Garba Dispute 2026: महाराष्ट्र में आगामी नवरात्रि उत्सव से पहले गरबा और दांडिया आयोजनों में गैर-हिंदुओं और विशेषकर मुस्लिमों के प्रवेश को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बाद यह विवाद गरमा गया है।
इस पूरे मामले में जहां एक तरफ दक्षिणपंथी संगठन और भाजपा के कुछ नेता सख्त पाबंदियों की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस की एक अलग राय सामने आई है, जिसने चर्चा को एक नया मोड़ दे दिया है।
वीएचपी ने जारी की सख्त गाइडलाइंस, पहचान जांच पर जोर
विश्व हिंदू परिषद ने महाराष्ट्र में आयोजित होने वाले गरबा और दांडिया कार्यक्रमों के लिए अपनी ‘गाइडलाइन’ सार्वजनिक की है। वीएचपी ने स्पष्ट अपील की है कि नवरात्रि के पवित्र अवसरों पर होने वाले इन सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजनों में मुस्लिमों को प्रवेश न दिया जाए। संगठन ने आयोजकों से कहा है कि प्रवेश द्वार पर ही सभी प्रतिभागियों की पहचान की कड़ी जांच की जाए। इसके लिए सरकारी पहचान पत्र (जैसे पहचान पत्र) देखना और माथे पर तिलक लगाना जैसे कदम उठाने का सुझाव दिया गया है।
नितेश राणे का कड़ा रुख और ‘लव जिहाद’ का हवाला
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने वीएचपी के इस रुख का खुलकर समर्थन किया है। राणे ने कहा कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें हिंदू धार्मिक आयोजनों का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे सांस्कृतिक उत्सवों के दौरान ‘लव जिहाद’ के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। राणे ने आयोजकों को सुझाव दिया कि प्रवेश देने से पहले प्रतिभागियों की पहचान जांचने के साथ-साथ उनसे हनुमान चालीसा का पाठ भी करवाया जाना चाहिए।
अमृता फडणवीस की राय: ‘त्योहारों में आनंद लेने में कुछ गलत नहीं’
नितेश राणे और वीएचपी के कड़े बयानों के बीच अमृता फडणवीस का एक बेहद संतुलित और अलग दृष्टिकोण सामने आया है। अमृता फडणवीस ने कहा कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा कार्यक्रम में आता है और पूरी मर्यादा व सम्मान के साथ उत्सव का आनंद लेता है, तो इसमें उन्हें कोई बुराई या गलत बात नजर नहीं आती। उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया कि गरबा में प्रवेश को लेकर राज्य के अंदर और सत्ताधारी खेमे में भी दो अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं।
लव जिहाद के दावों से क्यों बढ़ा विवाद?
‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं द्वारा उन आरोपों के संदर्भ में किया जाता है, जिनमें दावा किया जाता है कि मुस्लिम युवक पहचान छिपाकर हिंदू महिलाओं को रिश्तों में फंसाते हैं और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाते हैं। नितेश राणे ने इसी आशंका को आधार बनाकर गरबा पंडालों में सख्त जांच व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इसी वजह से गरबा उत्सव अब केवल एक सांस्कृतिक आयोजन न रहकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।
(FAQs)
प्र 1: गरबा और दांडिया आयोजनों को लेकर वीएचपी ने क्या दिशा-निर्देश दिए हैं?
उत्तर: वीएचपी ने गरबा आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने, प्रतिभागियों के सरकारी पहचान पत्र की जांच करने और माथे पर तिलक लगाने जैसे दिशा-निर्देश दिए हैं।
प्र 2: भाजपा नेता नितेश राणे ने गरबा में प्रवेश को लेकर क्या सुझाव दिया है?
उत्तर: नितेश राणे ने वीएचपी की मांग का समर्थन करते हुए पहचान जांच और प्रवेश से पहले प्रतिभागियों से हनुमान चालीसा का पाठ कराने की बात कही है।
प्र 3: अमृता फडणवीस ने गरबा विवाद पर क्या बयान दिया है?
उत्तर: अमृता फडणवीस ने कहा है कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा में आता है और मर्यादा में रहकर उत्सव का आनंद लेता है, तो उन्हें इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता।
प्र 4: गरबा में पहचान जांच की मांग के पीछे क्या कारण बताया जा रहा है?
उत्तर: भाजपा नेता और वीएचपी का दावा है कि त्योहारों के दौरान ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहचान जांच जरूरी है।
प्र 5: महाराष्ट्र में इस वर्ष नवरात्रि उत्सव की शुरुआत कब से हो रही है?
उत्तर: महाराष्ट्र में इस वर्ष नवरात्रि उत्सव का आयोजन 11 अक्टूबर से शुरू हो रहा है।


