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Raipur: हाईकोर्ट के आदेश का असर, पूर्व में पंजीकृत मतदाता द्वारा फॉर्म-6 भरने पर नहीं होगी कोई दंडात्मक कार्रवाई, आयोग ने दी ये सफाई

RAJYA NIRWACHAN AYOG
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • Impact of Delhi High Court Order: छत्तीसगढ़ में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में काटे ग‌ए मतदाता पुनः नाम जुड़वाने के लिए बिना किसी संकोच के फॉर्म-6 भर सकते हैं।
  • अब भारत निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए मतदाताओं के असमंजस व संशय को दूर किया है।
  • SIR के दौरान छत्तीसगढ़ में करीब 25 लाख से अधिक नाम कटने की खबरें रहीं हैं।
  • फॉर्म-6 में यह घोषणा (डिक्लेरेशन) देनी होती है कि उनका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है।

Impact of Delhi High Court Order: छत्तीसगढ़ में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में काटे ग‌ए मतदाता पुनः नाम जुड़वाने के लिए बिना किसी संकोच के फॉर्म-6 भर सकते हैं। अब भारत निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए मतदाताओं के असमंजस व संशय को दूर किया है।

SIR के दौरान छत्तीसगढ़ में करीब 25 लाख से अधिक नाम कटने की खबरें रहीं हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे वर्तमान प्रारूप मतदाता सूची में अपने नाम की जांच अवश्य करें और नाम न होने पर समय रहते फॉर्म-6 भरकर निर्वाचक नामावली में अपना पंजीकरण सुनिश्चित कराएं।

संशय और आयोग का स्पष्टीकरण

आयोग के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई ऐसे मतदाता, जो पूर्व में पंजीकृत थे लेकिन वर्तमान में प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में उनका नाम छूट गया है, फॉर्म-6 भरने में झिझक रहे थे। फॉर्म-6 में यह घोषणा (डिक्लेरेशन) देनी होती है कि उनका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। मतदाताओं को आशंका थी कि पूर्व में पंजीकृत होने के कारण यह घोषणा ‘गलत घोषणा’ (False Declaration) मानी जाएगी और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत उन पर दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इस पर स्पष्ट करते हुए आयोग ने कहा है कि यदि किसी नागरिक का नाम वर्तमान प्रारूप मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, तो अंतिम सूची में नाम दर्ज कराने के लिए उसे नए सिरे से फॉर्म-6 प्रस्तुत करना आवश्यक है, भले ही वह पूर्व में मतदाता रहा हो। ऐसी परिस्थिति में केवल इस आधार पर फॉर्म-6 भरना गलत या झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा कि आवेदक पहले से पंजीकृत था।

उच्च न्यायालय के निर्णय का संदर्भ

आयोग का यह रुख दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका संख्या W.P. (C) No. 14955/2026 (निलोत्पल दत्ता व अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग व अन्य, निर्णय 14 अक्टूबर 26) में दिए गए आदेश के अनुरूप है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि इस संदर्भ में गलत घोषणा संबंधी आशंका पूरी तरह निराधार है और ऐसे आवेदक नियमानुसार फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।

कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी

भारत निर्वाचन आयोग ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देशित किया है कि केवल इस आधार पर किसी भी आवेदक के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कोई कार्रवाई न की जाए कि उसका नाम पहले की किसी मतदाता सूची में था। आवेदक को केवल यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान सूची में पहले से पंजीकृत न हो और आवेदन विधिक नियमों के अनुरूप हो।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. SIR में नाम कट गया है तो क्या करें?
प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम जांचें। नाम न होने पर फॉर्म-6 भरकर फिर से नाम जुड़वाएं।

Q2. पहले से पंजीकृत मतदाता फॉर्म-6 भर सकता है?
हां, अगर वर्तमान प्रारूप सूची में नाम नहीं है तो पहले से पंजीकृत मतदाता भी नए सिरे से फॉर्म-6 भर सकता है।

Q3. फॉर्म-6 में गलत घोषणा का मामला तो नहीं बनेगा?
नहीं। आयोग ने साफ किया है कि सिर्फ इस आधार पर इसे गलत घोषणा नहीं माना जाएगा कि आवेदक पहले से पंजीकृत था। धारा 31 के तहत कोई कार्रवाई नहीं होगी।

Q4. दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
W.P. (C) No. 14955/2026 में 14 अक्टूबर 26 को कोर्ट ने कहा था कि इस संदर्भ में गलत घोषणा की आशंका निराधार है।

Q5. फॉर्म-6 भरते समय क्या ध्यान रखना है?
आपका नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान सूची में पहले से पंजीकृत नहीं होना चाहिए और आवेदन नियमानुसार होना चाहिए।

Q6. छत्तीसगढ़ में SIR में कितने नाम कटे?
खबरों के अनुसार SIR के दौरान छत्तीसगढ़ में करीब 25 लाख से अधिक नाम कटने की खबरें रहीं हैं।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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