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CG Congress: LIC का 46 हजार करोड़ लगाकर चमकाया IDBI बैंक, कांग्रेस का हमला-मुनाफा आते ही मोदी सरकार ने विदेशी कंपनी को सौंपा

IDBI Bank Sale: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आईडीबीआई (IDBI) बैंक की हिस्सेदारी विदेशी कंपनी को बेचने के मुद्दे पर राजनीतिक घमासान मच गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने केंद्र सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा है कि मोदी सरकार की औने-पौने दामों पर देश के बहुमूल्य संसाधनों को […]

आईडीबीआई बैंक और एलआईसी विनिवेश के विरोध में कांग्रेस
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

IDBI Bank Sale: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आईडीबीआई (IDBI) बैंक की हिस्सेदारी विदेशी कंपनी को बेचने के मुद्दे पर राजनीतिक घमासान मच गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने केंद्र सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा है कि मोदी सरकार की औने-पौने दामों पर देश के बहुमूल्य संसाधनों को बेचने और चुनिंदा पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने की नीति का एक और भयानक उदाहरण सामने आ गया है।

28% एनपीए वाले बैंक में LIC के 46,000 करोड़ रुपये झोंके गए थे

कांग्रेस नेता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि एक समय जिस आईडीबीआई बैंक का एनपीए (NPA) 28 प्रतिशत के पार पहुंच चुका था और बैंक पूरी तरह खस्ताहाल था, तब उसे संकट से उबारने के लिए देश की जनता के भरोसे वाली संस्था भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के 46,000 करोड़ रुपये झोंके गए थे। जनता के खून-पसीने की कमाई से बैंक को जिंदा किया गया और उसे पटरी पर लाया गया।

बैंक ने कमाया 9,513 करोड़ का मुनाफा तो विदेशी कंपनी को थमा दिया

कांग्रेस का आरोप है कि जब बैंक ने अपनी कार्यकुशलता के बल पर अपना एनपीए घटाकर महज 2.32 प्रतिशत कर लिया और 9,513 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक मुनाफा कमाना शुरू किया, ठीक उसी वक्त मोदी सरकार ने इसकी 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स कंपनी को कौड़ियों के भाव (महज 81 रुपये प्रति शेयर के भाव) बेच दी। पार्टी ने सवाल उठाया है कि “घाटा सहने के लिए देश की जनता और मुनाफा काटने के लिए विदेशी कंपनी?”

नेहरू सरकार द्वारा स्थापित बैंक को बेचे जाने पर उठाए गंभीर सवाल

सुरेंद्र वर्मा ने याद दिलाया कि आईडीबीआई बैंक की स्थापना साल 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार द्वारा देश के आर्थिक विकास के लिए की गई थी। कांग्रेस सरकारों द्वारा सींचे गए इस बड़े वित्तीय संस्थान को आज वर्तमान सरकार द्वारा विदेशी हाथों में सौंपा जा रहा है। इससे पहले एयर इंडिया, फेरो स्क्रैप लिमिटेड, नीलांचल इस्पात निगम और आरईसी जैसी कई सरकारी कंपनियों को बेचे जाने का हवाला भी दिया गया।

छत्तीसगढ़ के एलआईसी पॉलिसीधारकों के हितों पर आघात

कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के संदर्भ में चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेश के लाखों मध्यम वर्गीय परिवारों, सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों ने अपने बच्चों के भविष्य और बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए एलआईसी में अपनी गाढ़ी कमाई निवेश की है। एलआईसी के उसी फंड से आईडीबीआई बैंक को उबारा गया, और आज जब मलाई खाने का वक्त आया, तो मुनाफा विदेशी कंपनी की झोली में डाला जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ की जनता के साथ सीधा धोखा है।

सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण से मंडराया संकट

कांग्रेस ने अंदेशा जताया है कि इस प्रकार के निजीकरण से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) को मिलने वाला आरक्षण का लाभ पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इसके अलावा युवाओं के लिए पक्की सरकारी नौकरियों के अवसर छिनेंगे और आम खाताधारकों पर बैंकों द्वारा मनमाने सर्विस चार्ज का भारी बोझ लादा जाएगा।

सरकार के नए आर्थिक मॉडल पर कांग्रेस का तीखा तंज

पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि क्या मोदी सरकार का नया आर्थिक मॉडल यही है कि पब्लिक का पैसा लगाकर कंपनी खड़ी करो और जैसे ही मुनाफा कमाने लगे, उसे अपने विदेशी और पूंजीपति दोस्तों को बेच दो? कांग्रेस का साफ कहना है कि मुनाफा कमाने वाली सरकारी संस्थाओं को बेचना कोई व्यापारिक बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि देश की संपत्ति की खुली दलाली और आर्थिक डकैती है।

जनहित की रक्षा के लिए विरोध जारी रहेगा

कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार की इस जनविरोधी और राष्ट्रविरोधी नीति का पुरजोर विरोध किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में जनता के बीच इस मुद्दे को ले जाया जाएगा ताकि सरकारी संसाधनों की इस प्रकार की लूट को रोका जा सके और देश की वित्तीय संप्रभुता की रक्षा की जा सके।

Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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