Raipur: राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), छत्तीसगढ़, रायपुर द्वारा अपराध क्रमांक-03/2024 की विवेचना में ₹500 करोड़ से अधिक अवैध कोल लेवी एवं अन्य वसूली, आपराधिक षड्यंत्र, शासकीय प्रक्रिया के दुरुपयोग तथा अवैध रूप से अर्जित राशि के लेन-देन की जांच के पश्चात 12 आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 384, 467, 468, 471 एवं 109 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के अंतर्गत लगभग 9500 पन्नों का पूरक अभियोग पत्र क्रमांक 06 माननीय विशेष न्यायालय (भ्र.नि.अ.) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
कोयला घोटाले में 12 आरोपियों के विरुद्ध आज विशेष न्यायालय, रायपुर में लगभग 9500 पन्नों का पूरक चालान दस्तावेजों के साथ पेश किया गया। आरोप है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से ₹25 प्रति टन की अवैध वसूली, रकम के वितरण और सम्पत्तियों में निवेश किया गया। इसका पूरा विवरण चालान में शामिल है।
इसी तरह आयरन पैलेट परिवहन से ₹100 प्रति टन की अवैध वसूली एवं उसमें तत्कालीन खनिज संचालक की भूमिका भी जांच में पाई गई। आदेश जारी करने से जुड़े डिजिटल साक्ष्य, सीएम हाउस के नाम से विश्राम गृह बुकिंग तथा बालको और टीजेबीसी के पत्राचार का विवरण चालान में शामिल। इसके अलावा राजनीतिक कार्यों, भूमि एवं वाशरी खरीदी तथा नकद रकम के लेन-देन से संबंधित तथ्य सामने आए। इस प्रकरण में पूर्व में एक मुख्य एवं पांच पूरक चालान पेश किए जा चुके हैं।

घोटाले में किनकी भूमिका पाई गई ?
इस चालान में बताया गया है कि घोटाले में राम गोपाल अग्रवाल, देवेन्द्र सिंह यादव, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव राय, जयप्रकाश मौर्य, पियूष कुमार साहू, जोगेन्दर सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल एवं राहुल मिश्रा की भूमिका शामिल है।
वसूली के लिए खनिज अधिकारी बने जरिया
प्रकरण की विवेचना में पाया गया कि सूर्यकांत तिवारी ने तत्कालीन अधिकारियों एवं अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से ₹25 प्रति टन की दर से अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई थी। दिनांक 15.07.2020 के आदेश से आनलाईन ई-परमिट जारी होने से पहले जिला खनिज अधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य किया गया। इस व्यवस्था में अवैध रकम मिलने के बाद ही कोयला परिवहन की अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती थी।
विभिन्न जिलों से वसूली गई रकम रायपुर पहुंचाई जाती थी, जहां उसका हिसाब रखकर आगे वितरण किया जाता था। पूर्व चालानों के बाद की गई विवेचना में इस रकम को प्राप्त करने, राजनीतिक एवं व्यक्तिगत कार्यों में खर्च करने, नकद रकम सुरक्षित रखने तथा भूमि, वाशरी और अन्य सम्पत्तियों में निवेश करने से संबंधित तथ्य सामने आए। जब्त डायरियों, व्हाट्सएप चौट, बैंक लेन-देन और सम्पत्तियों के दस्तावेजों के आधार पर संबंधित आरोपियों की भूमिका का विवरण वर्तमान पूरक चालान में दिया गया है।
अफसर से जब्त मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्य
विवेचना में अनुराग दीवान (सेवानिवृत्त खनिज अफसर) के जब्त मोबाइल से दिनांक 15.07.2020 का आदेश जारी किए जाने से संबंधित महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इनसे सामने आया है कि राजस्व हानि का कोई ठोस आधार नहीं होने के बावजूद इसका हवाला देकर कोयला परिवहन की अनुमति प्रक्रिया में बदलाव किया गया और जिला खनिज अधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य किया गया।
सूर्यकान्त तिवारी ने तैयार किया वसूली का नेटवर्क
इसी दौरान सूर्यकांत तिवारी एवं उसके सहयोगी कोयला वसूली की व्यवस्था लागू कराने के लिए विभिन्न जिलों में जाकर बैठकें कर रहे थे। उनके ठहरने के लिए संबंधित जिलों के विश्राम गृहों में सीएम हाउस के नाम से बुकिंग कराए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं।
विवेचना में बालको कंपनी का वह ईमेल एवं संबंधित पत्राचार भी जब्त किया गया है, जिसमें लेवी भुगतान के कारण परिवहन बिलों में ₹25 प्रति टन की राशि labeled as “incidental expenses” के रूप में जोड़े जाने का उल्लेख है। इसके अतिरिक्त, दिनांक 15.07.2020 का आदेश जारी होने के बाद कोयला परिवहन के टीपी पास जारी किए जाने के संबंध में अंबुजा कंपनी द्वारा खनिज विभाग को भेजा गया पत्र भी जब्त किया गया है। उक्त डिजिटल साक्ष्य एवं पत्राचार का विवरण पूरक चालान में शामिल किया गया है।
आयरन पैलेट परिवहन में भी जमकर वसूली
आयरन पैलेट परिवहन से ₹100 प्रति टन की वसूली
विवेचना में कोयले के अलावा लौह अयस्क पैलेट के परिवहन से भी ₹100 प्रति टन की दर से अवैध वसूली के तथ्य सामने आए हैं। लौह अयस्क एवं पैलेट परिवहन के लिए अभिवहन पास की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिनांक 14.12.2021 को संचालनालय से शासन को भेजा गया था। दिनांक 05.01.2022 के आदेश से सड़क एवं रेल मार्ग से परिवहन के लिए यह व्यवस्था लागू की गई।
जयप्रकाश मौर्य पर उद्योगपतियों पर दबाव बनाने का आरोप
इसी दौरान तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य द्वारा पैलेट उद्योगपतियों की बैठक लेकर उन्हें ₹100 प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने के तथ्य मिले हैं। पैलेट उद्योग से वसूली की प्रतिवष्टियां जब्त डायरियों में भी मिली हैं। इस वसूली, संबंधित विभागीय कार्रवाई और उसमें जयप्रकाश मौर्य की भूमिका का विवरण चालान में शामिल किया गया है।
चालान में शामिल आरोपियों की क्या रही भूमिका
- राम गोपाल अग्रवाल: राम गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं “C PARTY” के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्ट्री मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है।
- देवेन्द्र सिंह यादव: भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल 3 करोड़ रुपये दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है।
- विनोद तिवारी: विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है।
- रामप्रताप सिंह: जब्त डायरियों में “R P Singh” एवं “RP” नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है।
- चंद्रदेव प्रसाद राय: तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के तथ्य मिले हैं। इसके अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा उन्हें आभूषण उपलब्ध कराए जाने का विवरण भी चालान में शामिल है।
- जयप्रकाश मौर्य: तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹1 करोड़ (लगभग एक करोड़ रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग के मामलों में उसके साथ संपर्क रखने तथा अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। पैलेट उद्योगपतियों को ₹100 प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने का विवरण भी उनके विरुद्ध चालान में शामिल है।
- पियूष कुमार साहू: इस व्यक्ति की भूमिका अपनी बहन रानू साहू को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने में पाई गई है। परिवार से संबंधित 13 संपत्तियों की खरीदी में बैंक खातों से भुगतान के अलावा रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान भी किया गया। रकम के लेन-देन और संपत्ति खरीदी में उनके तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया।
- जोगेन्दर सिंह: जोगेन्दर सिंह, सूर्यकांत तिवारी के व्यावसायिक भागीदार थे। विवेचना में जय अम्बे रोड लाइन्स के माध्यम से नकद रकम की व्यवस्था करने तथा अपनी फर्मों के खातों से बैंक प्रविष्टियां उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका पाई गई है। सात फर्मों को भेजी गई लगभग ₹40 करोड़ (लगभग चालीस करोड़ रुपये) की राशि और उससे संबंधित लेन-देन का विवरण भी चालान में दिया गया है।
- अनुराग चौरसिया: अनुराग चौरसिया की भूमिका सौम्या चौरसिया को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम फ्लैट और भूमि खरीदी में लगाने में पाई गई है। इसके लिए मोटल मधुबन तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया। इन खातों में प्राप्त रकम, आगे किए गए भुगतान और संपत्तियों में निवेश का विवरण चालान में शामिल है।
- दीपेश टांक: दीपेश टांक की भूमिका भूमि सौदे में रजिस्ट्री मूल्य के अतिरिक्त नकद रकम प्राप्त करने तथा नकद रकम को कृषि आय के रूप में दर्शाने में पाई गई है। भूमि विक्रय के बाद भी वे ओम एग्रो फार्म के कार्यों एवं भुगतान से जुड़े रहे। अवैध रकम को भूमि और फार्म के कार्यों में लगाने तथा उसे वैध आय दर्शाने से संबंधित तथ्य चालान में दिए गए हैं।
- सुनील कुमार अग्रवाल: इंद्रमणि समूह के सुनील कुमार अग्रवाल की भूमिका सूर्यकांत तिवारी की ओर से भेजी गई नकद रकम अपने यहां रखने, उससे आगे भुगतान करने तथा वाशरी खरीदी में निवेश कराने में पाई गई है। इंद्रमणि समूह से संबंधित लेन-देन, वाशरी एवं भूमि खरीदी और नकद रकम के उपयोग का विवरण चालान में शामिल है।
- राहुल मिश्रा: राहुल मिश्रा, सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी निर्माण परियोजनाओं में कार्य करते थे। विवेचना में उनके पास बड़ी नकद रकम रखे जाने तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे निखिल चंद्राकर के माध्यम से सूर्यकांत तिवारी को वापस उपलब्ध कराए जाने के तथ्य मिले हैं। निर्माण कार्यों के भुगतान और नकद रकम सुरक्षित रखने में उनकी भूमिका का विवरण चालान में दिया गया है।
उक्त प्रकरण में अन्य अन्य संभावित संदेहियों एवं शेष लेन-देन के संबंध में माननीय न्यायालय से अनुमति प्राप्त दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) में अग्रिम विवेचना जारी है।



