case of alleged fraud: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एप्पल प्रोडक्ट्स के एक डिस्ट्रीब्यूटर और रीटेल डीलर से 22 लाख रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो युवकों और एक युवती ने खुद को बड़े स्तर का खरीदार बताकर कारोबारी का विश्वास जीता और उससे एप्पल कंपनी के 9 महंगे मोबाइल उधार में ले लिए। इसके अलावा कार्ड स्वाइप के जरिए भी लाखों रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। रकम वापस नहीं मिलने पर पीड़ित कारोबारी ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। यह मामला कारोबारियों के लिए बहुत बड़ा सबक है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बौरीपारा निवासी आदित्य हर्षवर्धन गुप्ता एप्पल उत्पादों की डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल बिक्री से जुड़े हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि सितंबर 2025 में एक परिचित व्यक्ति के माध्यम से उनकी मुलाकात नमनाकला निवासी आयुष सिंह से हुई थी।
बड़ा खरीदार बताकर कारोबारी का जीता भरोसा
शिकायतकर्ता के मुताबिक, आयुष सिंह ने खुद को बड़े स्तर पर एप्पल उत्पादों की खरीदारी करने वाला व्यक्ति बताया था। उसने कारोबारी से बड़ी मात्रा में मोबाइल और अन्य उत्पाद खरीदने का प्रस्ताव रखा। भरोसा दिलाने के लिए आयुष ने कारोबारी की मुलाकात संजय सिंह और मोनिका मलिक से भी कराई। इसके बाद उनके बीच व्यापारिक लेनदेन शुरू हुआ। आरोप है कि इसी विश्वास का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने कारोबारी से महंगे मोबाइल उधार में लिए और निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किया।
9 महंगे iPhone उधार में लेने का आरोप
कारोबारी ने पुलिस को बताया कि 12 अक्टूबर से 6 दिसंबर 2025 के बीच आयुष सिंह को एप्पल कंपनी के कुल 9 महंगे मोबाइल दिए गए थे। इनमें iPhone 16 Plus, iPhone 17 और iPhone 17 Pro मॉडल शामिल थे। सभी मोबाइल की कुल कीमत 8 लाख 80 हजार रुपये से अधिक बताई गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने व्यापारिक लेनदेन के आधार पर मोबाइल उधार लिए थे, लेकिन बाद में उनका भुगतान नहीं किया। कारोबारी का आरोप है कि मोबाइल देने के बाद जब रकम वापस मांगी गई तो भुगतान नहीं किया गया।
कार्ड स्वाइप कर लाखों रुपये लेने का आरोप
शिकायत में बताया गया है कि दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह में आयुष सिंह ने कान्हा मोबाइल के माध्यम से व्यापारिक भुगतान के लिए रखी गई 11 लाख 50 हजार रुपये की रकम कथित तौर पर बिना अनुमति किस्तों में कार्ड स्वाइप कराकर ले ली। इसके अलावा 23 दिसंबर 2025 को कार्ड से 1 लाख 70 हजार रुपये और 24 दिसंबर को 80 हजार रुपये और लेने का आरोप लगाया गया है। इस प्रकार मोबाइल और अन्य लेनदेन को मिलाकर कारोबारी ने 22 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी होने की शिकायत पुलिस से की है।
रकम लौटाने का लिखित आश्वासन भी दिया
पीड़ित कारोबारी ने पुलिस को बताया कि जब उसने अपनी रकम वापस मांगी तो आयुष सिंह, संजय सिंह और मोनिका मलिक ने संयुक्त रूप से लिखित आश्वासन दिया था। शिकायत के मुताबिक, तीनों ने मूलधन के साथ ब्याज सहित रकम वापस करने की बात कही थी। हालांकि, इसके बाद भी कारोबारी को भुगतान नहीं मिला। आरोप है कि बार-बार पैसे मांगने पर शिकायतकर्ता को धमकाया गया। साथ ही उसे झूठे मामले में फंसाने की चेतावनी भी दी गई। इसके बाद कारोबारी ने पूरे मामले की शिकायत अंबिकापुर कोतवाली पुलिस से की।
तीन आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज
शिकायत के आधार पर कोतवाली पुलिस ने नमनाकला निवासी आयुष सिंह, संजय सिंह और मोनिका मलिक के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। तीनों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316, 61(2) और 351 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है। पुलिस अब कारोबारी की शिकायत में दर्ज मोबाइल के लेनदेन, कार्ड स्वाइप से संबंधित रकम और आरोपियों द्वारा दिए गए कथित लिखित आश्वासन सहित पूरे मामले की जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस ने तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम और आरोपियों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. अंबिकापुर में 22 लाख की ठगी का मामला क्या है?
Ans. बौरीपारा के एप्पल डिस्ट्रीब्यूटर आदित्य गुप्ता से 22 लाख+ की ठगी हुई है। आरोपियों ने बड़ा खरीदार बनकर 9 iPhone (कीमत 8.80 लाख) उधार लिए और कार्ड स्वाइप कर 14 लाख रुपए निकाल लिए।
Q2. आरोपी कौन हैं और कैसे भरोसा जीता?
Ans. आरोपी आयुष सिंह (नमनाकला), संजय सिंह और मोनिका मलिक हैं। सितंबर 2025 में एक परिचित के जरिए संपर्क कर खुद को बड़ा खरीदार बताया और व्यापारिक लेनदेन शुरू कर भरोसा जीता।
Q3. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
Ans. पीड़ित कारोबारी की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने तीनों के खिलाफ BNS धारा 318(4), 316, 61(2), 351 में FIR दर्ज की है। कार्ड लेनदेन और लिखित आश्वासन की जांच जारी है।



