Sleeping Position: दिनभर बैठकर काम करने और मोबाइल-लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करने से पीठ और गर्दन में अकड़न महसूस हो सकती है। ऐसे में रात को सोने की सही पोजीशन भी मायने रखती है। पीठ के बल और करवट लेकर सोना, दोनों ही विकल्प आरामदायक हो सकते हैं।
हालांकि, किस स्थिति में बेहतर नींद आएगी, यह व्यक्ति के आराम, स्वास्थ्य और पहले से मौजूद समस्याओं पर निर्भर करता है।
पीठ के बल सोने से क्या होता है?
पीठ के बल सोने से सिर, गर्दन और रीढ़ को एक सीध में रखने में मदद मिल सकती है। इस स्थिति में शरीर का वजन भी अपेक्षाकृत समान रूप से बंटता है। इससे कुछ लोगों को आराम महसूस हो सकता है। अगर पीठ के निचले हिस्से में खिंचाव रहता है, तो घुटनों के नीचे एक तकिया रखने से राहत मिल सकती है। इससे कमर पर पड़ने वाला दबाव कम महसूस हो सकता है। हालांकि, पीठ के बल सोना हर किसी के लिए सही विकल्प नहीं है। कुछ लोगों में इस स्थिति में खर्राटे और स्लीप एपनिया की परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखकर सोने की स्थिति चुनना जरूरी है।
करवट लेकर सोने के क्या हैं फायदे?
करवट लेकर सोना भी रीढ़ को आराम देने का एक विकल्प हो सकता है। खासकर कुछ ऐसी स्थितियों में, जिनमें कमर की नसों पर दबाव पड़ता है, इस तरह सोने से आराम मिल सकता है। करवट लेकर सोते समय घुटनों को थोड़ा मोड़कर रखें। जरूरत पड़ने पर दोनों घुटनों के बीच एक तकिया लगा सकते हैं। इससे दिनभर बैठकर काम करने और मोबाइल-लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करने से पीठ और गर्दन में अकड़न महसूस हो सकती है। ऐसे में रात को सोने की सही पोजीशन भी मायने रखती है। पीठ के बल और करवट लेकर सोना, दोनों ही विकल्प आरामदायक हो सकते हैं। हालांकि, किस स्थिति में बेहतर नींद आएगी, यह व्यक्ति के आराम, स्वास्थ्य और पहले से मौजूद समस्याओं पर निर्भर करता है।
पीठ के बल सोने से क्या होता है?
पीठ के बल सोने से सिर, गर्दन और रीढ़ को एक सीध में रखने में मदद मिल सकती है। इस स्थिति में शरीर का वजन भी अपेक्षाकृत समान रूप से बंटता है। इससे कुछ लोगों को आराम महसूस हो सकता है। अगर पीठ के निचले हिस्से में खिंचाव रहता है, तो घुटनों के नीचे एक तकिया रखने से राहत मिल सकती है। इससे कमर पर पड़ने वाला दबाव कम महसूस हो सकता है। हालांकि, पीठ के बल सोना हर किसी के लिए सही विकल्प नहीं है। कुछ लोगों में इस स्थिति में खर्राटे और स्लीप एपनिया की परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखकर सोने की स्थिति चुनना जरूरी है।
करवट लेकर सोने के क्या हैं फायदे?
करवट लेकर सोना भी रीढ़ को आराम देने का एक विकल्प हो सकता है। खासकर कुछ ऐसी स्थितियों में, जिनमें कमर की नसों पर दबाव पड़ता है, इस तरह सोने से आराम मिल सकता है। करवट लेकर सोते समय घुटनों को थोड़ा मोड़कर रखें। जरूरत पड़ने पर दोनों घुटनों के बीच एक तकिया लगा सकते हैं। इससे कूल्हों और रीढ़ को आरामदायक स्थिति में रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सोते समय शरीर को बहुत ज्यादा सिकोड़ने से बचना चाहिए। कमर को जरूरत से ज्यादा मोड़कर सोने से गर्दन, कंधों और पीठ में खिंचाव महसूस हो सकता है।
सोते समय इन 4 बातों का रखें ध्यान
- सही तकिया चुनें: ऐसा तकिया इस्तेमाल करें, जिससे गर्दन अपनी स्वाभाविक स्थिति में रहे। बहुत ऊंचा या असुविधाजनक तकिया गर्दन पर दबाव डाल सकता है।
- शरीर को ज्यादा न मोड़ें: सोते समय ऐसी स्थिति में रहने से बचें, जिससे गर्दन, कंधों या कमर पर अतिरिक्त खिंचाव पड़े।
- करवट बदलने का तरीका सही रखें: अगर कमर में दर्द रहता है, तो शरीर को अचानक मरोड़ने के बजाय कंधों और कूल्हों को एक साथ घुमाते हुए करवट बदलें।
- पर्याप्त नींद लें: अच्छी नींद के लिए सोने की स्थिति के साथ उसकी अवधि और गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। वयस्कों को आमतौर पर हर रात कम से कम 7 घंटे सोने की सलाह दी जाती है।
पीठ के बल सोना बेहतर है या करवट लेकर?
इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं है। अगर किसी स्थिति में आपको आराम से नींद आती है और सुबह उठने पर दर्द या अकड़न महसूस नहीं होती, तो सिर्फ रीढ़ की सेहत के लिए अपनी सोने की आदत बदलना जरूरी नहीं है। वहीं, अगर आपको पहले से कमर या रीढ़ से जुड़ी समस्या है, तो ऐसी स्थिति चुनें जिसमें शरीर को पर्याप्त सहारा मिले और दर्द न बढ़े। लगातार दर्द, सुन्नपन या अन्य परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। लगातार कमर दर्द, सुन्नपन या रीढ़ से जुड़ी किसी समस्या की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें। रीढ़ को आरामदायक स्थिति में रखने में मदद मिल सकती है।



