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Suspension Breaking: स्वास्थ्य विभाग के अफसर डॉ गहवई को किया गया निलंबित, सरकारी आचरण के नियमों के उल्लंघन का आरोप, जानें क्या है निलंबन की असली वजह

RAIPUR: स्वास्थ्य संचालनालय में उप संचालक के पद पर पदस्थ डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई को निलंबित किया गया है। हालांकि विभाग ने उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया है, मगर पता चला है कि इस कार्यवाही के पीछे की कहानी कुछ और ही है। स्वास्थ्य संचालनालय में उप संचालक के पद पर पदस्थ डॉ. धर्मेन्द्र […]

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तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

RAIPUR: स्वास्थ्य संचालनालय में उप संचालक के पद पर पदस्थ डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई को निलंबित किया गया है। हालांकि विभाग ने उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया है, मगर पता चला है कि इस कार्यवाही के पीछे की कहानी कुछ और ही है।

स्वास्थ्य संचालनालय में उप संचालक के पद पर पदस्थ डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई को मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव के हस्ताक्षर से निलंबित किया गया है।
जारी आदेश के अनुसार, डॉ. गहवई ने सरकारी आचरण नियमों का उल्लंघन किया है, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है।

निलंबन आदेश में किन बातों का है उल्लेख

हाल ही में आयुष्मान भारत के उप संचालक पद से हटाए गए डॉ धर्मेंद्र गहवाई के निलंबन आदेश में उल्लेख है कि “संचालक, स्वास्थ्य सेवायें, संचालनालय नवा रायपुर द्वारा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 03 एवं 22 (क) का स्पष्ट उल्लंघन किए जाने फलस्वरूप राज्य शासन एतद द्वारा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9(1) (क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित करता है।

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय रायपुर में रहेगा। वे बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।यह आदेश मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव द्वारा जारी किया गया है।

क्या है छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 03 एवं 22 (क) ?

छत्तीगसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम का अवलोकन करें तो पता चलता है कि नियम 3 में शासकीय संरक्षण प्राप्त निजी उपक्रम में शासकीय सेवाओं के निकट संबंधों को नौकरी में रखे जाने का उल्लेख है। वहीं 22 (क) में बहु विवाह का जिक्र है। इस नियम के तहत उल्लेख है कि कोई शासकीय सेवक जिसकी पत्नी जीवित हो, शासन की अनुमति प्राप्त किये बिना दूसरा विवाह नहीं करेगा, भले ही ऐसा पश्चात्वर्ती विवाह तत्समय उसको लागू होने वाली वैयक्तिक विधि के अधीन अनुज्ञेय हो:

अदालत में चल रहा है बहू विवाह का मामला

पता चला है कि डॉ गहवई ने दो विवाह किये हैं और यह मामला बहुत पुराना है तथा इसका प्रकरण न्यायालय में चल रहा है। स्वास्थ्य जगत में डॉ गहवई के निलंबन के बाद इस बात की चर्चा जोरों पर है कि इतने पुराने मामले में निलंबन का क्या औचित्य, जिसका प्रकरण पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है।

क्या है निलंबन के पीछे की स्टोरी ?

हाल ही में डॉ गहवई को आयुष्मान भारत के प्रभार से हटाकर प्रशासनिक सेवा से लाये गए डिप्टी कलेक्टर देवेंद्र प्रधान को उनके स्थान पर उप संचालक बनाया गया है। जानकर बताते हैं कि स्वास्थ्य संचालनालय पिछले कुछ समय से हाई कोर्ट में चल रहे दो मामलों के कारण चर्चा में है। ये दोनों मामले संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं में प्रशासनिक सेवाओं के अफसरों को पदस्थ करने को लेकर है। इनमें से एक मामले में याचिकाकर्ता डॉ गहवई भी हैं। माना जा रहा है कि इसी के चलते वे ‘ऊपर वालों’ की नाराजगी का शिकार हुए हैं।

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं के पद पर आईएएस अफसर संजीव झा पदस्थ हैं। हाल ही में स्वास्थ्य सेवाएं में प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े 3 अफसरों की पदस्थापना की गई है, जिसके खिलाफ डॉक्टरों के संगठन CIDA के अलावा उप संचालक के पद पर पदस्थ वरिष्ठ चिकित्सक भी याचिकाकर्ता हैं।

बिना पद के पदस्थापना के खिलाफ याचिका

संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं में अपर संचालक का पद नहीं होने के बावजूद डिप्टी कलेक्टर रैंक के अफसर इंद्रजीत बर्मन की पदस्थापना कर दी गई है। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमे CIDA के अलावा उप संचालक डॉ निर्मला यादव, डॉ धर्मेंद्र गहवई और डॉ पद्मिनी सिंह भी याचिकाकर्ता हैं।

एक अन्य मामले में प्रशासनिक अफसर प्रेमलता चंदेल के स्वास्थ्य सेवाओं में पदस्थापना के खिलाफ CIDA के साथ ही डॉ स्मृति देवांगन, डॉ संजीव कुमार देवांगन, डॉ कैलाश कुमार सहारे और डॉ विश्वनाथ राम भगत याचिकाकर्ता हैं। याचकाकर्ताओं का कहना है कि बिना अनुभव वाले अफसरों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पदों पर बिठाना गलत है और नियम विरुद्ध है, वहीं एक पद तो नहीं होते हुए भी सृजित कर लिया गया है। याचकाकर्ताओं का कहना है कि बिना अनुभव वाले अफसरों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पदों पर बिठाना गलत है और नियम विरुद्ध है, वहीं एक पद तो नहीं होते हुए भी सृजित कर लिया गया है।

बता दें कि पहले मामले की पिछले दिनों हुई सुनवाई में न्यायाधीश ने संचालक, स्वास्थ्य सेवाओं में इस तरह की पदस्थापना पर तल्ख टिप्पणी की और नोटिस जारी कर विभाग से जवाब मांगा है। माना जा रहा है कि हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का खामियाजा डॉ गहवई को भुगतना पड़ रहा है। एक पुराने मामले में उनको विभाग की ओर से निलंबित कर दिया गया है।

इस मामले में TRP News की ओर से डॉ गहवई का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, मगर उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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