रायपुर। राजधानी में एक ओर सरकार वॉटर एटीएम लगा रही है। तमाम जगहों पर प्याऊ खुले हैं। तो वहीं राज्य के मुंगेली जिले के लोरमी इलाके के जाकड़बांधा गांव में लगा इकलौता हैंडपंप जवाब दे गया है और यहां के 20 यादव समाज और आदिवासी परिवारों के लोग झिरिया खोद कर पानी पीने को मजबूर हैं।

सरकारें विकास के लंबे -चौड़े दावे करती हैं, मगर जमीनी हकीकत ये है कि लोगों को बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है। जिले में आज का तापमान 42 डिग्री सेंटीग्रेड था।

ऐसे में झोपड़ियों में रहने वाले आदिवासियों पर क्या बीतती होगी इसको आसानी से समझा जा सकता है। अब इतनी गर्मी में भी पीने के लिए पानी न मिले तो कैसा लगेगा? उससे भी बुरी हाल तो तब होगी जब आदमी को पीने के लिए वो गंदा पानी दिया जाए जिसे एक बार तो जानवर भी पीने का मन न बनाएं।

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क्या कहते हैं लोग:

गांव की मैना यादव ने कहा कि हैंडपंप काफी दिनों से खराब हो गया है। उससे पानी नहीं आता। ऐसे में हम लोगों को पानी की दिक्कत न हो इसके लिए इस झिरिया को हम लोगों ने खोदा है। इसका पानी पीते हैं।

कुमारी बाई ने कहा कि हम लोगों की यही नियति बन गई है। ये कोई नई बात नहीं है। जब से समझदार हुए हैं यही पानी पीते आ रहे हैं। खोमन यादव ने भी इन्हीं लोगों की हां में हां मिला दिया। सोमारी बाई, कोटवारिन, खोरबहारिन बाई, गौरी बाई और नैना ने भी ऐसी ही बातें बतार्इं।

सुधरवा दिया है हैंडपंप: एडीएम

एडीएम चित्रकात चाली ठाकुर ने कहा कि वहां का हैंडपंप खराब था। हमने उसकी मरम्मत करवा दी है। अब उन सभी लोगों को पानी मिलने लगा है। ऐसे में सवाल तो ये भी है कि इतने सारे परिवारों की पानी की जरूरतों को क्या एक हैंडपंप पूरा कर पाएगा?

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।