Chhattisgarh Anganwadi BALA Model Building as Learning Aid.

टीआरपी। छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल पोषण वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मनरेगा और BALA (Building as Learning Aid) तकनीक के संगम से ये आधुनिक प्ले-स्कूल और ग्रामीण रोजगार के सशक्त केंद्र बन चुके हैं। 11.69 लाख रुपये की लागत से निर्मित ये नए भवन बच्चों को खेल-खेल में शिक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को स्थायी आजीविका भी प्रदान कर रहे हैं।

यह मॉडल छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों जैसे नारायणपुर और धमतरी में बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर को कम कर रहा है। भवनों के निर्माण में स्थानीय मनरेगा श्रमिकों का उपयोग होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और पलायन पर लगाम लगी है।

शिक्षा की नई परिभाषा: दीवारें बनीं शिक्षक

छत्तीसगढ़ के धमतरी, महासमुंद और मुंगेरी जैसे जिलों में ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड’ (BALA) की अवधारणा को धरातल पर उतारा गया है। इन केंद्रों में दीवारों, फर्श और सीढ़ियों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे खुद एक पाठ्यपुस्तक की तरह काम करती हैं। यहाँ बच्चे खेल-खेल में हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, गणितीय आकृतियाँ और स्थानीय संस्कृति को सीख रहे हैं। विशेष रूप से धमतरी के उड़ेंना ग्राम में विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे इस दृश्य-आधारित शिक्षण से तेजी से मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ रहे हैं।

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रोजगार और अधोसंरचना का संगम

इन आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण महज एक सरकारी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि रोजगार सृजन का जरिया भी है। मनरेगा के तहत निर्माण होने के कारण गुणवत्तापूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हुआ है। प्रत्येक भवन की लागत 11.69 लाख रुपये है, जिससे गांव के ही राजमिस्त्रियों और मजदूरों को काम मिला है। इसके साथ ही, ये केंद्र महतारी वंदन योजना और नोनी सुरक्षा योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का मुख्य केंद्र बन गए हैं।

पोषण और डिजिटल साक्षरता

आधुनिक आंगनबाड़ियों में अब आरओ जल व्यवस्था, स्वच्छ रसोई और बाल-अनुकूल शौचालय अनिवार्य कर दिए गए हैं। ‘जितनी अच्छी वजन की रेखा, उतना स्वस्थ बच्चा’ जैसे नारों के माध्यम से माताओं को कुपोषण के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है। ये केंद्र अब बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श का भी मुख्य अड्डा हैं।

  • निर्माण लागत: प्रत्येक नवीन आंगनबाड़ी भवन हेतु 11.69 लाख रुपये का प्रावधान।
  • धमतरी मॉडल: जिले में 81 ‘बाला’ आधारित केंद्रों का लक्ष्य, जिनमें से 51 पूर्ण हो चुके हैं।
  • शिक्षा तकनीक: BALA (Building as Learning Aid) के माध्यम से दृश्य-आधारित शिक्षण।
  • लाभार्थी: बच्चे, गर्भवती महिलाएं, किशोरी बालिकाएं और मनरेगा श्रमिक।
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छत्तीसगढ़ का यह एकीकृत मॉडल अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। आने वाले समय में राज्य के सभी सुदूर क्षेत्रों में इसी तर्ज पर आंगनबाड़ियों का उन्नयन किया जाएगा, जिससे “गढ़बो नवा छत्तीसगढ़” का सपना बुनियादी स्तर पर साकार होगा।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
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