Durga Visarjan: इस वर्ष शारदीय नवरात्र की नवमीं और दशमीं तिथि एक ही दिन यानी 20 अक्टूबर को पड़ी। इस विशेष संयोग के चलते सुबह के समय घरों और पंडालों में मां दुर्गा के नौवें स्वरूप की पूजा और कन्या पूजन किया गया, वहीं शाम होते ही विजयादशमी का पावन पर्व धूमधाम से मनाया गया। एक ही दिन दोनों बड़े अनुष्ठान होने से शहरभर में धार्मिक और उत्सव का माहौल देखने को मिला।
राजधानी में भव्य पैमाने पर हुआ रावण दहन
विजयादशमी के अवसर पर राजधानी रायपुर में विभिन्न स्थानों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया गया। डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में प्रदेश का सबसे बड़ा रावण का पुतला जलाया गया, जिसे देखने के लिए भारी जनसमूह उमड़ा था। इसके अलावा प्राचीन रावणभाठा मैदान, चौबे कॉलोनी, कटोरा तालाब और शंकर नगर जैसे प्रमुख इलाकों में भी पारंपरिक उल्लास के साथ रावण दहन संपन्न हुआ और लोगों ने एक-दूसरे को सोनपत्ता बांटकर बधाइयां दीं।
रावण दहन के साथ शुरू हुआ विसर्जन का दौर
रावण दहन के ठीक अगले दिन से ही राजधानी में दुर्गा प्रतिमाओं और जोत-जवारों के विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया। शहर के अलग-अलग मोहल्लों और समितियों द्वारा मां दुर्गा की प्रतिमाओं और जवारों को विसर्जन के लिए ले जाया जा रहा है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं और परंपरा के अनुसार यह विसर्जन का सिलसिला 25 अक्टूबर तक लगातार जारी रहेगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
भक्तिमय माहौल और पारंपरिक अनुष्ठान
विसर्जन जुलूसों के दौरान राजधानी के विभिन्न मार्गों पर अद्भुत भक्तिभाव देखने को मिल रहा है। विविध मोहल्लों से निकल रहे जोत-जवारा विसर्जन जुलूसों में पारंपरिक जस गीतों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा पारंपरिक सांग बाणा धारण करने के अनुष्ठान भी किए जा रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और गहरी आस्था का प्रतीक है।
राजनीतिक और सामाजिक सहभागिता
धार्मिक आयोजनों के इस उल्लास में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी सक्रिय सहभागिता रही। विशेष रूप से पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत निकलने वाले कई जंवारा जुलूसों में पूर्व विधायक विकास उपाध्याय भी शामिल हुए और मां दुर्गा का आशीर्वाद लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने इस सांस्कृतिक पर्व को आपसी भाईचारे के साथ मनाया।



