TRP Exclusive: पंजाब में चन्नी के रूप में कांग्रेस को मिल गया 'दलित चेहरा', यूपी में पीएल 'पुनिया' पर दांव खेल सकता पार्टी आलाकमान, प्रियंका लेंगी अंतिम फैसला,छत्तीसगढ़ छोड़ यूपी में होगी एंट्री

ई दिल्ली/विशेष संवाददाता। पिछले 60 सालों से देश की सत्ता में काबिज रही कांग्रेस अब खुद बचाने और राज्यों में अपनी वापसी के लिए नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के वैष्णव देवी दर्शन और यूपी में प्रियंका गांधी की बढ़ती सक्रियता से जोड़कर देखा और समझा जा सकता है।

हाल ही में पंजाब में लंबे घटनाक्रम के बाद कैप्टन अरमिंदर सिंह की जिस तरीके से विदाई कर दलित समाज के नेता चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया गया है उसके जरिए कांग्रेस आलाकमान पार्टीजनों तक ये संदेश पहुंचाने में सफल रहा है कि कांग्रेस में सत्ता की चाबी अभी भी नेहरु गांधी के पास है। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब में बीएसपी और अकाली गठबंधन की हवा निकल गई है वहीं भाजपा वॉच एंड वेट की हालत में आ गई है।

यूपी में चल सकता है पंजाब फार्मूला

10 जनपद से जुड़े कांग्रेस के उच्च सूत्रों का कहना है कि पंजाब का फार्मूला आने वाले विधानसभा चुनाव में यूपी में भी लागू किया जा सकता है। जहां दलित, ओबीसी और मुस्लिम वोटर किसी भी पार्टी की हार.जीत में निर्णायक साबित होते रहे हैं। यूपी जैसे बड़े राज्य में एक सीएम व दो डिप्यूटी सीएम का फाम्र्यूला लागू कर समाज के सभी वर्गों को पार्टी से जोड़ने में मदद मिलेगी, जो पंजाब में हिट रहा।

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ये भी कहा जा रहा है यूपी में पार्टी के रणनीतिकार, गांधी परिवार की प्रियंका गांधी को सीएम उम्मीदवार के रूप में पेश करने की कोशिश में लगे हैं, मगर प्रियंका ने अभी तक इसके लिए अधिकारिक रूप हामी नहीं भरी है। यहीं वजह है कि एससी समाज के बड़े चेहरे के रूप में पीएल पुनिया की यूपी की राजनीति में वापसी का सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

पुनिया पर खेला जा सकता है दांव

सूत्रों का कहना है कि यूपी में गांधी परिवार के करीबी रहे बाराबंकी के पूर्व सांसद व अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष राज्यसभा सदस्य पीएल पुनिया पर पार्टी दांव लगा सकती है। हालांकि अंतिम फैसला यूपी में कांग्रेस के चुनावी अभियान की अगुवाई प्रभारी प्रियंका गांधी ही करेंगी। लेकिन, पुनिया के नाम सामने आने सियासी सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

बता दें कि कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया पहले भी बाराबंकी से कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में वे पार्टी के छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव हैं, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में दो तिहाई से ज्यादा सीटें जीत के 15 साल से काबिज भाजपा सरकार को 13 सीटों पर समेट दिया। कांग्रेस की इस जीत में पुनिया का अहम रोल रहा है।

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वे यूपी में एससी वर्ग में पार्टी का बड़ा चेहरा है, अगर पुनिया यूपी की राजनीति में वापसी करते हैं तो इससे पार्टी को एससी वर्ग में पकड़ बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही छत्तीसगढ़ में पार्टी के रणनीतिकार रहे पुनिया के लंबे सियासी अनुभव का लाभ भी पार्टी को मिल सकेगा।

12000 किमी की प्रतिज्ञा यात्रा निकाल कर प्रियंका टटोलेंगी यूपी का मूड

बता दें कि यूपी में कांग्रेस के चुनावी अभियान की अगुवाई यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ही करेंगी। वर्तमान में यूपी में कांग्रेस के पास उनसे बड़ा चेहरा कोई दूसरा नहीं है। वह यूपी के 18 मंडलों में रैलियां करेगी। 12000 किमी की प्रतिज्ञा यात्रा निकालने से पहले कांग्रेस चार जनसभाएं करेगी।

इसका आगाज पश्चिमी यूपी के मेरठ शहर से होगा। मेरठ में 29 सितम्बर जनसभा होगी। फिर दो अक्तूबर को बनारस, 7 को आगरा और 12 अक्तूबर को गोरखपुर में जनसभाएं की जाएंगी। इन जनसभाओं से कांग्रेस जनता की नब्ज टटोलेगी।

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प्रियंका पश्चिमी यूपी का राजनीति रूप से मजबूत शहर मेरठ से 29 सितम्बर को जनसभाओं की शुरुआत की जाएगी। चार जनसभाएं तय हो चुकी हैं, इनमें दो पश्चिमी तो दो पूरब में की जाएंगी। वहीं चित्रकूट में भी जनसभा होनी है लेकिन तारीख अभी तय नहीं है। इन सभी जनसभाओं का खाका तैयार हो चुका है।

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