सीतापुर। मनरेगा में निगरानी की पोल खोलता एक सनसनीखेज मामला सरगुजा क्षेत्र के सीतापुर से सामने आया है। यहां एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर डबरी खोद दी गई, जो इस दुनिया में ही नहीं है।
मामला ग्राम पंचायत बेलजोरा के जंगलपारा का है। यहां सुखनाथ नागवंशी की मौत करीब 4 साल पहले हो चुकी है, लेकिन मनरेगा रिकॉर्ड में वर्ष 2024-25 में उन्हीं के नाम पर करीब 3 लाख रुपये की डबरी स्वीकृत दिखा दी गई। और तो और, मौके पर निर्माण भी पूरा करा दिया गया।
खुदाई शुरू हुई तब खुला राज
इस फर्जीवाड़े का पता तब चला जब मृतक की जमीन पर JCB/मजदूरों से खुदाई शुरू हुई। आवाज सुनकर बेटा रामकुमार मौके पर पहुंचा तो दंग रह गया। उसे बताया गया कि उसके मृत पिता के नाम पर मनरेगा से डबरी स्वीकृत हुई है।
परिजनों का तर्क–डबरी से कोई लाभ नहीं
रामकुमार का कहना है — “पिताजी की 4 साल पहले मृत्यु हो चुकी है। हमें इस योजना के बारे में कभी बताया ही नहीं गया। आपत्ति के बाद भी काम पूरा करा दिया गया। इस डबरी से हमें कोई फायदा नहीं, उल्टा हमारी उपजाऊ जमीन खराब हो गई।”
आवास मित्र और सचिव पर सवाल
परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि मृतक के पुराने दस्तावेजों का फायदा उठाकर योजना स्वीकृत कराई गई। करीब एक साल पहले इसकी शिकायत अधिकारियों तक पहुंच गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब ग्रामीण सिर्फ डबरी की नहीं, बल्कि पूरी चेन की जांच मांग रहे हैं — स्वीकृति किसने दी? तकनीकी स्वीकृति, स्थल निरीक्षण, मस्टर रोल में किसकी हाजिरी लगी? मजदूरी का भुगतान किसे हुआ?
फिलहाल मामला जांच के इंतजार में है, लेकिन एक मृत व्यक्ति के नाम पर जिंदा योजना चलने ने मनरेगा की पूरी निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. सीतापुर में मनरेगा घोटाले में क्या हुआ है?
— ग्राम पंचायत बेलजोरा के जंगलपारा में सुखनाथ नागवंशी नामक व्यक्ति, जिनकी 4 साल पहले मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम पर वर्ष 2024-25 में मनरेगा के तहत 3 लाख रुपये की लागत से डबरी निर्माण स्वीकृत कर दी गई और जमीन पर निर्माण भी करा दिया गया। परिजनों को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
Q2. मामले का खुलासा कैसे हुआ और परिवार का क्या आरोप है?
— मृतक की जमीन पर खुदाई शुरू होने पर परिवार को पता चला। बेटे रामकुमार का आरोप है कि बिना सूचना के उनकी उपजाऊ जमीन पर डबरी खोद दी गई, आपत्ति के बावजूद काम पूरा कराया गया और इससे परिवार को कोई लाभ नहीं हुआ।
Q3. इस मामले में जांच की मांग किस आधार पर की जा रही है?
— परिजन और ग्रामीण आवास मित्र और मनरेगा मैदानी अमले की भूमिका की जांच चाहते हैं। उनकी मांग है कि स्वीकृति से लेकर भुगतान तक — तकनीकी प्रक्रिया, स्थल निरीक्षण, मस्टर रोल, मजदूरी भुगतान और संबंधित रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो, ताकि पता चले कि मृतक के दस्तावेजों का दुरुपयोग कैसे हुआ।



