Income Tax Gold Limit: घर में सोने के गहने रखना भारतीय परिवारों में आम बात है। कई घरों में गहने शादी, विरासत या पारिवारिक परंपरा के तहत वर्षों से रखे होते हैं। लेकिन जब इनकम टैक्स विभाग की तलाशी में घर से बड़ी मात्रा में सोना मिलता है, तो एक सवाल अक्सर सामने आता है कि आखिर कितना सोना रखने पर कार्रवाई हो सकती है?
इस मामले में 100 ग्राम, 250 ग्राम और 500 ग्राम की चर्चा सबसे ज्यादा होती है। लेकिन इन आंकड़ों को लेकर एक बड़ा भ्रम है। ये किसी व्यक्ति के लिए सोना रखने की कानूनी अधिकतम सीमा नहीं हैं। इनकम टैक्स की तलाशी के दौरान इनका संबंध आम तौर पर ऐसे आभूषणों की मात्रा से है, जिन्हें कुछ परिस्थितियों में जब्त नहीं किया जाता।
क्या 500 ग्राम, 250 ग्राम और 100 ग्राम सोना रखने की कानूनी सीमा है?
नहीं। इनकम टैक्स की तलाशी के संदर्भ में बताई जाने वाली 500 ग्राम, 250 ग्राम और 100 ग्राम की मात्रा को सोना रखने की कानूनी सीमा समझना सही नहीं है। दिसंबर 2016 में वित्त मंत्रालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया था कि सोने के आभूषण या गहने रखने पर कोई सीमा नहीं है। शर्त यह है कि गहने आय के ज्ञात स्रोतों से हासिल किए गए हों। इसमें विरासत से मिले आभूषण भी शामिल हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति के पास 500 ग्राम से अधिक सोना है, तो सिर्फ मात्रा अधिक होने से वह अपने आप गैर-कानूनी नहीं हो जाता। जांच में गहनों के स्रोत और उन्हें रखने के कारण जैसे पहलू भी देखे जाते हैं।
फिर 500 ग्राम, 250 ग्राम और 100 ग्राम का मतलब क्या है?
इनकम टैक्स की तलाशी के दौरान अलग-अलग श्रेणियों के लोगों के पास मिले सोने के गहनों की कुछ मात्रा को आम तौर पर जब्त नहीं किए जाने की बात कही गई है।
| श्रेणी | आम तौर पर जब्त न किए जाने वाली मात्रा |
|---|---|
| शादीशुदा महिला | 500 ग्राम तक |
| अविवाहित महिला | 250 ग्राम तक |
| पुरुष | 100 ग्राम तक |
यहां यह समझना जरूरी है कि ये आंकड़े सोना रखने की अधिकतम कानूनी सीमा नहीं हैं। इनका इस्तेमाल तलाशी के दौरान आभूषणों की जब्ती के संदर्भ में किया जाता है।
अगर घर में इससे ज्यादा सोना मिला तो क्या होगा?
तय मात्रा से ज्यादा गहने मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पूरा अतिरिक्त सोना गैर-कानूनी है या उसे तुरंत जब्त कर लिया जाएगा।ऐसी स्थिति में गहनों के स्रोत को लेकर स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण हो जाता है। टैक्सपेयर को यह बताना पड़ सकता है कि गहने कब और कैसे खरीदे गए या उन्हें किस माध्यम से हासिल किया गया। मसलन, गहने पुराने खरीदे गए हैं तो उनकी खरीद की रसीद उपयोगी हो सकती है। बैंक खाते से भुगतान या पैसे निकालने का रिकॉर्ड भी स्रोत समझाने में मदद कर सकता है। अगर गहने विरासत में मिले हैं, तो उससे जुड़े दस्तावेज काम आ सकते हैं। इसी तरह गिफ्ट डीड जैसे रिकॉर्ड भी उपयोगी हो सकते हैं।
परिवार की परंपरा भी देखी जा सकती है
हर परिवार की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं। कई परिवारों में पीढ़ियों से सोने के आभूषण रखने की परंपरा होती है। तलाशी लेने वाले अधिकारी परिवार के रीति-रिवाजों और परंपराओं जैसी परिस्थितियों को भी ध्यान में रख सकते हैं। इसलिए तय मात्रा से अधिक आभूषण मिलने की स्थिति में भी हर मामले को उसकी परिस्थितियों के आधार पर देखा जा सकता है। यानी 500 ग्राम से ज्यादा सोना मिलने का मतलब यह नहीं है कि बाकी सोना निश्चित रूप से जब्त हो जाएगा। इसी तरह 500 ग्राम से कम सोना होने का मतलब भी यह नहीं है कि हर परिस्थिति में जांच का कोई सवाल ही नहीं उठेगा।
अगर सोने का स्रोत नहीं बता पाए तो क्या होगा?
यह सबसे अहम सवाल है। अगर टैक्सपेयर गहनों के स्रोत के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाता है, तो मामला अलग हो सकता है। ऐसे में विभाग यह जांच सकता है कि गहने किस आय या स्रोत से हासिल किए गए। उपलब्ध दस्तावेज और परिस्थितियां इस जांच में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। दिए गए तथ्यों के अनुसार, क्लियरटैक्स की रिपोर्ट में ऐसे मामलों में 60 प्रतिशत की तय दर से टैक्स, 25 प्रतिशत सरचार्ज और 4 प्रतिशत सेस का उल्लेख किया गया है। इसके आधार पर प्रभावी दर 78 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही गई है। इसके अलावा टैक्स के ऊपर 10 प्रतिशत जुर्माने का भी उल्लेख है। इसलिए गहनों की खरीद और उनके स्रोत से जुड़े रिकॉर्ड संभालकर रखना महत्वपूर्ण हो सकता है।
कौन से दस्तावेज काम आ सकते हैं?
गहनों के स्रोत को समझाने के लिए परिस्थितियों के अनुसार कई तरह के दस्तावेज उपयोगी हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- सोने के गहनों की खरीद की रसीद या बिल
- बैंक खाते से भुगतान या पैसे निकालने का रिकॉर्ड
- विरासत से जुड़े दस्तावेज
- गिफ्ट डीड
- पुराने खरीद रिकॉर्ड
- गहनों के स्रोत से जुड़े अन्य उपलब्ध दस्तावेज
हालांकि हर मामले में कौन सा दस्तावेज पर्याप्त होगा, यह संबंधित परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है।
सबसे बड़ा भ्रम क्या है?
सबसे बड़ा भ्रम यही है कि शादीशुदा महिला 500 ग्राम, अविवाहित महिला 250 ग्राम और पुरुष 100 ग्राम से ज्यादा सोना नहीं रख सकते। वास्तव में इन आंकड़ों को सोना रखने की कानूनी सीमा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इनका संदर्भ इनकम टैक्स की तलाशी के दौरान आम तौर पर जब्त न किए जाने वाले आभूषणों से है। अगर किसी व्यक्ति के पास इससे ज्यादा सोना है, तो उसके स्रोत, खरीद की परिस्थितियों, आय और उपलब्ध दस्तावेज जैसे पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
जरूरी बात
100 ग्राम, 250 ग्राम और 500 ग्राम को सोना रखने की अधिकतम कानूनी सीमा समझना सही नहीं है। इनकम टैक्स की तलाशी में गहनों की मात्रा के साथ-साथ उनके स्रोत और उन्हें रखने की परिस्थितियों को भी देखा जाता है। इसलिए सोने की खरीद, विरासत या उपहार से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना अहम है।
5 FAQs
- क्या भारत में सोना रखने की कोई अधिकतम कानूनी सीमा है?नहीं, यदि सोना आय के ज्ञात स्रोतों या विरासत से हासिल किया गया है, तो इसे रखने की कोई ऊपरी कानूनी सीमा नहीं है।
- इनकम टैक्स रेड में शादीशुदा महिला का कितना सोना ज़ब्त नहीं होगा?शादीशुदा महिला के लिए 500 ग्राम तक के सोने के आभूषण ज़ब्त न किए जाने योग्य माने जाते हैं।
- पुरुषों के लिए सोना रखने की छूट सीमा कितनी है?पुरुषों (शादीशुदा या अविवाहित) के लिए प्रति व्यक्ति 100 ग्राम तक सोने के आभूषण ज़ब्त नहीं किए जाते।
- अगर तय सीमा से ज़्यादा सोना मिले तो क्या वह अपने आप ज़ब्त हो जाता है?नहीं, यदि करदाता खरीद के बिल, बैंक रिकॉर्ड या विरासत के दस्तावेज़ों से स्रोत साबित कर देता है, तो सोना ज़ब्त नहीं होगा।
- सोने का स्रोत साबित न कर पाने पर कितना टैक्स लगता है?अघोषित सोने पर 60% टैक्स, 25% सरचार्ज और 4% सेस मिलाकर कुल 78% टैक्स तथा 10% अतिरिक्त जुर्माना लगता है।


