बुधवार, 30 सितंबर 2026 बुध, 30 सित॰ |
संस्करण:
ब्रेकिंग न्यूज़
पब्लिक इंटरेस्ट

अब शहद से भी नशा? एक चम्मच खाते ही बदल सकती है दुनिया, जानें क्या है ‘मैड हनी’ का राज

Mad Honey: दुनिया में एक ऐसा शहद भी मिलता है, जिसे खाने के बाद नशे जैसा असर महसूस हो सकता है। इसे मैड हनी, रेड हनी और डेली बाल के नाम से जाना जाता है। नेपाल के हिमालयी इलाकों में मिलने वाला यह लाल-एम्बर रंग का शहद इतना शक्तिशाली हो सकता है कि ज्यादा मात्रा […]

Mad Honey from Nepal with Himalayan honey hunters on a steep cliff
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Mad Honey: दुनिया में एक ऐसा शहद भी मिलता है, जिसे खाने के बाद नशे जैसा असर महसूस हो सकता है। इसे मैड हनी, रेड हनी और डेली बाल के नाम से जाना जाता है। नेपाल के हिमालयी इलाकों में मिलने वाला यह लाल-एम्बर रंग का शहद इतना शक्तिशाली हो सकता है कि ज्यादा मात्रा में खाने पर व्यक्ति को चक्कर, मतिभ्रम और बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है। इसे निकालना भी बेहद जोखिम भरा है, क्योंकि इसके छत्ते ऊंची और खड़ी चट्टानों पर बने होते हैं।

आखिर क्यों नशीला है ये शहद?

मैड हनी के नशे जैसे असर के पीछे ग्रेयानोटॉक्सिन (Grayanotoxin) नाम का प्राकृतिक विषैला पदार्थ बताया जाता है। यह रोडोडेंड्रोन के फूलों के रस में पाया जाता है। मधुमक्खियां जब इन फूलों से रस जुटाती हैं तो यही पदार्थ शहद में पहुंच सकता है। इसकी मात्रा मौसम और मधुमक्खियों द्वारा लिए गए दूसरे फूलों के रस के आधार पर बदल सकती है। इसी वजह से हर शहद में इसका असर एक जैसा नहीं होता।

ज्यादा खाया तो दिख सकता है अंधेरा-उजाला

इस शहद का स्वाद सामान्य शहद से अलग बताया जाता है। इसकी मिठास के साथ जड़ी-बूटी जैसी कड़वाहट और गले में जलन महसूस हो सकती है। इसका अधिक सेवन करने पर चक्कर, कमजोरी और मतिभ्रम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों ने इसके प्रभाव को रोशनी और अंधेरे के बीच देखने जैसा बताया है। व्यक्ति को आसपास की चीजें दिखाई दे सकती हैं, लेकिन वह ठीक से हिल-डुल नहीं पाता। इसके प्रभाव की अवधि भी मात्रा और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर कर सकती है। इसलिए इसे सामान्य खाने वाले शहद की तरह लेना सुरक्षित नहीं माना जाता।

300 फीट ऊंची चट्टान से निकाला जाता है शहद

नेपाल के पूर्वी हिस्से में कुलुंग समुदाय के कुछ अनुभवी लोग इस शहद को निकालते हैं। इसके लिए उन्हें करीब 300 फीट ऊंची खड़ी चट्टानों तक पहुंचना पड़ता है। वे बांस की रस्सियों से बनी सीढ़ियों का इस्तेमाल करते हैं। छत्ते के आसपास मौजूद मधुमक्खियों को दूर रखने के लिए एक खंभे से बंधी जलती हुई घास से धुआं किया जाता है। इसके बाद शहद को छत्ते से निकालने की प्रक्रिया शुरू होती है। इतनी ऊंचाई पर काम करने के कारण शहद निकालना अपने आप में बेहद जोखिम भरा काम है।

मैड हनी का असर कैसा होता है?

मैड हनी का स्वाद सामान्य शहद से अलग बताया जाता है। इसकी मिठास के साथ जड़ी-बूटी जैसी कड़वाहट और गले के पीछे जलन महसूस हो सकती है। इसका ज्यादा सेवन करने पर नशे जैसा असर, चक्कर, मतिभ्रम और कमजोरी हो सकती है। गंभीर स्थिति में अस्पताल तक जाने की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से इसे सामान्य खाने वाले शहद की तरह नहीं देखा जाता। इसकी मात्रा और उसमें मौजूद ग्रेयानोटॉक्सिन का स्तर असर को बदल सकता है।

मैड हनी ने कभी पूरी सेना को कर दिया था मदहोश

मैड हनी से जुड़ा एक पुराना ऐतिहासिक किस्सा भी मिलता है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में यूनानी सैन्य कमांडर जेनोफोन ने काला सागर के पास ट्राबज़ोन के आसपास अपने सैनिकों के इस शहद का अधिक सेवन करने का वर्णन किया था। बताया गया कि इसे खाने के बाद सैनिक खड़े नहीं हो पा रहे थे। कम मात्रा खाने वाले सैनिक नशे में धुत लोगों जैसे दिख रहे थे, जबकि ज्यादा मात्रा लेने वालों की हालत कहीं ज्यादा गंभीर थी। इस घटना का उल्लेख मैड हनी के प्रभाव से जुड़े सबसे पुराने ऐतिहासिक विवरणों में किया जाता है।

दुनिया में कहां मिलता है मैड हनी?

यह खास तरह का शहद मुख्य रूप से दो क्षेत्रों से जोड़ा जाता है। एक तुर्की का काला सागर क्षेत्र है और दूसरा नेपाल की हिमालयी पर्वत श्रृंखला। दोनों जगह रोडोडेंड्रोन की कुछ प्रजातियों और उनसे जुड़ी मधुमक्खियों के कारण इस तरह के शहद का उत्पादन होता है।

नशा नहीं, प्राकृतिक विष का असर

मैड हनी को समझने की सबसे अहम बात यह है कि इसका असर सामान्य नशीले पदार्थों जैसा नहीं है। इसमें मौजूद ग्रेयानोटॉक्सिन एक प्राकृतिक विष है, जिसकी वजह से शरीर पर नशे जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए इसे रोमांच या नशे के लिए इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। ज्यादा मात्रा में सेवन गंभीर स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकता है। नेपाल का यह शहद जितना अनोखा है, उसे निकालने की प्रक्रिया उतनी ही खतरनाक है। एक तरफ सैकड़ों फीट ऊंची चट्टान और दूसरी तरफ विषैले असर वाला शहद, यही वजह है कि ‘मैड हनी’ दुनिया के सबसे असामान्य शहदों में गिना जाता है।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

विज्ञापन