Asian Para Games 2026: जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए देश की उम्मीदों को नई ऊंचाइयां दी हैं। भारत अब तक 27 स्वर्ण, 33 रजत और 43 कांस्य सहित कुल 103 पदक अपने नाम कर चुका है।
खास बात यह है कि भारतीय दल ने 2023 में हांगझोउ में हुए पिछले एशियन पैरा गेम्स के 27 स्वर्ण पदकों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। प्रतियोगिता का अंतिम दिन शेष होने के कारण यह पूरी संभावना है कि आइची-नागोया भारत का अब तक का सबसे सफल एशियन पैरा गेम्स अभियान साबित होगा।
पिछले संस्करण के रिकॉर्ड और पदकों का समीकरण
पिछले संस्करण (जो कि 2022 के बजाय 2023 में आयोजित हुआ था) में भारत ने 27 स्वर्ण, 32 रजत और 49 कांस्य सहित कुल 108 पदक जीते थे। वर्तमान अभियान में स्वर्ण पदकों के मामले में पिछली बराबरी हो चुकी है, जबकि कुल पदकों के पिछले सर्वश्रेष्ठ आंकड़े को पार करने के लिए भारत को अंतिम दिन कम से कम छह और पदक जीतने होंगे। खिलाड़ियों के मौजूदा फॉर्म को देखते हुए इतिहास रचने की पूरी उम्मीद बनी हुई है।
सामान्य एशियाई खेल बनाम एशियन पैरा गेम्स का अंतर
इसी मेजबान शहर में संपन्न हुए सामान्य एशियाई खेलों में भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य सहित कुल 85 पदक जीते थे और दल चौथे स्थान पर रहा था। इसके विपरीत, पैरा खिलाड़ियों ने 103 पदकों का आंकड़ा छूकर सामान्य खेलों से 18 अधिक पदक अपने नाम किए हैं। हालांकि दोनों प्रतियोगिताओं के वर्ग और स्पर्धाएं अलग हैं, लेकिन पैरा एथलीटों ने यह साबित कर दिया है कि उनकी सफलता किसी भी अन्य खेल मंच से कम नहीं है।
पैरा एथलेटिक्स बना भारत की सफलता का सबसे बड़ा आधार
भारत के कुल 103 पदकों में सबसे बड़ा योगदान पैरा एथलेटिक्स का रहा है, जिसके जरिए देश ने 20 स्वर्ण, 18 रजत और 19 कांस्य सहित कुल 57 पदक जीते। दिलीप महादू गावित, निषाद कुमार, सिमरन, दीप्ति जीवनजी और हनी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन किया। हनी ने पुरुषों की भाला फेंक एफ37/38 स्पर्धा में 60.49 मीटर का विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया।
विभिन्न खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा
एथलेटिक्स के अलावा अन्य खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। पैरा बैडमिंटन में भारत को 2 स्वर्ण, 4 रजत और 8 कांस्य सहित 14 पदक मिले। निशानेबाजी में मोना अग्रवाल ने महिला 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में 357.5 अंक के विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा पैरा तीरंदाजी, तैराकी, टेबल टेनिस, जूडो और पावरलिफ्टिंग में भी खिलाड़ियों ने देश की झोली में कई पदक डाले।
साल दर साल बेहतर होता भारत का पैरा खेल सफर
एशियन पैरा गेम्स में भारत का सफर लगातार सुधार की एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है। वर्ष 2010 के ग्वांगझोऊ खेलों में भारत ने जहां मात्र 14 पदक जीते थे, वहीं 2014 में इंचियोन में यह संख्या बढ़कर 33 और 2018 में जकार्ता में 72 हो गई। इसके बाद 2023 के हांगझोऊ खेलों में 108 पदक जीतकर भारत ने एक नया मील का पत्थर स्थापित किया और अब आइची-नागोया में 103 पदक अपने नाम कर चुका है।
पदकों की संख्या से परे प्रेरणा और मेहनत की कहानी
इन खेलों की असली सफलता केवल पदक तालिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे खिलाड़ियों की वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और संघर्ष की कहानियां जुड़ी हैं। जब मोना अग्रवाल या हनी जैसे खिलाड़ी विश्व रिकॉर्ड बनाते हैं, तो वह केवल उनका व्यक्तिगत स्वर्ण नहीं होता, बल्कि पूरे देश के खेल प्रेमियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन जाता है।
पदक तालिका में शीर्ष देशों की स्थिति
इस बार के एशियन पैरा गेम्स की पदक तालिका में चीन 170 स्वर्ण, 90 रजत और 94 कांस्य (कुल 354 पदक) के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है। इसके बाद जापान 154 और उज्बेकिस्तान 127 कुल पदकों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं, जबकि भारत 103 पदकों के साथ मजबूत स्थिति में चौथे स्थान पर काबिज है।
स्वर्ण पदक विजेताओं की लंबी सूची
भारत की इस ऐतिहासिक सफलता में कई खिलाड़ियों का अमूल्य योगदान रहा है। तीरंदाजी में शीतल देवी और हरविंदर सिंह, एथलेटिक्स में दिलीप, सिमरन, दीप्ति जीवनजी, बैडमिंटन में नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार, तथा शूटिंग में मोना अग्रवाल जैसे सितारों ने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रगान का मान बढ़ाया है। रजत और कांस्य पदक विजेताओं ने भी इस तालिका को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
आखिरी दिन पर टिकी देश की निगाहें और भविष्य की उम्मीदें
अब सभी की निगाहें प्रतियोगिता के अंतिम दिन के मुकाबलों पर टिकी हैं। क्या भारत हांगझोऊ के 108 पदकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर एक नया इतिहास रचेगा? इसका जवाब कुछ ही घंटों में मिल जाएगा। लेकिन यह तय है कि आइची-नागोया के इन खेलों ने भारतीय पैरा स्पोर्ट्स को एक नई पहचान और बुलंदी दे दी है, जो आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।



