नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर राजधानी दिल्ली में भड़की हिंसा ने 18 लोगों की जान ले ली है। मंगलवार रात तक हालात कितने बेकाबू थे, अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि गृह मंत्रालय को देखते ही गोली मारने के आदेश देने पड़े। हालांकि बुधवार सुबह से शांति है। पुलिस के साथ ही अर्द्धसैनिक बलों को लगाया गया है। दिल्ली सरकार ने भी लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।


हिंसा प्रभावित इलाकों में बुधवार सुबह शांति नजर आ रही है, लेकिन लोग आशंकित हैं और तनाव बना हुआ है। जिन इलाकों में कर्फ्यू नहीं लगा है, वहां लोग बाहर निकले हैं और रोजमर्रा की चीजें खरीद रहे हैं। मौजपुर चौक पर भी राहगीरों और वाहन चालकों की आवाजाही है। यहां भी अर्द्धसैनिक बल तैनात हैं। कबीर नगर सर्विस रोड़ पर सबसे ज़्यादा पत्थरबाजी हुई थी। यहां पर अभी भी परिचालन बंद है। कर्फ्यू के बावजूद खजूरी पुस्ता रोड स्थित दिल्ली सीमा के अंदर सड़क पर एकत्र हो रहे लोग। रोड़ पर कोई पुलिसकर्मी नहीं है। वहीं दिल्ली सीमा में एकत्र लोगों को देख सुरक्षा की दृष्टि से यूपी सीमा पर ने बल तैनात कर दिया है।

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गोकुलपुरी में फिर भड़की हिंसा

दिल्ली में सुबह से शांति थी, लेकिन सुबह 10 बजे के करीब गोकुलपुरी में कुछ लोगों ने कबाड़ की एक दुकान में आग लगा दी। यहां भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। वहीं मरने वालों की संख्या 18 पहुंच गई है। आज के दिन में ही 5 लोगों ने जान गंवाई।

गलियों में रातभर पहरा देते रहे लोग, जागते रहो के नारे लगते रहे

हिंसा प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों में खौफ है। मुख्य सड़कों पर भारी सुरक्षाबल तैनात रहा, लेकिन गलियों और कॉलोनियों के अंदर लोगों को रातभर जागना पड़ा। कॉलोनियों में आम लोगों ने खुद समूह बनाकर पहरेदारी की। रात में ब्रह्मपुरी, करावल नगर, चांद बाग, शिव विहार, बाबरपुर, कर्दमपुरी जाफराबाद सहित अन्य मुख्य सड़कों पर बवाल नहीं हुआ, लेकिन कॉलोनी में तनाव बरकरार रहा। गलियों में एक तरफ जागते रहो तो दूसरी तरफ धार्मिक नारे गूंज रहे थे।

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डेढ़ घंटे लाइन में लगने पर मिल रहा है दूध

हिंसा के बाद बुधवार को दूध की कुछ दुकानें पुलिस के सहयोग से खुली। जो दुकानें खुली हैं वहां दूध के लिए लंबी-लंबी कतारें नजर आईं। एक शख्स को दूध लेने में एक से डेढ़ घंटे का समय लग रहा है। आम दिनों की तरह दुकानों पर पैकेट वाला दूध नहीं मिल रहा, बिना पैकेट वाला दूध ही दुकानों पर उपलब्ध है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।