Chirag Paswan and Upendra Kushwaha during the SIR Election Commission controversy
Chirag Paswan and Upendra Kushwaha during the SIR Election Commission controversy

SIR Controversy NDA Allies: विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण यानी SIR विवाद को लेकर NDA के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आई है। केंद्रीय मंत्री और LJP (रामविलास) अध्यक्ष चिराग पासवान तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। दोनों नेताओं ने विपक्ष के आरोपों का समर्थन नहीं किया, लेकिन कहा कि यदि आयोग को लेकर लोगों के मन में भ्रम या संदेह पैदा हो रहा है तो उसे दूर किया जाना चाहिए। TDP ने भी आयोग से स्पष्टीकरण की जरूरत बताई है।

चिराग बोले- किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करना मकसद नहीं

चिराग पासवान ने कहा कि NDA सरकार में शामिल होने के नाते उनका मकसद किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करना नहीं है। उन्होंने विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की।चिराग के मुताबिक, मुद्दा विपक्ष के आरोपों का जवाब देना नहीं, बल्कि लोगों के मन में पैदा हो रहे संदेह को दूर करना है। उन्होंने कहा कि अगर जनता का चुनावी व्यवस्था से भरोसा कम होता है तो यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं होगा। ऐसे में चुनाव आयोग को अपनी स्थिति मजबूती से स्पष्ट करनी चाहिए।

उपेंद्र कुशवाहा ने भी कहा- जनता में उलझन है

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा ने भी SIR से जुड़े विवाद पर चुनाव आयोग से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा। कुशवाहा ने कहा कि विवाद के कारण जनता के बीच काफी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है। इसे दूर करने के लिए आयोग को सही स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे शब्दों से असहमति भी जताई।

TDP ने भी पारदर्शिता पर दिया जोर

NDA के एक अन्य घटक दल TDP ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बताई है। पार्टी के लोकसभा फ्लोर लीडर लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने कहा कि आंध्र प्रदेश में SIR की प्रक्रिया उनके अनुसार पारदर्शी तरीके से हुई, लेकिन चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और ऐसे में सवाल उठने पर उचित स्पष्टीकरण देना सार्वजनिक भरोसे के लिए मददगार होगा।

BJP का आयोग पर रुख क्या है?

SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके सदस्यों के बीच विचारों में अंतर deliberation की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और SIR से जुड़े उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसी विवाद के बीच NDA के सहयोगी दलों की ओर से आयोग से स्पष्टीकरण की मांग सामने आई है। हालांकि इन नेताओं ने विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं किया है।

UCC पर भी सहयोगी दलों की अलग राय रही

यह पहली बार नहीं है जब NDA के घटक दलों ने किसी बड़े मुद्दे पर भाजपा से अलग रुख रखा हो। UCC यानी समान नागरिक संहिता को लेकर भी सहयोगी दलों ने प्रारूप सामने आने के बाद ही अपना अंतिम रुख तय करने की बात कही थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से 2029 तक NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की घोषणा के बाद JDU, LJP (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने कहा था कि वे पहले प्रस्तावित प्रारूप को देखेंगे और उसके बाद अपनी राय रखेंगे। चिराग पासवान ने उस समय सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का हवाला देते हुए व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत बताई थी।

आरक्षण के मुद्दे पर भी अलग-अलग राय

अनुसूचित जातियों के आरक्षण में कोटा के भीतर कोटा यानी आरक्षण के फार्मूले को लेकर भी NDA के घटक दलों में अलग-अलग राय सामने आई है। चिराग पासवान मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव का विरोध करते रहे हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी ने हरियाणा की तर्ज पर अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण में आरक्षण की व्यवस्था का समर्थन किया है। इस तरह SIR विवाद के साथ UCC और आरक्षण जैसे मुद्दों पर भी NDA के सहयोगी दलों की अपनी-अपनी स्थिति सामने आती रही है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।