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Darbar Controversy:’पं. धीरेंद्र शास्त्री मेरे जूनियर हैं’, डॉ. प्रेमासाई महाराज का बड़ा बयान, रायपुर में प्रेत दरबार पर मचा बवाल

Darbar Controversy: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों दिव्य दरबार और प्रेत दरबार के आयोजन को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। मां मातंगी दिव्यधाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमासाईं महाराज द्वारा रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में 24 से 28 अक्टूबर तक धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तावित है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रेत दरबार लगाने की […]

डॉ. प्रेमासाईं महाराज
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Darbar Controversy: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों दिव्य दरबार और प्रेत दरबार के आयोजन को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। मां मातंगी दिव्यधाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमासाईं महाराज द्वारा रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में 24 से 28 अक्टूबर तक धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तावित है।

हालांकि, स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रेत दरबार लगाने की अनुमति न दिए जाने के बाद विवाद काफी बढ़ गया है और इस मुद्दे पर अब खुलकर बयानबाजी हो रही है।

‘बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र शास्त्री मेरे जूनियर हैं’

प्रशासनिक अनुमति न मिलने से नाराज डॉ. प्रेमासाईं महाराज ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री उनके जूनियर हैं। प्रेमासाईं महाराज के मुताबिक, वे धीरेंद्र शास्त्री से बहुत पहले से दिव्य दरबार और प्रेत दरबार का आयोजन करते आ रहे हैं और उनके ये कार्यक्रम टीवी चैनलों पर भी प्रसारित हो चुके हैं।

प्रशासन पर दोहरा रवैया अपनाने और भेदभाव का गंभीर आरोप

डॉ. प्रेमासाईं महाराज ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए सवाल उठाया कि आखिर उनके साथ ही यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि जब बागेश्वर धाम के कार्यक्रमों में रायपुर में दिव्य और प्रेत दरबार लगाए जाते हैं, तब प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन जब वे ऐसा आयोजन कर रहे हैं, तो रोक क्यों लगाई जा रही है? उन्होंने इसे संतों का अपमान करार दिया है।

‘पूरी तरह निशुल्क होगा आयोजन, नहीं रखी जाएगी कोई दान पेटी’

आयोजन की पारदर्शिता पर बात करते हुए पीठाधीश्वर ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से जनसेवा और भक्ति के लिए है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर कोई दान पेटी नहीं लगाई जाएगी और न ही किसी से एक रुपया दान स्वीकार किया जाएगा। सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक श्रद्धालुओं की पर्ची निकाली जाएगी। इस 5 दिवसीय आयोजन में देशभर से लगभग 35 से 40 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

अनुमति न मिलने पर अन्न त्याग कर अनशन करने की दी चेतावनी

महाराज ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनके दिव्य व प्रेत दरबार को अनुमति नहीं दी गई, तो वे प्रस्तावित स्थल (अवधपुरी मैदान) पर ही अन्न त्याग कर अनशन पर बैठ जाएंगे। उन्होंने साफ किया कि उनका यह विरोध सरकार या मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल प्रशासनिक अफसरों के तानाशाही और पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ है।

बोले- ‘सरकार को बदनाम करने की साजिश’

आंदोलन की चेतावनी के साथ ही डॉ. प्रेमासाईं महाराज ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री बेहद सरल और अच्छे इंसान हैं और उनसे मुलाकात के दौरान सकारात्मक आश्वासन भी मिला था। महाराज ने आरोप लगाया कि कुछ प्रशासनिक अधिकारी और असामाजिक तत्व इस तरह की बाधाएं खड़ी करके मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

‘नियम सभी संतों के लिए समान हों, भविष्य में न हो कोई पक्षपात’

डॉ. प्रेमासाईं महाराज ने कहा कि अगर पहली बार अवधपुरी मैदान में इस तरह के आयोजन से प्रशासन को कोई सुरक्षा या तकनीकी परेशानी है, तो वे इसे स्वीकार करने को तैयार हैं। लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि नियम सभी संतों के लिए एक समान होने चाहिए। यदि भविष्य में किसी एक संत को प्रेत या दिव्य दरबार लगाने की अनुमति दी जाती है, तो दूसरे संतों को भी वही अधिकार मिलना चाहिए।

राजनीतिक हलकों में गर्माया मुद्दा, प्रशासनिक फैसले पर टिकी निगाहें

प्रशासन द्वारा अनुमति रोके जाने के बाद यह मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रूप ले चुका है। एक तरफ जहां श्रद्धालु इस भव्य आयोजन का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ 35 से 40 हजार लोगों की भीड़ और संतों के असंतोष को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पर फैसला लेने का भारी दबाव है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है।

Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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