IAS/IPS officers-designate caught in a controversy: देश में 2025 में आयोजित UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफल हुए 958 उम्मीदवारों के लिए अब नियुक्ति और ट्रेनिंग के लिए लंबा इंतजार करना पद रहा है। इनमें IAS, IPS और दूसरी केंद्रीय सेवाओं में जाने वाले उम्मीदवार शामिल हैं। वजह है OBC क्रीमी लेयर के नियमों को लेकर चल रहा कानूनी विवाद।
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद आरक्षण तय करने के तरीके पर सवाल उठे हैं। केंद्र सरकार ने इस फैसले को लागू करने के तरीके पर अदालत से स्पष्टीकरण मांगा है। फिलहाल सर्विस अलॉटमेंट और फाउंडेशन कोर्स की प्रक्रिया अटकी हुई है।
क्या है पूरा मामला – 958 अफसरों का करियर क्यों अटका?
UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में कुल 958 उम्मीदवार सफल हुए थे। इनमें IAS, IPS, IRS और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए चुने गए युवा शामिल हैं। लेकिन रिजल्ट के 2 महीने बाद भी इनकी जॉइनिंग और ट्रेनिंग शुरू नहीं हो पाई है।
वजह है सर्विस अलॉटमेंट और फाउंडेशन कोर्स की प्रक्रिया का अटक जाना। दरअसल, 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद OBC क्रीमी लेयर के नियमों पर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार ने इस फैसले को लागू करने के तरीके पर कोर्ट से ही स्पष्टीकरण मांगा है, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है।
OBC Creamy Layer क्या है? – आरक्षण का पूरा गणित समझिए
OBC वर्ग के सभी उम्मीदवारों को आरक्षण नहीं मिलता। इसके लिए दो कैटेगरी बनी हैं –
- Non-Creamy Layer: जो इस दायरे में आते हैं, उन्हें OBC आरक्षण का लाभ मिलता है।
- Creamy Layer: जो इस दायरे में आते हैं, वे OBC आरक्षण के पात्र नहीं होते, उन्हें जनरल में गिना जाता है।
विवाद की जड़ – जब उम्मीदवार के माता-पिता प्राइवेट कंपनी, PSU, यूनिवर्सिटी या किसी अन्य संस्थान में काम करते हैं, तो यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि उनकी नौकरी को किस स्तर पर देखा जाए। सवाल सिर्फ सैलरी का नहीं, बल्कि पद के लेवल का भी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा था –
“OBC उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में रखने का फैसला सिर्फ माता-पिता की आमदनी के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए उनकी नौकरी की प्रकृति, पद के स्तर और लागू नियमों को भी देखना होगा।”
कोर्ट ने उदाहरण देकर समझाया – किसी प्राइवेट कंपनी में किसी व्यक्ति की सैलरी ज्यादा हो सकती है, लेकिन पद शुरुआती स्तर का हो सकता है। वहीं, किसी सरकारी कर्मचारी का पद ऊंचा हो सकता है, भले ही सैलरी बराबर हो। इसलिए दोनों को एक तराजू में नहीं तौला जा सकता। कोर्ट का मकसद समान स्थिति वाले उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग व्यवहार को रोकना था।
958 नए अफसरों की ट्रेनिंग क्यों अटकी?
इस पूरे मामले को समझने के लिए घटनाक्रम पर नजर डालना जरूरी है। पहले UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट आया और 958 उम्मीदवार सफल हुए। इसके बाद 11 मार्च 2026 के फैसले ने OBC क्रीमी लेयर तय करने के तरीके पर कानूनी स्थिति स्पष्ट की। अब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा है कि इस फैसले को किस तरह लागू किया जाए और क्या इसका असर पहले लिए गए फैसलों पर भी पड़ेगा।
इसी स्पष्टीकरण का इंतजार सर्विस अलॉटमेंट की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। जब तक उम्मीदवारों की सेवा तय नहीं होती, उनके प्रशिक्षण की आगे की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। इस वजह से नए चयनित उम्मीदवारों को IAS, IPS, IRS या दूसरी केंद्रीय सेवाओं में जाने के बाद की औपचारिकताओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
Foundation Course क्या होता है और क्यों जरूरी है?
UPSC में चयन के बाद रैंक, पसंद और आरक्षण नियमों के आधार पर सेवाएं दी जाती हैं। उसके बाद सभी को फाउंडेशन कोर्स करना होता है।
यह कोर्स मसूरी स्थित LBSNAA (लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी) में होता है। यहां नए अधिकारियों को संविधान, सरकारी कामकाज, प्रशासन और पब्लिक पॉलिसी की ट्रेनिंग दी जाती है। यह अलग-अलग सेवाओं के अधिकारियों को एक साथ प्रशासनिक काम के लिए तैयार करने की पहली सीढ़ी है।
इस देरी का बड़ा असर – सिविल सेवा में सीनियरिटी की गिनती फाउंडेशन कोर्स शुरू होने की तारीख से होती है। इसलिए देरी से न सिर्फ जॉइनिंग, बल्कि पूरे करियर की टाइमलाइन पर असर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम असर नियमों और कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा।
पहले के 100 OBC उम्मीदवारों का क्या होगा?
इस विवाद का असर सिर्फ 2025 वालों पर नहीं है। रिपोर्ट में करीब 100 ऐसे उम्मीदवारों का भी जिक्र है, जिन्होंने पिछले सालों में UPSC पास की थी, लेकिन उनकी OBC आरक्षण की मांग खारिज कर उन्हें क्रीमी लेयर में डाल दिया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट की नई व्याख्या के बाद इन पुराने मामलों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनके मामलों की दोबारा जांच होगी?
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांगा?
केंद्र ने कोर्ट के सामने दो बड़ी मांगें रखीं –
- पहले पूरे हो चुके दाखिले, दी गई डिग्रियां और तय अधिकार नए फैसले के कारण अपने आप दोबारा न खोले जाएं।
- नए नियम लागू करने की तैयारी के लिए सरकार को 2 साल का समय दिया जाए। सरकार को तय करना है कि प्राइवेट कंपनियों, PSU और अन्य संस्थानों के कौन-से पद सरकारी पदों के बराबर माने जाएं, क्योंकि यही तुलना क्रीमी लेयर तय करने में अहम होगी।
बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को इस मांग पर सुनवाई पूरी कर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। अब 958 उम्मीदवारों को किस बात का इंतजार है?
सारा पेंच OBC क्रीमी लेयर तय करने के तरीके पर है। कोर्ट ने कहा – सिर्फ कमाई मत देखो। केंद्र पूछ रहा है – इसे पुराने मामलों और अलग-अलग नौकरियों पर कैसे लागू करें?
जब तक कोर्ट का स्पष्टीकरण नहीं आता, तब तक 958 नए अफसरों के सर्विस अलॉटमेंट और ट्रेनिंग पर सस्पेंस बना रहेगा। इस मामले में अगला कानूनी कदम ही तय करेगा कि देश को नए IAS-IPS कब मिलेंगे।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. कितने अफसरों की ट्रेनिंग अटकी है?
958 उम्मीदवार जो UPSC CSE 2025 में सफल हुए थे – IAS, IPS, IRS समेत।
Q2. ट्रेनिंग क्यों अटकी है?
OBC क्रीमी लेयर तय करने के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के फैसले के बाद केंद्र ने स्पष्टीकरण मांगा है, जिससे सर्विस अलॉटमेंट रुका है।
Q3. OBC क्रीमी लेयर विवाद क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्रीमी लेयर सिर्फ आमदनी से नहीं, पद और नौकरी की प्रकृति देखकर तय होगा। प्राइवेट और PSU नौकरियों की तुलना कैसे हो, यही पेंच है।
Q4. Foundation Course क्या होता है?
LBSNAA मसूरी में IAS/IPS को संविधान, प्रशासन, पॉलिसी की बुनियादी ट्रेनिंग दी जाती है, सीनियरिटी भी इसी से तय होती है।
Q5. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की है?
पुराने मामलों को दोबारा न खोलने और नए नियम लागू करने के लिए 2 साल का समय।



