फसल की योजना बनाना जरूरी है।

खेत में रोग दिखे तो क्या करें?
अगर कुछ पौधों में लाल सड़न के स्पष्ट लक्षण दिखाई दें तो पहले सही पहचान कराना जरूरी है। केवल पत्तियों के पीले होने को लाल सड़न मान लेना सही नहीं होगा, क्योंकि गन्ने में कई दूसरे कारणों से भी पत्तियां पीली हो सकती हैं। स्पष्ट रूप से संक्रमित पौधों को जड़ सहित निकालकर खेत से बाहर नष्ट करने की सलाह दी जाती है। ऐसे पौधों को खेत में छोड़ने या उनसे रोपण सामग्री तैयार करने से संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।

दवा का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से करें
लाल सड़न के लिए हर खेत और परिस्थिति में एक ही दवा को प्रभावी मानना उचित नहीं है। गन्ने की किस्म, रोग की स्थिति, खेत की परिस्थितियों और स्थानीय रोग प्रबंधन सलाह के आधार पर उपचार तय किया जाना चाहिए। बिना सही पहचान के बार-बार फफूंदनाशक का इस्तेमाल करने के बजाय कृषि विशेषज्ञ या स्थानीय कृषि विभाग से सलाह लेना बेहतर है। रोग की शुरुआती पहचान और समेकित प्रबंधन से नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

अगली फसल को बचाने के लिए रखें ध्यान
लाल सड़न की रोकथाम केवल रोग दिखाई देने के बाद शुरू नहीं होती। स्वस्थ बीज गन्ने का चयन, रोग प्रतिरोधी किस्मों का इस्तेमाल, संक्रमित पौधों को हटाना और नियमित खेत निरीक्षण इसके प्रबंधन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। किसी क्षेत्र में गन्ने की किस्म का चयन स्थानीय परिस्थितियों और वहां मौजूद रोग की स्थिति को ध्यान में रखकर करना चाहिए। किसानों को बुवाई से पहले रोपण सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

Naveen Kumar Sahu
लेखक / पत्रकार:

Naveen Kumar Sahu

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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