सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस जासूसी मामले (Pegasus Snooping Case) की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है। वरिष्ठ पत्रकार एन. राम ने इसे लेकर याचिका दायर की थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा । वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने एन. राम की याचिका का भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष जिक्र करते हुए इस पर जल्द सुनवाई की मांग की।

याचिका में कहीं आईटी कानून की ये बातें

इस याचिका में कहा गया है कि पत्रकारों, चिकित्सकों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सरकार के मंत्रियों और विपक्षी नेताओं के फोन को हैक करना संविधान के अनुच्छेद 19 (एक) (ए) के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन से गंभीर समझौता है। पेगासस स्पाइवेयर के जरिए फोन हैक करना आईटी कानून की धारा 66 (कंप्यूटर से संबंधित अपराध), 66बी (बेईमानी से चुराए गए कंप्यूटर संसाधन या संचार उपकरण प्राप्त करने के लिए सजा), 66ई और 66एफ के तहत एक दंडनीय अपराध है।

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पेगासस मुद्दे को लेकर संसद बाधित

आपको बात दें कि पेगासस मामले को लेकर पिछले कई दिनों से संसद का मौजूदा मॉनसून सत्र बाधित रहा है। कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं और जवाब मांग रहे हैं। 19 जुलाई से मॉनसून सत्र आरंभ हुआ था लेकिन पेगासस, किसान और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर पिछले कई दिनों से संसद के दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है जिस कारण सदन की कार्यवाही बाधित रही है।

500 से अधिक लोगों ने लिखा पत्र

आपको बता दें कि पेगासस के मामले पर 500 से अधिक लोगों और समूहों ने भारत के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमन्ना को पत्र लिखा है और मांग की है सुप्रीम कोर्ट इसमें हस्तक्षेप करे। इस पत्र में भारत में इजराइली कंपनी एनएसओ के पेगासस स्पाइवेयर की बिक्री, हस्तांतरण और उपयोग पर रोक लगाने की भी मांग की है। पत्र पर अरूणा रॉय, अंजलि भारद्वाज, हर्ष मंदर जैसे नागरिक अधिकार कार्यकर्ता, वृंदा ग्रोवर, झूमा सेना जैसी प्रख्यात वकीलों ने हस्ताक्षर किये हैं।

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