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Child Adoption in Chhattisgarh: पहले बेटे की चाह, अब बेटियों को भी अपना रहे परिवार; आंकड़ों में दिखा बदलाव

Child Adoption in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में बच्चों को गोद लेने के मामले में बेटियां बेटों से आगे हैं। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 456 बच्चों को गोद लिया गया। इनमें 246 बेटियां और 210 बेटे शामिल हैं। यानी बेटों के मुकाबले 36 ज्यादा बेटियों को नया परिवार मिला। सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) के […]

Child Adoption in Chhattisgarh
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Child Adoption in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में बच्चों को गोद लेने के मामले में बेटियां बेटों से आगे हैं। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 456 बच्चों को गोद लिया गया। इनमें 246 बेटियां और 210 बेटे शामिल हैं। यानी बेटों के मुकाबले 36 ज्यादा बेटियों को नया परिवार मिला। सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) के आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में 48 बेटों के मुकाबले 67 बेटियों को गोद लिया गया। 2025-26 में भी 46 बेटों की तुलना में 55 बेटियों को अपनाया गया।

पांच वर्षों में केवल 2023-24 ऐसा साल रहा, जब बेटियों के मुकाबले ज्यादा बेटों को गोद लिया गया। विशेषज्ञ इस रुझान को बेटियों के प्रति समाज की बदलती सोच और उनकी बढ़ती स्वीकार्यता से जोड़कर देखते हैं।

बेटियों को अपनाने के फैसले में दिख रहा बदलाव

पहले परिवारों में बेटों को प्राथमिकता देने का चलन अधिक था। अब बेटियों को लेकर भी सकारात्मक रुझान दिखाई दे रहा है। ऐसे परिवार भी सामने आ रहे हैं, जिनके पहले से बच्चे हैं और इसके बावजूद उन्होंने बेटी को गोद लेने का फैसला किया। एक शासकीय सेवा में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी दंपती के पहले से एक बेटा और एक बेटी हैं। इसके बावजूद उन्होंने एक और बच्ची को गोद लिया। उनका मानना है कि बेटियां परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ माता-पिता का जीवनभर साथ देती हैं। इसी तरह निजी क्षेत्र में कार्यरत एक अधिकारी ने अपनी बेटी के जन्म के बाद दूसरी संतान के रूप में भी बच्ची को गोद लिया। उनका कहना है कि बेटियां परिवार को प्यार और सम्मान देती हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने दूसरी बेटी को अपनाया।

पालकों की संख्या ज्यादा, बच्चों के लिए लंबा इंतजार

प्रदेश के सभी जिलों में दत्तक ग्रहण केंद्र हैं। हालांकि, बच्चा गोद लेने के इच्छुक पालकों की संख्या के मुकाबले उपलब्ध बच्चों की संख्या कम है। इस वजह से पिछले दो-तीन वर्षों में वेटिंग लिस्ट काफी लंबी हो गई है। अधिकांश पालक कम उम्र का बच्चा गोद लेना चाहते हैं। उनकी इच्छा होती है कि बच्चे के साथ भावनात्मक जुड़ाव आसानी से विकसित हो सके। वहीं, समाज कल्याण विभाग की संचालक रेणुका श्रीवास्तव के मुताबिक, आज भी कई आवेदक बेटा गोद लेने की इच्छा जताते हैं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत पालकों को बच्चे के चयन के तीन अवसर मिलते हैं। यदि वे इन अवसरों पर बच्चे का चयन नहीं करते, तो उन्हें वेटिंग लिस्ट में सबसे पीछे जाना पड़ता है। प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखने के लिए बेटे या बेटी के चयन का विकल्प भी लगभग समाप्त कर दिया गया है।

देर से शादी और IVF का खर्च भी गोद लेने की वजह

आरसीएच के मुताबिक, बेटियों के प्रति समाज की सोच में बदलाव आया है और जन्म के समय होने वाला भेदभाव कम हुआ है। बेटियों को माता-पिता से भावनात्मक जुड़ाव रखने वाला और उनकी देखभाल करने वाला माना जाता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं में उच्च शिक्षा और करियर को प्राथमिकता देने के साथ देर से शादी होने के कारण गर्भधारण की उम्र बढ़ रही है। कुछ मामलों में संक्रमण और ट्यूबल ब्लॉकेज जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। पुरुषों में प्रदूषण, शराब और खराब जीवनशैली प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। आईवीएफ का खर्च भी काफी अधिक है। ऐसे में कुछ दंपती बच्चा गोद लेने का विकल्प चुन रहे हैं।

बच्चा गोद लेने के नियम और प्रक्रिया

कौन कर सकता है आवेदन?

पालक का शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से सक्षम होना जरूरी है। विवाहित दंपती के लिए कम से कम दो साल का स्थिर वैवाहिक संबंध आवश्यक है। अकेली महिला लड़का या लड़की, जबकि अकेला पुरुष केवल लड़का गोद ले सकता है।

पहले से दो या अधिक बच्चे हैं तो?

ऐसी स्थिति में सामान्यतः विशेष आवश्यकता वाले या गोद लेने में कठिन श्रेणी के बच्चों को गोद लेने के लिए आवेदन किया जा सकता है।

कहां संपर्क करें?

बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी या जिला बाल संरक्षण अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग से संपर्क किया जा सकता है।

हेल्पलाइन: 1800-11-1311

ईमेल: [email protected]

5 FAQs

1. छत्तीसगढ़ में पिछले पांच वर्षों में कितने बच्चों को गोद लिया गया?

पिछले पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ में कुल 456 बच्चों को गोद लिया गया। इनमें 246 बेटियां और 210 बेटे हैं।

2. छत्तीसगढ़ में बेटियों को गोद लेने के आंकड़े क्या बताते हैं?

कारा के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में 67 बेटियों और 48 बेटों को गोद लिया गया। 2025-26 में 55 बेटियों और 46 बेटों को नया परिवार मिला।

3. बच्चा गोद लेने के लिए विवाहित दंपती की क्या पात्रता है?

दंपती का शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से सक्षम होना जरूरी है। उनके बीच कम से कम दो साल का स्थिर वैवाहिक संबंध होना चाहिए।

4. पहले से दो या अधिक बच्चे होने पर क्या बच्चा गोद लिया जा सकता है?

दी गई प्रक्रिया के अनुसार, ऐसे मामलों में सामान्यतः विशेष आवश्यकता वाले या गोद लेने में कठिन श्रेणी के बच्चों के लिए आवेदन किया जा सकता है।

5. बच्चा गोद लेने के लिए कहां संपर्क करें?

आवेदक जिला कार्यक्रम अधिकारी या जिला बाल संरक्षण अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग से संपर्क कर सकते हैं। दी गई हेल्पलाइन 1800-11-1311 और ईमेल [email protected] है।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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