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Fuel Price Hike: महंगाई का बड़ा झटका, जानें नायरा एनर्जी ने प्रति लीटर कितने रुपये की वृद्धि की

Fuel Price Hike: निजी क्षेत्र की प्रमुख ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने देशवासियों को महंगाई का बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। ईंधन की ये संशोधित और बढ़ी हुई दरें शनिवार तड़के से पूरे देश में लागू […]

Fuel prices hike concept showing a fuel dispensing machine at a petrol pump in India.
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Fuel Price Hike: निजी क्षेत्र की प्रमुख ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने देशवासियों को महंगाई का बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। ईंधन की ये संशोधित और बढ़ी हुई दरें शनिवार तड़के से पूरे देश में लागू हो चुकी हैं।

इस अचानक की गई बढ़ोतरी से निजी और सरकारी पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों में बड़ा अंतर आ गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें

कंपनी द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में आया उछाल है। पिछले कुछ समय से वैश्विक बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं ने भी सीधे तौर पर तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिसके चलते कंपनियों पर लागत का भारी बोझ पड़ रहा है।

नायरा के नेटवर्क और इससे पहले हुए बदलाव

आपको बता दें कि नायरा एनर्जी के देश भर में कुल 7,108 पेट्रोल पंप संचालित होते हैं। इससे पहले भी इसी साल मार्च के महीने में ईरान संघर्ष के कारण आपूर्ति प्रभावित होने पर कंपनी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये महंगा किया था। हालांकि, जुलाई के महीने में अंतरराष्ट्रीय कीमतें घटने पर कंपनी ने दाम घटाकर उपभोक्ताओं को राहत दी थी, लेकिन अब हालात फिर से बदलने के कारण कीमतें बढ़ा दी गई हैं।

सरकारी तेल कंपनियों और जियो-बीपी की स्थिति

देश के कुल पेट्रोल पंप नेटवर्क में सरकारी कंपनियों (IOC, BPCL और HPCL) का दबदबा है, जिनके पास 90 प्रतिशत से अधिक पंप हैं। इन सरकारी कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। वहीं, रिलायंस और बीपी के संयुक्त उपक्रम ‘जियो-बीपी’ (जिसके पास 2,304 पंप हैं) ने भी अभी तक कीमतें स्थिर रखी हैं। इस वजह से अब निजी और सरकारी पंपों के बीच दरों का बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।

खुदरा बिक्री सीमित करने के मुद्दे का असर

हाल ही में सरकार ने निजी ईंधन विक्रेताओं को निर्देश दिया था कि वे अपने पंपों पर ईंधन की बिक्री सीमित न करें। इससे पहले नायरा और जियो-बीपी ने घाटे के चलते कुछ जगहों पर बिक्री की मात्रा सीमित कर दी थी। थोक और खुदरा डीजल की कीमतों में अंतर के कारण औद्योगिक उपभोक्ता सस्ते के चक्कर में खुदरा पंपों का रुख कर रहे थे, जिससे इन पंपों पर आपूर्ति का भारी दबाव बढ़ गया था।

तेल विपणन कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

रेटिंग एजेंसी ‘इक्रा’ की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर महीने में खुदरा कीमतें स्थिर रहने और वैश्विक लागत बढ़ने के कारण कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर करीब 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसके चलते कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 530 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमत 85-90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहने पर ही संतुलन बनता है, इससे ऊपर जाने पर कंपनियों का दबाव बढ़ जाता है।

आम आदमी और महंगाई पर क्या पड़ेगा असर?

नायरा द्वारा दाम बढ़ाए जाने के बाद यदि अन्य कंपनियां भी लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालती हैं, तो देश में परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है। ढुलाने और परिचालन खर्च बढ़ने से आने वाले दिनों में रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं और महंगाई पर भी इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या अन्य कंपनियां भी जल्द दाम बढ़ाएंगी।

Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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