Operation Sindoor Indian Air force: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना के सटीक और नपे-तुले हमलों ने साबित कर दिया कि अब कोई भी लक्ष्य वायुसेना की पहुंच से बाहर नहीं है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पिछले साल मई में चलाए गए इस अभियान ने वायुसेना की क्षमता-केंद्रित रणनीति की ताकत दिखाई। साथ ही, इसने भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए कई अहम सबक भी दिए।
1200 किलोमीटर के मोर्चे पर सटीक हमले
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी सीमा पर सैन्य कार्रवाई करीब 1200 किलोमीटर की चौड़ाई और 200 किलोमीटर की गहराई तक फैली थी। इस दौरान भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और प्रभावी हमले किए। वायुसेना प्रमुख ने इस अभियान को देश की सुरक्षा में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, वायुसेना न केवल देश की रक्षा में अहम भूमिका निभाती है, बल्कि संभावित विरोधियों को सैन्य कार्रवाई से रोकने की रणनीतिक क्षमता भी रखती है।
ऑपरेशन सिंदूर से मिले ये अहम सबक
चार दिनों तक चले इस अभियान की अगुवाई करने वाले एयर चीफ मार्शल ने कहा कि सैन्य सफलता के बाद आत्मसंतुष्ट होने की जगह अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेना को किसी एक रणनीति या हथियार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। बदलते हालात में तेजी से फैसले लेने और रणनीति बदलने की क्षमता भी उतनी ही अहम है। एपी सिंह के मुताबिक, क्षमता-केंद्रित सेना के पास कार्रवाई के कई विकल्प होते हैं। इसी वजह से वह परिस्थितियों के अनुसार अपने तरीके बदल सकती है और तनाव के दौरान भी स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश कर सकती है।
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में मई 2025 में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। अभियान के दौरान भारत ने नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से आतंकी संगठनों को समर्थन जारी रहने के बीच भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। खबर के मुताबिक, इन हमलों की पहुंच रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय के नजदीकी क्षेत्रों तक रही।
स्वदेशी हथियारों ने दिखाया दम
वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भारत में विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने अभियान के दौरान प्रभावी प्रदर्शन किया। इन प्रणालियों ने दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला करने की क्षमता दिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि अभियान के दौरान आम नागरिकों को नुकसान से बचाने पर जोर दिया गया। वायुसेना ने जीरो कोलेटरल डैमेज के अपने संकल्प का पालन किया। एपी सिंह ने अभियान की सफलता का श्रेय किसी एक लड़ाकू विमान या हथियार को देने के बजाय कई क्षमताओं के संयुक्त इस्तेमाल को दिया। इनमें सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क ऑपरेशंस, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, सटीक मारक क्षमता वाले हथियार और मजबूत एयर डिफेंस शामिल थे।
ड्रोन और लंबी दूरी के हथियारों से निपटने पर जोर
वायुसेना प्रमुख के अनुसार, भारत के स्वदेशी नेटवर्क आधारित एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए कई ड्रोनों और लंबी दूरी के हथियारों को हवा में ही निष्क्रिय करने में भूमिका निभाई। भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वायुसेना निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने वाली प्रणालियों (ISR), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, एंटी-ड्रोन तकनीक और सुरक्षित नेटवर्क को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रणालियों के इस्तेमाल को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ी वायुसेना की तैयारी
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने वायुसेना के भविष्य के लक्ष्य को विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना को ऐसी मल्टी-डोमेन एयरोस्पेस शक्ति के रूप में विकसित करना लक्ष्य है, जो आत्मनिर्भर होने के साथ तकनीकी रूप से भी उन्नत हो। इसका उद्देश्य देश के आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा के लिए वायुसेना को सक्षम बनाना है। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के साथ स्वदेशी तकनीक, आधुनिक एयर डिफेंस और बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति तैयार करने की क्षमता भविष्य की तैयारियों का अहम हिस्सा बनेगी।



