लखनऊ।
शुक्रवार के दिन भाजपा के लोकसभा प्रत्याशियों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं को जी भर कर धमकाया और चेतावनियां दीं। एक ओर केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी ने सुल्तानपुर के मुस्लिम मतदाताओं को अपने समर्थन में वोट न देने पर नौकरी नहीं देने तक की धमकी दे डाली तो दूसरी ओर उन्नाव के भाजपा प्रत्याशी साक्षी महाराज ने मतदाताओं से कहा कि एक संन्यासी को वोट नहीं दिया तो अपने पाप आपको दे जाऊंगा।


अजीब सी बात है कि यह दोनों प्रत्याशी खुद को राष्ट्रवादी पार्टी कहने वाली भाजपा से जुड़े हैं। इन दोनों ने धमकी और चेतावनी का सहारा शायद इसलिए लिया होगा क्योकि इनके पास अपने पिछले कार्यकाल की बहुत अधिक उपलब्धियों के बारे में बातचीत करने का मौका नहीं रहा होगा।
इससे यह प्रश्न निश्चित रूप से एक बार फिर उभरा है कि क्या हाई प्रोफाइल मानी जानेवाली केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी तक को काम नहीं करने दिया जा रहा है? यह सवाल भाजपा के साथ लंबी पारी खेलने के बाद बिहार में पटना साहिब संसदीय क्षेत्र के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस का दामन थामते समय भी उठाया था।

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वैसे, शुक्रवार को भाजपा के दो नेताओं के बयानों की तुलना की जाए तो मेनका गांधी की अपेक्षा सांसद साक्षी महाराज का बयान में सामाजिकता का प्रभाव अधिक दिखता है। मेनका गांधी ने तो सीधा ही कह दिया कि उन्हें वोट नहीं देने वाले मुस्लिम अगर भाजपा की जीत के बाद उनसे (मेनका गांधी से) नौकरी दिलवाने या किसी अन्य काम के लिए आते हैं तो वह उनकी कोई बात नहीं सुनेंगी। क्योंकि मतदाताओं के साथ उनका रिश्ता सिर्फ एक हाथ दे, दूसरे हाथ ले का है। इस प्रकार की बातें पुराने जमाने के गांवों में जरूर सुनी जाती थीं लेकिन शिक्षा के प्रसार के बाद अब​ तो वहां भी ऐसी बातें लोग नहीं करते।


दूसरी ओर, साक्षी महाराज ने कहा, ‘मैं एक संन्यासी हूं और एक संन्यासी जब भिक्षा मांगता है और उसे भिक्षा नहीं मिलती तो वह गृहस्थी के पुण्य ले जाता हैं अगर एक संन्यासी को वोट नहीं दिया तो मैं अपने पाप आपको दे जाऊंगा।’ इसी तरह की बात उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशियों की सूची घोषित होने से पहले अपने ही नेताओं से भी कहा था। उस समय उन्होंने साफ कहा था कि अगर उनका टिकट काटा गया तो भाजपा को बुरा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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…तो शायद साक्षी महाराज की बातें उनकी जड़ों से जुड़ी होंगी लेकिन मेनका की धमकी हजम करने के लायक नहीं है। खास तौर पर भारत जैसी समृद्ध लोकतांत्रिक परंपरा में तो कतई नहीं।

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