TRP Expose : मुक्तांजलि शव वाहन सेवा में किया फर्जीवाड़ा, टेंडर में तय अनुबंध की बजाय छोटे वाहनों से चला रहे हैं काम

मुक्तांजलि शव वाहन सेवा में किया फर्जीवडा, टेंडर में तय अनुबंध की बजाय छोटे वाहनों से चला रहे हैं काम
मुक्तांजलि शव वाहन सेवा में किया फर्जीवडा, टेंडर में तय अनुबंध की बजाय छोटे वाहनों से चला रहे हैं काम

रायपुर। सरकार की निःशुल्क वाहन सेवा में गड़बड़ियों का उजागर होना जारी है। इस बार शव वाहन सेवा “मुक्तांजलि” में कंपनी द्वारा की गई हेराफेरी उजागर हो गई है। कंपनी द्वारा तय शर्तों की बजाय छोटे वाहनों का इस्तेमाल शवों को ढोने में किया जा रहा है। छोटा हाथी के नाम से प्रचलित टाटा एस नामक इस वाहन में केवल 02 लोगो के बैठने की क्षमता होती है, जबकि शासन ने जिन वाहनों के लिए अनुबंध किया उसमें 5 लोगों के बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए।

सरकार से किया इस तरह का अनुबंध

आम लोगों की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने 108 एम्बुलेंस, महतारी एक्सप्रेस सहित मुक्तांजलि नि:शुल्क शव वाहन योजना शुरू की। इसके लिए दिसंबर 2018 में भोपाल की कंपनी कम्युनिटी एक्शन थ्रू मोटी प्रो कैंप से अनुबंध किया गया।शर्तों के मुताबिक शवों को ढोने के लिए मारुति ईको या फिर पैसेंजर वाहन टाटा वेंचर का उपयोग करना था। लेकिन इसके स्थान पर अनुबंधित कंपनी ने टाटा एस यानी छोटा हाथी का उपयोग किया। राज्य के सभी 27 जिलों में टाटा एस का ही संचालन किया गया।

RTI से हुआ मामले का खुलासा 

मुक्तांजलि वाहन सेवा उपलब्ध करा रही कम्पनी के साथ शासन द्वारा कराए गए अनुबंध और अन्य दस्तावेजों की प्रति जब आरटीआई के माध्यम से निकली गई तब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। कम्पनी द्वारा प्रदेश के 27 जिलों में ऐसे करीब 104 वाहन चलाए गए। इसमें से 40 वाहन DMF याने जिला खनिज संस्थान न्यास से दिए गए हैं। वहीं 64 वाहन अनुबंध करने वाली कंपनी की है। अनुबंध दिसंबर 2018 में हुआ था। औसतन हर महीने करीब एक करोड़ रुपए का भुगतान स्वास्थ्य विभाग कंपनी को कर रहा है। अनुमान के मुताबिक अब तक करीब 33 करोड़ रुपयों का भुगतान कंपनी को किया जा चुका है। इससे सम्बंधित दस्तावेजों की प्रति टीआरपी के पास उपलब्ध हैं।

शिकायत हुई मगर जाँच से ही मुकर गए आलोक शुक्ला 

कंपनी द्वारा की गई इस गड़बड़ी की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के साथ ही स्वास्थ्य सचिव से भी की गई, मगर इसकी जाँच नहीं हो रही है। वहीं स्वास्थ्य सचिव आलोक शुक्ला का कहना है कि मुझे इसकी शिकायत ही नहीं मिली है। अगर शिकायत मिली तब ही इसकी जांच की जाएगी। ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि मामले की उच्च स्तरीय शिकायत हो और उसकी प्रति स्वास्थ्य सचिव के पास नहीं पहुंची हो।

छत्तीसगढ़ की बजाय एमपी में कराया रजिस्ट्रेशन

जिन गाड़ियों का मुक्तांजलि निशुल्क शव वाहन योजना के तहत उपयोग किया जा रहा है, उसका पंजीयन मध्यप्रदेश के इंदौर आरटीओ में कराया गया है। टाटा एस वाहन में सिर्फ दो को बैठने की अनुमति है। वहीं अनुबंध की शर्तों के मुताबिक किसी भी डेड बॉडी के साथ 5 लोगों को वाहन में बैठाना है। इसमें डेड बॉडी, दो अटेंडर, एक ड्राइवर और एक हेल्पर शामिल है।

गड़बड़ी छुपाने इस तरह की जुगत

कंपनी द्वारा अपनी गड़बड़ी को छुपाने के लिए बड़े अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों पर खनिज संस्थान न्यास के तहत संचालित वाहनों को रखा जा रहा है। यह गाड़ियां मारुति ईको है और सीजी 02 सीरीज की हैं। वहीं एजेंसी से मोडिफाई कराई गई गाड़ियों को एमपी 09 सीरिज दिया गया है। यह टाटा एस यानी छोटा हाथी वाहन है। इन वाहनों को ग्रामीण या फिर दूरस्थ इलाकों में रखा गया है।

प्रबंधन दे रहा गोलमोल जवाब

इस गड़बड़ी के संबंध में कंपनी के प्रबंधक अमित गर्ग का कहना है कि अनुबंध की शर्तो के आधार पर ही गाड़ियां लगाई गई हैं। उनका तर्क है कि टाटा एस की गाड़ियों को मोडिफाई किया गया है, उनका केवल यही तर्क है कि अनुबंध की शर्तो के तहत ही गाड़ियां लगाई गई हैं।

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