Teacher convicted of molesting dismissed; छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा विभाग ने आखिरकार सख्त कदम उठाते हुए सजायाफ्ता शिक्षक को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। मजे की बात यह है कि ये कार्रवाई कोर्ट से सजा मिलने के करीब 3 हफ्ते बाद की गई, क्योंकि शिक्षक को सजा मिलने की जानकारी विभाग को मीडिया से मिली, और तब जरुरी प्रक्रिया शुरू की गई।
इस मामले में आरोपी का नाम विवेक गुप्ता है, जो उच्च वर्ग शिक्षक के पद पर शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बेलमुण्डी, विकासखंड तखतपुर, जिला बिलासपुर में पदस्थ था। मूल रूप से वह अर्चना विहार, नेहरू नगर, बिलासपुर का रहने वाला है।
क्या था मामला?
यह घटना 17 फरवरी 2018 की है। तखतपुर ब्लॉक के एक सरकारी स्कूल में उसी स्कूल की एक महिला शिक्षिका के साथ विवेक गुप्ता ने छेड़खानी की थी। शिकायत के अनुसार आरोपी ने शिक्षिका का हाथ खींचा, अभद्रता की, गाली-गलौज की और विरोध करने पर दीवार की ओर धक्का दे दिया, जिससे शिक्षिका के सिर और चेहरे पर चोटें आईं। साथ ही तेजाब फेंकने और जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।
कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर चालान कोर्ट में पेश किया। लगभग 8 साल तक चली सुनवाई के बाद तखतपुर के JMFC कोर्ट की न्यायाधीश ऋचा यादव ने 26 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया।
- IPC धारा 354 (छेड़खानी) में 1 साल का सश्रम कारावास और 1000 रुपये जुर्माना
- IPC धारा 323 (मारपीट) में 1000 रुपये जुर्माना
- जुर्माना न भरने पर 1-1 महीने की अतिरिक्त सजा
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी बताया कि आरोपी 7 अगस्त 2018 से 9 अक्टूबर 2018 तक कुल 2 महीने 2 दिन न्यायिक हिरासत में रह चुका है।
बर्खास्तगी क्यों हुई और किस नियम से?
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 19 में स्पष्ट है कि नैतिक पतन और महिला उत्पीड़न जैसे मामलों में कोर्ट से सजा होते ही कर्मचारी को बिना लंबी विभागीय जांच के सीधे बर्खास्त किया जा सकता है। इसी नियम 10 (9) के तहत JD बिलासपुर संभाग ने DEO बिलासपुर के पत्र 21 अक्टूबर 2026 के आधार पर आरोपी को 26 सितंबर 2026 से भूतलक्षी प्रभाव से पदच्युत कर दिया। आदेश तत्काल प्रभावशील है।
विभाग की लापरवाही क्यों उजागर हुई?
कोर्ट से सजा मिलने के बाद भी शिक्षक 3 हफ्ते तक स्कूल में पढ़ाता रहा। उसने विभाग को अदालत से हुए फैसले की जानकारी को छिपाये रखा। विभाग को तुरंत कार्रवाई करनी थी, लेकिन अधिकारियों ने जानकारी नहीं होने का हवाला दिया। DEO संदीप पांडेय ने इस मामले में टीआरपी न्यूज़ को बताया कि कायदे से अभियोजक याने पुलिस को इस फैसले की जानकारी शिक्षा विभाग को देनी चाहिए थी मगर नहीं दी गई। हालांकि इस तरह की जानकारी पहुंचाए जाने में हुई देरी से पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हुए कि एक सजायाफ्ता व्यक्ति कैसे मासूम बच्चों को पढ़ा सकता है।
यह कार्रवाई न केवल पीड़ित शिक्षिका को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों के लिए भी सख्त संदेश है कि महिला सुरक्षा से जुड़े अपराधों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देखें आदेश:

FAQ: शिक्षक की बर्खास्तगी
Q1. बिलासपुर में कौन सा शिक्षक बर्खास्त हुआ है?
बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के बेलमुण्डी स्कूल में पदस्थ उच्च वर्ग शिक्षक विवेक गुप्ता को बर्खास्त किया गया है।
Q2. विवेक गुप्ता को किस आरोप में सजा मिली थी?
2018 में एक शिक्षिका से छेड़खानी, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के मामले में। कोर्ट ने इसे IPC धारा 354 और 323 के तहत दोषी माना।
Q3. कोर्ट ने क्या सजा सुनाई थी?
JMFC कोर्ट तखतपुर की जज ऋचा यादव ने 26 सितंबर 2026 को 1 साल का सश्रम कारावास और कुल 2000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
Q4. बर्खास्तगी का आदेश किसने और किस नियम से दिया?
JD बिलासपुर संभाग ने DEO बिलासपुर के पत्र के आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 10 (9) और नियम 19 के तहत बर्खास्तगी का आदेश दिया। यह 26 सितंबर 2026 से भूतलक्षी प्रभाव से लागू है।
Q5. शिक्षक सजा के बाद भी स्कूल कैसे जा रहा था?
कोर्ट के फैसले के 3 हफ्ते बाद तक विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिसके कारण वह बेलमुण्डी स्कूल में ड्यूटी करता रहा। यह विभागीय लापरवाही मानी गई।
Q6. क्या हाईकोर्ट में अपील से बर्खास्तगी रुक जाएगी?
नहीं। सिर्फ अपील दायर करने से निचली अदालत का फैसला खत्म नहीं होता। जब तक हाईकोर्ट से दोषसिद्धि पर रोक (Stay on Conviction) नहीं मिलती, तब तक वह दोषी ही माना जाएगा और बर्खास्तगी वैध रहेगी।



