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UPSC Success Story: 10 साल पहनीं ‘दर्दनाक बेड़ियां’, झुग्गी में बीता बचपन… जानिए उम्मुल खेर के पहली ही बार में IRS बनने की दास्तां

UPSC Success Story: शारीरिक बीमारी और भयंकर आर्थिक तंगी को मात देकर उम्मुल खेर ने सफलता की एक अभूतपूर्व मिसाल पेश की है। दुर्लभ बीमारी के कारण जीवन का बड़ा हिस्सा प्लास्टर में बिताने और दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित झुग्गी बस्ती में रहने के बावजूद उम्मुल ने पढ़ाई को अपना संबल बनाया। उन्होंने अपने […]

UPSC Success Story: How Ummul Kher Overcame Bone Disorder to Become IRS Officer
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

UPSC Success Story: शारीरिक बीमारी और भयंकर आर्थिक तंगी को मात देकर उम्मुल खेर ने सफलता की एक अभूतपूर्व मिसाल पेश की है। दुर्लभ बीमारी के कारण जीवन का बड़ा हिस्सा प्लास्टर में बिताने और दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित झुग्गी बस्ती में रहने के बावजूद उम्मुल ने पढ़ाई को अपना संबल बनाया।

उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा क्रैक की और 2017 बैच की इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारी बनीं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि दृढ़ संकल्प के आगे शारीरिक सीमाएं और गरीबी कभी बाधा नहीं बन सकतीं।

ऑस्टियोजेनेसिस इमपरफेक्टा बीमारी से जंग, कांच की तरह नाजुक थीं हड्डियां

उम्मुल खेर का बचपन शारीरिक पीड़ा के बीच बीता। वे ऑस्टियोजेनेसिस इमपरफेक्टा (Fragile Bone Disorder) नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थीं। इस बीमारी के कारण उनकी हड्डियां कांच की तरह बहुत नाजुक थीं और जरा सी चोट में आसानी से टूट जाती थीं। इस वजह से उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा प्लास्टर में ही गुजरा। हालांकि, इस गंभीर बीमारी के बावजूद उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई पर असर नहीं पड़ने दिया।

हजरत निजामुद्दीन की झुग्गी में बीता बचपन, ट्यूशन पढ़ाकर उठाया खर्च

आर्थिक स्थिति बेहद खराब होने की वजह से उम्मुल को अपने जीवन के कुछ साल दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन के पास एक झुग्गी बस्ती में बिताने पड़े। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालने और अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए उन्होंने स्कूल के दिनों से ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था। विपरीत परिस्थितियों में मिली इस सीख ने उन्हें मेहनत करने का जज्बा दिया और यहीं से उनके सफलता के सफर की शुरुआत हुई।

JNU से पढ़ाई और JRF फेलोशिप से मिला आर्थिक सहारा

UPSC की तैयारी के लिए उम्मुल ने दूरगामी सोच के साथ कई रणनीतिक फैसले लिए। उन्होंने अपनी पढ़ाई और समय को संतुलित करने के लिए अपनी पसंदीदा क्लीनिकल साइकोलाॅजी छोड़कर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से इंटरनेशनल स्टडीज को चुना। JNU में पढ़ाई के दौरान उन्होंने JRF फेलोशिप हासिल की। इस फेलोशिप से मिले पैसों ने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए जरूरी आर्थिक सहारा दिया।

10 साल तक पहनीं ‘दर्दनाक बेड़ियां’, पहली बार में हासिल की सफलता

चलने-फिरने के लिए उम्मुल ने 10 साल तक अपने पैरों में भारी और दर्दनाक प्लास्टिक के ब्रेसेस (Braces) पहने। ये ब्रेसेस उनकी त्वचा को छील देते थे और भयंकर कष्ट पहुंचाते थे, लेकिन अनुशासन के साथ वे लगातार कॉलेज जाती रहीं। साउथ कोरिया में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए वीजा न मिलने जैसी निराशाजनक स्थितियों में भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने 2017 में पहले ही प्रयास में UPSC पास कर IRS अधिकारी बनकर इतिहास रच दिया।

5 FAQs

1. उम्मुल खेर कौन हैं?
उम्मुल खेर 2017 बैच की इंडियन रेवेन्यू सर्विस अधिकारी हैं। उन्होंने पहले प्रयास में UPSC परीक्षा पास की थी।

2. उम्मुल खेर को कौन सी बीमारी थी?
उन्हें ऑस्टियोजेनेसिस इमपरफेक्टा यानी Fragile Bone Disorder था। उनकी हड्डियां बेहद नाजुक थीं और आसानी से टूट जाती थीं।

3. उम्मुल खेर ने UPSC कितने प्रयास में पास किया?
उन्होंने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास की थी।

4. उम्मुल खेर ने JNU में क्या पढ़ाई की?
उन्होंने JNU से इंटरनेशनल स्टडीज की पढ़ाई की। इस दौरान उन्होंने JRF फेलोशिप भी हासिल की।

5. उम्मुल खेर ने कितने साल ब्रेसेस पहने?
उन्होंने बताया कि चलने-फिरने के लिए करीब 10 साल तक पैरों में भारी प्लास्टिक ब्रेसेस पहने।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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