Jantar Mantar: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए एक प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी ने देश की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा थामने वाले कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद से लगातार विरोध के सुर उठ रहे हैं।
इस मामले में अब पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है, जिसमें लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
राहुल गांधी ने न्यायिक हिरासत को बताया कायरतापूर्ण कदम
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सीजेपी कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर जैसी जगहों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना किसी भी कानून के तहत अपराध नहीं हो सकता। राहुल गांधी ने युवाओं को जेल भेजने की इस कार्रवाई को प्रशासन और सरकार की ‘कायरता’ करार दिया। उन्होंने कहा कि देश के छात्र, युवा और विपक्षी दल अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, जिसे दबाया नहीं जा सकता।
जंतर-मंतर देश की जनता का, वापस हासिल करेंगे अधिकार: विपक्ष
राहुल गांधी ने आगे कहा कि विभिन्न बैनर और संगठनों के तहत विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा और पत्रकार केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। जंतर-मंतर किसी एक व्यक्ति की बपौती नहीं बल्कि देश की आम जनता का है और जनता के इन अधिकारों को हर हाल में वापस हासिल किया जाएगा। विपक्षी नेताओं का मानना है कि शांतिपूर्ण विरोध को इस तरह से दबाना देश के संघीय ढांचे और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
सौरव दास और आशुतोष रांका पांच दिन की न्यायिक हिरासत में
विवाद की शुरुआत तब हुई जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे सीजेपी के कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों कार्यकर्ताओं को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सीजेपी के सदस्यों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह से अनुचित है और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे युवाओं को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है।
अरविंद केजरीवाल का सवाल- अपने देश में झंडा लहराना अपराध है?
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पूरी कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि क्या अपने ही देश में अपना राष्ट्रीय ध्वज लहराना कोई अपराध है? उन्होंने इस कार्रवाई को पूरी तरह से बेतुका करार देते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं और इसे युवाओं के अधिकारों का हनन बताया है।
एमके स्टालिन ने जताई नाराजगी, दी कानूनी सहायता की पेशकश
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने भी इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकार आखिर कितने प्रदर्शनकारियों को जेल में डालेगी और युवाओं की आवाज़ को दबाने का प्रयास करेगी। स्टालिन ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदमों से आम जनता और युवा वर्ग और अधिक आक्रोशित होकर सड़कों पर उतर सकता है। उन्होंने गिरफ्तार किए गए दोनों कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को हरसंभव कानूनी सहायता प्रदान करने की भी घोषणा की है।
आदित्य ठाकरे बोले- युवाओं को तिरंगा पकड़ने पर जेल क्यों?
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस घटना की आलोचना करते हुए केंद्र और प्रशासन पर निशाना साधा है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर पूछा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा पकड़ने के लिए युवाओं को जेल के सलाखों के पीछे क्यों भेजा जा रहा है? आदित्य ठाकरे ने कहा कि अपने देश में राष्ट्रीय ध्वज थामना अपराध कब से बन गया? उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सत्ता में बैठे लोगों और देश के देशभक्त युवाओं के बीच यह वैचारिक लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक लोकतंत्र पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता।
सीजेपी ने कहा- कार्यकर्ता डरने वाले नहीं, राजनीतिक बहस तेज
कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य अजिंक्य शिंदे ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस तरह की दमनकारी कार्रवाइयों से उनके कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने दोहराया कि सौरव दास और आशुतोष रांका को केवल इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने अपने लोकतांत्रिक हकों के तहत राष्ट्रीय ध्वज के साथ अपनी बात रखी थी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश में राष्ट्रध्वज के साथ प्रदर्शन करने के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ गई है।



