President Draupadi Murmu: अपने बस्तर प्रवास के दौरान देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज शुक्रवार को जगदलपुर स्थित बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दरबार में पहुंचीं।
मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया गया, जिससे स्थानीय लोगों में भी काफी उत्साह देखा गया। उन्होंने मंदिर में माता के दर्शन कर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और देशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति व खुशहाली की कामना की।
बस्तर की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र
दर्शन के पश्चात राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मां दंतेश्वरी मंदिर के प्रति बस्तर के लोगों की अटूट आस्था है। यह स्थान आदिवासियों की समृद्ध परंपरा और अनूठी सांस्कृतिक विरासत का एक प्रमुख केंद्र है। मां दंतेश्वरी की यह पावन भूमि सदियों से इस क्षेत्र के जन-मानस की धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं का मुख्य आधार रही है, जो यहां की संस्कृति को जीवंत रखती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया गौरव का क्षण
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के प्रति अंचल के लोगों की गहरी श्रद्धा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मां दंतेश्वरी के दर्शन-पूजन के लिए आगमन पूरे छत्तीसगढ़ और विशेषकर बस्तर के लिए अत्यंत गौरव का अवसर है। मां दंतेश्वरी बस्तर की आस्था और लोकजीवन का एक अभिन्न हिस्सा हैं।
जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि बस्तर अपनी अनुपम जनजातीय संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और विशिष्ट जीवन मूल्यों के लिए देश-दुनिया में एक अलग पहचान रखता है। यहां की परंपराओं में प्रकृति, आस्था और समाज के बीच गहरा तालमेल दिखाई देता है। राष्ट्रपति के इस प्रवास से बस्तर की इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान और सम्मान प्राप्त होगा।
सदियों पुरानी परंपराओं में रची-बसी मां दंतेश्वरी की महिमा
मां दंतेश्वरी बस्तर अंचल की अधिष्ठात्री देवी हैं, जिनके प्रति बस्तरवासियों की आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है। उनकी उपासना इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का एक विशेष हिस्सा है। मां दंतेश्वरी से जुड़ी मान्यताएं और अनुष्ठान बस्तर के सामाजिक जीवन में गहराई से रचे-बसे हैं, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता और धरोहर को निरंतर मजबूत करते हैं।



