Raipur: छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों की मनमानी पर आखिरकार प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति (AFRC) ने चाबुक चला दिया है। MBBS छात्रों से जबरन हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट फीस वसूलने की शिकायत के बाद समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (RIMS) समेत संबंधित कॉलेजों को शो-कॉज नोटिस जारी किया है और 7 दिन में जवाब मांगा है।
AFRC ने साफ शब्दों में कहा है – हॉस्टल, मेस और ट्रांसपोर्ट वैकल्पिक हैं, अनिवार्य नहीं। जो छात्र हॉस्टल में नहीं रहना चाहता, उसे डे-स्कॉलर के तौर पर पढ़ने से नहीं रोका जा सकता। अंतिम निर्णय तक किसी भी छात्र पर दबाव न डाला जाए।
शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई – वाजपेयी परिवार ने उठाई आवाज
22 अक्टूबर को AFRC ने RIMS के डीन को पत्र लिखा। यह पत्र अभिभावक निश्चय वाजपेयी की शिकायत पर जारी हुआ, जिनके बेटे संकल्प वाजपेयी MBBS प्रथम वर्ष के छात्र हैं और हॉस्टल सुविधा नहीं लेना चाहते थे, लेकिन कॉलेज जबरन फीस वसूल रहा था।
समिति के 4 बड़े निर्देश –
- हॉस्टल सुविधा लेना बाध्यकारी नहीं है।
- छात्रों को डे-स्कॉलर बनने से रोका नहीं जा सकता।
- हॉस्टल, मेस, ट्रांसपोर्ट पूरी तरह वैकल्पिक हैं।
- फीस ‘नो प्रॉफिट नो लॉस’ पर सिर्फ सुविधा लेने वालों से ही ली जाए।
ये कोई नई मनमानी नहीं – 4.5 लाख तक की अवैध वसूली का पुराना खेल
यह मामला अकेला नहीं है। निजी मेडिकल कॉलेजों की अवैध वसूली का खेल सालों से चल रहा है।
AFRC ने अप्रैल 2025 में और शासन ने सितंबर 2025 में आदेश दिया था कि सत्र 2022-23 से छात्रों से अधिक वसूली गई फीस वापस की जाए।
तीन कॉलेजों को प्रति छात्र लौटानी थी राशि –
- श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट, भिलाई – ₹4,43,173
- रायपुर इंस्टीट्यूट (RIMS) – ₹4,53,593
- श्री बालाजी इंस्टीट्यूट – ₹4,58,222
आदेश में कहा गया था कि पालन न करने पर 7% ब्याज और 10-10 लाख जुर्माना लगेगा। लेकिन कॉलेजों ने न तो पैसा लौटाया, न मनमानी बंद की। तंग आकर निश्चय वाजपेयी ने पुलिस कमिश्नर से धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और शासन के आदेश की अवहेलना की शिकायत की थी।
PG सीटों पर 70 लाख का बोझ – मध्यम वर्ग से दूर हो रही मेडिकल शिक्षा
इससे पहले PG की 274 सीटों पर भी यही खेल हुआ था। ट्यूशन फीस के अलावा –
- हॉस्टल के नाम पर 4.5 से 5.5 लाख/साल
- एडवांस प्रोफेशनल ट्रेनिंग के नाम पर 3 से 6 लाख
- 1 लाख डिपॉजिट
कुल मिलाकर एक PG छात्र पर 70 लाख से ज्यादा का बोझ। डॉक्टर संगठनों का आरोप है कि AFRC के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे मेडिकल शिक्षा सिर्फ पैसे वालों की बपौती बनती जा रही है।
AFRC के इस ताजा शो-कॉज नोटिस ने छात्रों को फिलहाल राहत दी है। अब सबकी नजर है कि 7 दिन बाद समिति क्या सख्त कार्रवाई करती है, क्योंकि अभिभावकों को उम्मीद है कि इस बार सिर्फ कागजी नोटिस नहीं, ठोस कार्रवाई होगी।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. AFRC ने निजी मेडिकल कॉलेजों को क्या निर्देश दिया है?
AFRC ने 22 अक्टूबर को RIMS के डीन को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि हॉस्टल, मेस और ट्रांसपोर्ट सुविधा अनिवार्य नहीं है, वैकल्पिक है। जो छात्र हॉस्टल नहीं लेना चाहते उन्हें डे-स्कॉलर के रूप में पढ़ने की अनुमति दी जाए और अंतिम निर्णय तक छात्रों पर कोई दबाव न डाला जाए।
Q2. यह कार्रवाई किस शिकायत पर हुई?
अभिभावक निश्चय वाजपेयी ने शिकायत की थी कि उनके बेटे संकल्प वाजपेयी जो MBBS प्रथम वर्ष के छात्र हैं, हॉस्टल नहीं लेना चाहते फिर भी कॉलेज जबरन हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट फीस वसूल रहा है। इसी शिकायत पर AFRC ने संबंधित कॉलेजों को 7 दिन में जवाब के लिए शो-कॉज नोटिस भेजा है।
Q3. निजी मेडिकल कॉलेजों पर कितनी अवैध वसूली का आरोप है?
AFRC और शासन के अप्रैल और सितंबर 2025 के आदेश के अनुसार तीन कॉलेजों को प्रति छात्र 4.43 लाख से 4.58 लाख तक की राशि वापस करनी थी – श्री शंकराचार्य भिलाई को ₹4,43,173, RIMS को ₹4,53,593 और श्री बालाजी को ₹4,58,222। पालन न करने पर 7% ब्याज और 10-10 लाख जुर्माने का प्रावधान था, लेकिन कॉलेजों ने राशि नहीं लौटाई।
Q4. PG मेडिकल सीटों पर कितनी फीस वसूली जा रही थी?
तीन निजी कॉलेजों की कुल 274 PG सीटों पर ट्यूशन फीस के अलावा हॉस्टल के नाम पर 4.5 से 5.5 लाख सालाना, एडवांस प्रोफेशनल ट्रेनिंग के नाम पर 3 से 6 लाख और 1 लाख डिपॉजिट वसूला जा रहा था, जिससे एक छात्र पर कुल बोझ 70 लाख से अधिक हो रहा था।



