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Flight Ticket Price: दिवाली के बाद भी सस्ते नहीं होंगे फ्लाइट टिकट? जानें किराया क्यों बढ़ा

Flight Ticket Price: दिवाली के आसपास हवाई सफर करना यात्रियों की जेब पर भारी पड़ रहा है। कई प्रमुख रूट पर औसत एकतरफा हवाई किराया पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले काफी बढ़ गया है। दिल्ली-हैदराबाद रूट पर 68% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक, त्योहार के […]

Flight Ticket Price
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Flight Ticket Price: दिवाली के आसपास हवाई सफर करना यात्रियों की जेब पर भारी पड़ रहा है। कई प्रमुख रूट पर औसत एकतरफा हवाई किराया पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले काफी बढ़ गया है। दिल्ली-हैदराबाद रूट पर 68% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक, त्योहार के बाद कुछ रूट पर किराये में थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन विमान ईंधन की ऊंची कीमतों और एयरलाइंस की बढ़ती लागत के कारण बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है।

किराये में बढ़ोतरी के पीछे विमान ईंधन की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उड़ानों के संचालन पर पड़ रहा असर प्रमुख कारण हैं। ऐसे में यात्रियों को त्योहारों के बाद भी टिकट बुक करते समय ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।

कई रूट पर 68% तक बढ़ा हवाई किराया

इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच यात्रा के लिए औसत एकतरफा हवाई किराये की तुलना पिछले साल की समान अवधि से की गई। इसमें कई प्रमुख रूट पर बड़ी बढ़ोतरी सामने आई।

  • दिल्ली-हैदराबाद रूट पर किराया 68% बढ़ा।
  • मुंबई-कोलकाता रूट पर 51% की बढ़ोतरी हुई।
  • दिल्ली-गोवा रूट पर किराया 39% बढ़ा।
  • मुंबई-बेंगलुरु रूट पर 37% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इन आंकड़ों के मुताबिक, इन रूट पर यात्रा करने वालों को पिछले साल के मुकाबले टिकट के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

फ्लाइट टिकट महंगे होने की 3 बड़ी वजहें

1. विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी

हवाई किराये पर विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों का सीधा असर पड़ता है। दी गई जानकारी के मुताबिक, 1 अक्टूबर से घरेलू ATF की कीमत में करीब 16 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद इसकी कीमत लगभग 137 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। ICRA के मुताबिक, अक्टूबर में घरेलू विमान ईंधन की कीमत पिछले साल के मुकाबले 46.2% ज्यादा थी। एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 30 से 40% होती है। ईंधन महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ती है। इसकी भरपाई के लिए यात्रियों से अतिरिक्त शुल्क भी लिया जा रहा है।

2. डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी

हवाई टिकट महंगे होने की दूसरी वजह रुपये का कमजोर होना है। एयरलाइंस के करीब 35 से 50% खर्च डॉलर में होते हैं। इनमें विमान ईंधन, विमान किराया और रखरखाव जैसे खर्च शामिल हैं। रुपये की कीमत गिरने पर इन सेवाओं के लिए एयरलाइंस को ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और हवाई किराये पर दबाव बना रहता है।

3. पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन पर असर पड़ा है। हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध, लंबे वैकल्पिक रास्ते और उड़ानों की संख्या में कटौती से एयरलाइंस का खर्च बढ़ सकता है। इससे यात्रियों के लिए उपलब्ध सीटों पर भी असर पड़ता है। एविएशन एनालिटिक्स कंपनी OAG के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर के बीच भारत की घरेलू उड़ानों का शेड्यूल पिछले साल की तुलना में 5% कम था। वहीं, सीटों की उपलब्धता में 1.2% की गिरावट दर्ज की गई।

यात्रियों की संख्या घटने से क्या सस्ते होंगे टिकट?

ICRA के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.9% घटी। भारतीय एयरलाइंस से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में 19.3% की गिरावट आई। एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में घरेलू हवाई यातायात 3 से 6% बढ़ सकता है। इसके उलट, भारतीय एयरलाइंस का अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात 3 से 6% घट सकता है। त्योहारों के बाद यात्रियों की संख्या कम होने पर कुछ रूट पर किराये में राहत मिल सकती है। लेकिन यह राहत कितनी होगी, यह ईंधन की कीमतों और उड़ानों की उपलब्धता जैसे कारकों पर निर्भर करेगा। यदि लागत ऊंची बनी रहती है, तो टिकटों के दाम में बड़ी गिरावट मुश्किल हो सकती है।

क्या सरकार के नए नियमों से सस्ते होंगे टिकट?

केंद्र सरकार हवाई किराये में अचानक और मनमानी बढ़ोतरी पर नियंत्रण के लिए नए नियम तैयार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य टिकटों की कीमत तय करना नहीं है। इस व्यवस्था के तहत एयरलाइंस को अपने किराये का स्ट्रक्चर एक महीने पहले नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देना होगा। उन्हें यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी दिखानी होगी। DGCA इन किरायों की निगरानी करेगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 16 नवंबर तक अंतिम नियम पेश करने को कहा है। हालांकि, नए नियम लागू होने के बाद भी सामान्य दिनों या त्योहारों के दौरान टिकट सस्ते होने की गारंटी नहीं है। फिलहाल यात्रियों के लिए राहत की संभावना कुछ रूट पर किराये में मामूली कमी तक सीमित हो सकती है। हवाई सफर सस्ता होने के लिए विमान ईंधन की कीमतों में कमी और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में आ रही बाधाओं का दूर होना जरूरी होगा।

5 FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1: दिवाली के बाद क्या हवाई टिकट सस्ते होने की उम्मीद है?

उत्तर: नहीं, फेस्टिव सीजन के बाद यात्रियों की संख्या कम होने से कुछ रूटों पर मामूली राहत मिल सकती है, लेकिन बड़ी गिरावट की उम्मीद फिलहाल कम है।

Q2: किन रूटों पर हवाई किराए में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है?

उत्तर: दिल्ली-हैदराबाद रूट पर किराया 68%, मुंबई-कोलकाता पर 51%, दिल्ली-गोवा पर 39% और मुंबई-बेंगलुरु रूट पर 37% तक बढ़ा है।

Q3: हवाई टिकट महंगे होने के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर: विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष मुख्य वजहें हैं।

Q4: घरेलू विमान ईंधन (ATF) की कीमतें कितनी बढ़ी हैं?

उत्तर: अक्टूबर में घरेलू विमान ईंधन की कीमत पिछले साल के मुकाबले 46.2% ज्यादा थी और इसकी कीमत करीब 137 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

Q5: क्या सरकार के नए नियमों से हवाई किराए सस्ते हो जाएंगे?

उत्तर: सरकार के नए नियमों का उद्देश्य किराए तय करना नहीं है, बल्कि एयरलाइंस को अपना किराया ढांचा डीजीसीए और वेबसाइट पर साझा करना है, जिससे पारदर्शिता आएगी लेकिन कीमत घटने की गारंटी नहीं है।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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