टीआरपी न्यूज. रायपुर
Chandrakhuri Ram Statue Controversy: चंद्रखुरी में पुरानी राम मूर्ति को हटाकर नई मूर्ति लगाने की योजना सिर्फ पॉलिटिकल एजेंडा मात्र दिखाई दे रही है। ग्वालियर से भगवान श्री राम की मूर्ति फरवरी 2026 से आकर रायपुर में रखी गई है, लेकिन अब तक इसे लगाने का प्रोसेस आगे नहीं बढ़ पाया है। इसके पीछे की एकमात्र वजह है बिना सहमति बनाए ही पूरी योजना तैयार कर लेना।
दरअसल, वर्तमान बीजेपी सरकार ने पुर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा लगवाई गई भगवान राम की प्रतिमा को हटाने का निर्णय लिया था। लेकिन इसके लिए न तो मंदिर ट्रस्ट से सहमति बनाई गई और न ही पुरानी प्रतिमा को हटाकर कहां लगाया जाएगा, इस पर कोई मंथन किया। वहीं, बीते कुछ महीनों में मंदिर समिति के साथ प्रशासन ने बैठक भी की है लेकिन अब तक इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में कांग्रेस अब सीधे तौर पर बीजेपी पर राम के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।
बीजेपी को 15 साल, माता कौशिल्या धाम की याद नहीं आई
कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि बीजेपी ने 15 साल छग में शासन किया, लेकिन उन्हें माता कौशिल्या धाम की याद नहीं आई। अब जब हमारी सरकार ने इसका जीर्णोद्धार किया और हमने ही मूर्ति लगाई। इसके बाज जब स्वरूप पर आपत्ति आई तो हटाने के निर्णय लेने के बाद भी इसे नहीं बदलना बीजेपी की मानसिकता को दर्शाता है।
वहीं, इस मामले पर धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल का कहना है कि मूर्ति बदलने को लेकर समिति के साथ बैठकें हुई हैं और सहमति बनने के लगभग करीब है और जल्द ही प्रतिमा स्थापित कर दी जाएगी।
7 दिनों में मूर्ति लगाने का किया था दावा
विधानसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने चंद्रखुरी में राम जी की प्रतिमा का मुद्दा उठाया था। उस दौरान विभागीय मंत्री राजेश अग्रवाल ने दावा किया था कि 7 दिनों के अंदर नई प्रतिमा विस्थापित कर दी जाएगी। लेकिन 7 दिन तो दूर ग्वालियर से मूर्ति आने के 6 माह बाद भी मूर्ति लगाना तो दूर ट्रस्ट से सहमति तक नहीं बन पाई है और न पुरानी प्रतिमा को विस्थापित करने को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना बनाई गई है।
तीन महीने तक और इंतजार करना होगा
टीआरपी की टीम ने इस संदर्भ में जब तत्कालीन पर्यटन विभाग के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य से बात की थी तो उन्होंने बताया था कि अभी अगले कुछ महीनों तक शुभ कार्य नहीं किए जा सकते, इसलिए देव उठनी एकादशी के बाद ही इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। वहीं, मंदिर समिति से सहमति पर उन्होंने कहा कि बैठकों में सभी एकमत नहीं हो पाए हैं और आधे लोग नई मूर्ति के पक्ष में हैं जबकि आधे लोग नई मूर्ति के विरोध में। ऐसे में आगे भी बैठकें आयोजित कर सहमति बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
पहले पेमेंट का भी फंसा था मसला
कांग्रेस काल में लगाई गई राम की प्रतिमा के वनवासी स्वरूप को लेकर कई तरह की आपत्तियां आई थीं। जिसके बाद इसे बदलने का निर्णय लिया गया था। वहीं, लगभग 80 लाख की 51 फीट की इस प्रतिमा का ऑर्डर देने के बाद फंड को लेकर मूर्तिकार से ही विवाद की बातें सामने आई थीं और मूर्तिकार ने पूरी राशि मिलने के बाद ही मूर्ति देने का फरमान सरकार को सुना दिया था। जिसके बाद मीडिया में खबरें चर्चा में आने के बाद इस प्रतिमा की राशि दी गई और आखिरकार मूर्ति रायपुर आ पाई।
कांग्रेस का आरोप, हमने दिया था फंड
इधर कांग्रेस का कहना है कि हमारी सरकार में ही आपत्ति आने पर प्रतिमा को बदलने की स्वीकृति दी गई थी। इतना ही नहीं, इसके लिए फंड भी जारी कर दिया गया था, लेकिन बीजेपी के सरकार में आने के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और अब जब प्रतिमा बनकर आ चुकी है तो भी बीजेपी के लोग इसे बदलवाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। कांग्रेस ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि बीजेपी राम के नाम पर सिर्फ राजनीति करती है और वोट मांगती है। इन्हें न राम से मतलब है और न माता कौशिल्या धाम से।
15 साल नहीं आई राम-वन-गमन पथ की याद
कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ने 15 साल छग में शासन किया और उस दौरान उनको राम-वन-गमन पथ की याद नहीं आई। कांग्रेस की सरकार ने चंद्रखुरी में माता कौशिल्या का मंदिर, राम वन गमन पथ को विकसित करने का निर्णय लिया। इसके बाद काम भी किया गया, लेकिन राम वन गमन पथ पर भी अब बीजेपी की सरकार कोई खास काम नहीं कर रही है। इस पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि इस पर काम चल रहा है, कई जगहों का प्राक्कलन तैयार किया जा चुका है, जबकि शेष जगह के लिए भी प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है।


