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Bilaspur: स्वास्थ्य विभाग में बिना पद के ही अतिरिक्त संचालक की पदस्थापना का मामला हाईकोर्ट में, शासन ने अपना पक्ष रखने के लिए मांगा समय

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में प्रमुख पदों पर अनुभवी अधिकारियों को पदस्थ करने की बजाय प्रशासनिक अफसरों को जिम्मेदारी सौंपे जाने के खिलाफ डॉक्टरों के संगठन छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन(CIDA) की लड़ाई अब हाई कोर्ट तक पहुंच गई है। संगठन ने स्वास्थ्य सेवाएं के मुख्यालय में बिना पद के ही अतिरिक्त संचालक की पदस्थापना के […]

HIGH COURT HEALTH ISSUE
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में प्रमुख पदों पर अनुभवी अधिकारियों को पदस्थ करने की बजाय प्रशासनिक अफसरों को जिम्मेदारी सौंपे जाने के खिलाफ डॉक्टरों के संगठन छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन(CIDA) की लड़ाई अब हाई कोर्ट तक पहुंच गई है। संगठन ने स्वास्थ्य सेवाएं के मुख्यालय में बिना पद के ही अतिरिक्त संचालक की पदस्थापना के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसकी पहली सुनवाई के दौरान न्यायाधीश की गंभीर टिप्पणी के बाद शासन द्वारा अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा गया। जिसके बाद कोर्ट ने 28 अक्टूबर को अगली सुनवाई तय की है और इससे पहले शासन को अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।

स्वास्थ्य विभाग में पूर्व में जूनियर डॉक्टर्स को सीएमएचओ और सिविल सर्जन के पदों पर बिठाये जाने का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है और इस बीच मुख्यालय में Director एवं Additional Director के पदों पर गैर-चिकित्सकीय या कहें स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुभवहीन प्रशासनिक अफसरों की नियुक्ति कर दी गई है। दो पदों पर ऐसी नियुक्ति के बाद जब एक नया पद सृजित करते हुए अतिरिक्त संचालक की पदस्थापना की गई तब डॉक्टरों के संगठन छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन(CIDA) ने इस पर विरोध जताया। मगर जब विभाग के मुखिया ने कोई संज्ञान नहीं लिया तब हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।

अनुभवी अफसरों को दरकिनार कर की गई पदस्थापना

स्वास्थ्य विभाग में बतौर संचालक आईएएस अफसर संजीव झा पदस्थ हैं। हाल ही में उनके आदेश से प्रशासनिक अफसर इंद्रजीत बर्मन को मुख्यालय में एडिशनल डायरेक्टर याने अतिरिक्त संचालक के पद पर पदस्थ करने का आदेश जारी करते हुए उन्हें नेशनल हेल्थ एन्ड फैमिली वेलफेयर इंस्टिट्यूट का डायरेक्टर बना दिया गया। सीडा का तर्क है कि अतिरिक्त संचालक का पद सर्विस रूल में है ही नहीं, ऐसे में नया पद सृजित करने का अधिकार किसने दिया।

ट्रेनिंग जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में अनुभवहीन की पदस्थापना

हाई कोर्ट में दायर याचिका में संगठन सीडा के साथ DHS के चिकित्सक कैडर के Deputy & Joint Directors भी याचकाकर्ता हैं। सीडा का कहना है कि स्वास्थ्य अमले के प्रशिक्षण संस्थान में मेडिकल की जानकारी के बिना कोई अफसर उसका संचालन कैसे कर सकता है। जबकि विभाग में 25 से 30 वर्षों का अनुभव रखने वाले कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद हैं। उन्हें दरकिनार कर गैर चिकित्स्कीय अनुभव वाले अफसर को पदस्थ करने का कोई औचित्य नहीं है।

पूर्व में दो और अफसरों की हो चुकी है पदस्थापना

संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं के अधीन कुछ समय पूर्व ही Director एवं Additional Director पदों पर गैर-चिकित्सकीय नियुक्तियां हो चुकी हैं। इन पदों पर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को पदस्थ किया गया है, जिसका विरोध विभाग के अनुभवी चिकित्स्कों और इनके संगठन सीडा ने किया मगर संचालक ने इसे दरकिनार करते हुए उल्टे नए पद सृजित करते हुए एक और प्रशासनिक अफसर की नियुक्ति विभाग में कर दी, जिसके खिलाफ अब न्यायालयीन लड़ाई शुरू हो चुकी है।

न्यायाधीश ने उठाया सवाल

इस मामले की पहली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सवाल किया कि 25–30 वर्षों का चिकित्सकीय एवं विभागीय अनुभव रखने वाले वरिष्ठ चिकित्सकों से अधिक वरिष्ठ और अनुभवी कोई ब्यूरोक्रेट किस आधार पर माना जा सकता है। इस पर शासन का पक्ष रखते हुए सहायक महाधिवक्ता ने कहा कि संबंधित पद के लिए विभाग में कोई वरिष्ठ अनुभवी अफसर नहीं मिला जिसके चलते नेशनल हेल्थ एन्ड फैमिली वेलफेयर इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर के पद पर अनुभवी प्रशासनिक अफसर की तैनाती की गई है।

इस पर न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर बनाने के नाम पर तकनीकी विभागों के उच्च पदों पर ब्यूरोक्रेट्स को बैठाया जा सकता है, तो फिर इसी तर्क से न्यायालय विभाग के प्रशासनिक पदों पर भी ब्यूरोक्रेट्स को पदस्थ किया जा सकता है। कोर्ट के इस तर्क के बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता ने शासन का पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। इसके बाद न्यायाधीश ने मामले को 28 अक्टूबर 2026 को प्राथमिकता के आधार पर आगे की सुनवाई के लिए रखा। साथ ही राज्य को शीघ्र जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. स्वास्थ्य विभाग का मामला हाई कोर्ट में क्यों पहुंचा है?
Ans. CIDA ने स्वास्थ्य सेवाएं मुख्यालय में सर्विस रूल में नहीं होने के बावजूद अतिरिक्त संचालक का नया पद सृजित कर प्रशासनिक अफसर इंद्रजीत बर्मन की पदस्थापना के खिलाफ याचिका दायर की है। संगठन का कहना है 25-30 साल के अनुभवी डॉक्टरों को दरकिनार किया गया है।

Q2. सुनवाई में जज ने क्या सवाल उठाया?
Ans. जज ने पूछा कि वरिष्ठ चिकित्सकों से अधिक अनुभवी ब्यूरोक्रेट किस आधार पर माना जा सकता है? कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर तकनीकी विभागों में ब्यूरोक्रेट बैठ सकते हैं तो न्यायालय के प्रशासनिक पदों पर भी बैठाए जा सकते हैं।

Q3. अगली सुनवाई कब होगी?
Ans. शासन के समय मांगने पर कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को प्राथमिकता के आधार पर अगली सुनवाई तय की है और शासन को शीघ्र जवाब दाखिल करने को कहा है।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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