Chhattisgarh Analog Paneer Ban: रायपुर में 650 किलो एनालॉग पनीर पकड़े जाने के बाद एक बार फिर सवाल खाने की थाली तक पहुंच गया है। बीरगांव में प्लाईवुड फैक्ट्री की आड़ में तैयार किया जा रहा पनीर ओडिशा भेजा जा रहा था। फूड एंड सेफ्टी विभाग ने मुखबिर की सूचना पर जोरा मॉल के पास पिकअप वाहन को रोककर यह खेप जब्त की। पनीर का सैंपल जांच के लिए लैब भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में अमानकीकृत डेयरी एनालॉग यानी एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर 31 जुलाई 2026 से प्रतिबंध है।
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि राजधानी में पिछले एक महीने में नकली या अमानक पनीर को लेकर खाद्य विभाग पांच कार्रवाई कर चुका है। इनमें तीन मामलों की रिपोर्ट आ चुकी है। दो मामलों में पनीर अमानक मिला, जबकि एक मामले में वह मानक के अनुरूप पाया गया। दो अन्य मामलों की रिपोर्ट अभी बाकी है।
बीरगांव से ओडिशा जा रही थी 650 किलो की खेप
मंगलवार शाम करीब 7 बजे बीरगांव के ओमिया मार्केट स्थित पंछी डोर्स एंड प्लाईवुड फैक्ट्री से 650 किलो पनीर पिकअप में भरकर ओडिशा भेजा जा रहा था। विभाग के मुताबिक इसी फैक्ट्री के भीतर अंशु बंसल द्वारा सांवरिया सेठ मिल्क एंड प्रोडक्ट के नाम से पनीर तैयार किया जा रहा था। फैक्ट्री से वाहन निकलने के बाद मुखबिर ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों को सूचना दी। टीम ने जोरा मॉल के पास पिकअप को रोक लिया। जांच में पनीर की पूरी खेप मिली। ड्राइवर से दस्तावेज मांगे गए, लेकिन दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। फिलहाल जब्त पनीर की लैब रिपोर्ट का इंतजार है। विभाग फैक्ट्री में पनीर तैयार करने की प्रक्रिया और इससे जुड़े लोगों की भी जानकारी जुटा रहा है।
एनालॉग पनीर आखिर होता क्या है?
यहां एक बात समझना जरूरी है। एनालॉग पनीर सामान्य दूध से बनने वाला पनीर नहीं होता। FSSAI के मुताबिक डेयरी एनालॉग ऐसा उत्पाद है जिसमें दूध से प्राप्त किसी एक या अधिक प्रमुख घटक की जगह गैर-दुग्ध सामग्री इस्तेमाल की जाती है और तैयार उत्पाद देखने, खाने या इस्तेमाल में दूध उत्पाद जैसा लग सकता है। FSSAI के नियमों में असली पनीर की परिभाषा दूध या दूध से जुड़े घटकों से बने उत्पाद के रूप में दी गई है। एनालॉग उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती है। इनमें वनस्पति तेल या फैट, स्टार्च और दूसरे गैर-दुग्ध घटक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसलिए केवल देखकर यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि सामने रखा पनीर दूध से बना है या किसी दूसरे आधार से तैयार किया गया है।
इसे खाने से क्या नुकसान हो सकता है?
एनालॉग पनीर को सीधे जहर या हर व्यक्ति के लिए तत्काल नुकसानदेह बताना सही नहीं होगा। असली चिंता यह है कि इसका पोषण और फैट प्रोफाइल दूध से बने पनीर से अलग हो सकता है। अगर किसी उत्पाद में दूध के प्रोटीन और दूसरे पोषक घटकों की जगह गैर-दुग्ध सामग्री इस्तेमाल की गई है, तो वह सामान्य पनीर जैसा पोषण नहीं देगा। यही वजह है कि उपभोक्ता के लिए यह जानना जरूरी है कि वह दूध से बना पनीर खरीद रहा है या कोई डेयरी एनालॉग। खासकर उन लोगों के लिए जो पनीर को प्रोटीन और कैल्शियम के स्रोत के तौर पर अपनी डाइट में शामिल करते हैं, दोनों उत्पादों को एक जैसा मान लेना सही नहीं है। सबसे बड़ी समस्या तब पैदा होती है जब किसी एनालॉग उत्पाद को साफ जानकारी दिए बिना असली पनीर के रूप में बेचा या परोसा जाता है। FSSAI ने भी राज्यों को डेयरी एनालॉग की जांच और गलत तरीके से डेयरी उत्पाद के रूप में पेश किए जाने पर निगरानी बढ़ाने को कहा है।
छत्तीसगढ़ में क्यों लगाया गया है बैन?
छत्तीसगढ़ सरकार ने 31 जुलाई 2026 को राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर अमानकीकृत डेयरी एनालॉग और ऐसे गैर-दुग्ध उत्पादों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया, जिन्हें दूध उत्पाद के रूप में पेश किया जाता है। यह रोक सिर्फ बिक्री तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और विक्रय शामिल हैं। यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धाराओं 18 और 30 के तहत जारी किया गया है। राज्य में यह प्रतिबंध एक साल के लिए या FSSAI की अंतिम व्यवस्था आने तक, जो पहले हो, लागू रहने की जानकारी दी गई है। यानी रायपुर में पकड़ी गई 650 किलो की खेप का मामला सिर्फ अमानक खाद्य पदार्थ की जांच का नहीं है। अगर लैब जांच और अन्य कार्रवाई में प्रतिबंधित श्रेणी की पुष्टि होती है, तो यह राज्य में लागू रोक के उल्लंघन का मामला भी बन सकता है।
पूरे देश में एनालॉग पनीर पर क्या नियम हैं?
यहां छत्तीसगढ़ और देश के बाकी हिस्सों के नियमों में फर्क समझना जरूरी है। पूरे भारत में एनालॉग पनीर पर छत्तीसगढ़ जैसा एक समान राज्यव्यापी प्रतिबंध नहीं है। FSSAI डेयरी एनालॉग को एक अलग श्रेणी के उत्पाद के रूप में देखता है। लेकिन इसे दूध या दूध उत्पाद बताकर उपभोक्ता को भ्रमित नहीं किया जा सकता। FSSAI की गाइडलाइन में ऐसे उत्पादों के लिए उचित पहचान और लेबलिंग पर जोर दिया गया है। 2025 में FSSAI ने डेयरी एनालॉग को लेकर एक Consultation Paper भी जारी किया था। इसमें सुझाव दिया गया था कि ऐसे उत्पादों को मेन्यू पर Non-dairy या Analogue के रूप में स्पष्ट किया जाए और ढीले रूप में बिक्री पर भी नियंत्रण की व्यवस्था की जाए। यह एक consultation proposal था, अंतिम नियम नहीं। FSSAI की वैज्ञानिक और नियामकीय चर्चाओं में यह मुद्दा भी सामने आया कि गैर-मानकीकृत डेयरी एनालॉग को उपभोक्ताओं के सामने वास्तविक डेयरी उत्पाद की तरह पेश करने से रोकने के लिए अलग व्यवस्था जरूरी है।
सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, कई राज्यों में बढ़ी सख्ती
एनालॉग पनीर को लेकर 2026 में कई राज्यों ने सख्त कदम उठाए हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों ने गैर-दुग्ध या एनालॉग पनीर की बिक्री और दूसरी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन राज्यों में आदेशों की अवधि और दायरा अलग-अलग है। इससे साफ है कि मामला सिर्फ सस्ता पनीर बेचने तक सीमित नहीं है। असली सवाल खाद्य सुरक्षा, सही लेबलिंग और उपभोक्ता को सही जानकारी देने का है।
रायपुर में पहले भी पकड़ा जा चुका है अमानक पनीर
रायपुर में 4 अगस्त को रेलवे स्टेशन के पास प्रियांशु राय से 100 किलो एनालॉग पनीर जब्त किया गया था। इसे अंबिकापुर भेजे जाने की तैयारी थी। जांच में यह अमानक पाया गया। इसके बाद 5 अगस्त को तिल्दा स्थित एक डेयरी का औचक निरीक्षण किया गया। वहां तैयार किए जा रहे पनीर का सैंपल लिया गया। लैब जांच में यह भी अमानक पाया गया। अब बीरगांव से 650 किलो की बड़ी खेप पकड़ी गई है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि जब्त पनीर खाद्य मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।
कैसे रहें सावधान?
पनीर खरीदते समय सबसे जरूरी बात है कि उसे सिर्फ देखकर असली मानने की गलती न करें। पैक्ड पनीर खरीद रहे हैं तो लेबल, निर्माता का नाम, FSSAI लाइसेंस और सामग्री की जानकारी जरूर देखें। रेस्टोरेंट या होटल में पनीर की कोई डिश मंगाते समय भी यह जानना उपभोक्ता का अधिकार है कि उसमें इस्तेमाल किया गया उत्पाद दूध से बना पनीर है या कोई डेयरी एनालॉग।



