पीएम की फ्लैगशिप योजना भारत नेट परियोजना में करोड़ों का घालमेल

रायपुर। 15 साल में भाजपा की रमन सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय योजनाओं की इस कदर धज्जियां उड़ाई

गई है कि उनकी परतें खुलने से ठेका कंपनियों पर कार्रवाई करने में अफसरों के हाथपांव फूल रहे हैं। ताजा

मामला भारत नेट परियोजना की ठेका कंपनी टाटा प्रोजेट्स लिमिटेड का है, जिसमें 190 करोड़ की पेनाल्टी

वसूली की प्रक्रिया पूरी करने में नोडल एजेंसी के अफसर कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। वसूली तो दूर

मामले की पूरी फाइल ही ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। बताते चले कि चिप्स के अधिकारियों ने टाटा प्रोजेक्ट्स

लिमिटेड को छह महीने पहले 190 करोड़ की पेनाल्टी का नोटिस तो थमा दिया पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की।

2600 सौ करोड़ का टेंडर, एक साल पूरा करना था काम

छत्तीसगढ़ के दूरस्थ ग्राम पंचायतों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए भारत नेट परियोजना के क्रियान्वयन

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के लिए छत्तीसगढ़ सरकार, चिप्स, भारत सरकार, बीबीएनएल के बीच एमओयू हुआ था,जिसमें चिप्स ने भारत

नेट परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को टेंडर दे दिया। 2600 सौ करोड़ के

टेंडर में टाटा को प्रदेश में एक साल में काम को पूरा करना था लेकिन टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड एक साल में

काम पूरा नहीं कर सकी।

कांग्रेस सरकार आने के बाद खुला मामला

बता दें कि प्रदेश में नई सरकार आने के बाद टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के कामकाज में हुई अनियमितता उजागर

हुई। जिसमें टेंडर की शर्तों में कई उल्लंघन का मामला सामने आने पर छत्तीसगढ़ सरकार की नोडल एजेंसी

चिप्स ने 190 करोड़ की पेनाल्टी का नोटिस तो जारी कर दिया लेकिन आज तक उस पर आगे की कार्रवाई नहीं की गई।

कंसल्टेंट कंपनी में अफसर के रिश्तेदार

बता दें कि पूरे मामले में चिप्स के एक अफसर की भूमिका भी संदिग्ध है। जिन्होंने अपने निजी हितों को साधने के

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कोई कमी नहीं की और जिस कंसल्टिंग कंपनी को भारत नेट परियोजना की ठेका कंपनी टाटा प्रोजेक्ट को कंसल्टिंग

देने के लिए चयन किया गया उसमें चिप्स के कुछ उन कर्मचारियों को कर्मचारी बना दिया जो उस अफसर के

करीबी थे। और तो और उन्हें गोदाम और जरूरी इंस्ट्रूमेंट भी टाटा प्रोजेक्ट ने ही उपलब्ध कराए।

चिप्स का रहा है विवादों से नाता

आपको बता दें छत्तीसगढ़ सरकार की नोडल एजेंसी चिप्स पर आनलाइन टेंडर घोटला में सत्ता के करीबी

ठेकेदारों को करोड़ रुपए के लाभ पहुंचाए जाने जैसे आरोप पहले ही लग चुके हैं।

अब ताजा मामले में टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड से 190 करोड़ की पेनाल्टी की वसूली की फाइल ठंड़े बस्ते में

डाल दिए जाने से जीरो टारलेंट की नीति पर काम कर रही कांग्रेस की नई सरकार के कामकाज पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

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