दंतेश्वरी फाइटर्स ने पिछले 10 महीने में कई बड़े ऑपरेशन में निभाई अहम भूमिका

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में स्थानीय बेटियां माओवादियों को कड़ी चुनौती दे रही हैं। इनका हौसला और जज्बा देखते ही बनता है। यहां डिस्ट्रिक रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के दंतेश्वरी फाइटर्स के दस्ते में 70 ऐसी पराक्रमी युवतियां हैं, जिन पर देश सेवा का ऐसा जुनून सवार है कि वे 2 से 3 रात जंगलों में बिताने से भी गुरेज नहीं करती हैं। उनके चेहरे पर मौत का भय नहीं बल्कि जीत की चाह दिखाई देती है।

जून 2019 से दंतेवाड़ा के पोटाली और चिकपाल कैंप में तैनात ये युवतियां नक्सलियों से पुरुष जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लोहा ले रही हैं। पिछले 10 महीने में वे कई बड़े ऑपरेशन में शामिल हो चुकी हैं। इस दस्ते की खास बात ये हैं कि इसमें एक तिहाई समर्पित महिला नक्सली, समर्पित नक्सली और सीधी भर्ती से आने वाली युवतियां हैं। इन्हें क्षेत्र का भौगोलिक ज्ञान है। इसी का इन्हें फायदा मिल रहा है।

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दंतेश्वरी फाइटर्स में शामिल सभी 70 युवतियां दंतेवाड़ा जिले से ही हैं। ऐसे में उनकी बोली और हुलिया स्थानीय ग्रामीणों से मिलती है। कई बार वे गोपनीय रूप से भीड़ का हिस्सा बन जाती हैं और नक्सलियों के बेहद करीब पहुंचकर पुलिस के लिए अहम जानकारी निकाल लाती हैं। वे कैंप से पुरुषों की तुलना में ज्यादा असानी से बाहर निकल आती हैं। किसी को शक भी नहीं होता और वे अपना काम कर वापस सुरक्षित लौट आती हैं।

महिला दस्ता तैयार होने से फोर्स के प्रति बढ़ा विश्वास

दंतेवाड़ा एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव बताते हैं कि उन्होंने दंतेश्वरी फाइटर्स के गठन के वक्त एक बात सोची थी कि महिलाओं के फोर्स से जुडऩे से लोगों का विश्वास फोर्स के प्रति बढ़ेगा और ऐसा हुआ भी। आज युवतियां प्रभावित इलाके के गांवों में जब पुरुष जवानों के साथ जाती हैं तो फोर्स को लेकर ग्रामीणों की मानसिकता बदली हुई दिखती है। पहले ग्रामीण जवानों पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया करते थे अब ऐसा नहीं हो रहा है।

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दो दिन पहले ही बीजापुर में विस्फोटक बरामद किया

दंतेश्वरी फाइटर्स की महिला कमांडों ने दो दिन पहले ही बैलाडीला पहाड़ी की दूसरी तरफ बीजापुर जिले के गंगालूर के जंगलों में चल रहे आपरेशन प्रहार में भी प्रभावी भूमिका निभाई। महिला कमांडोज ने विस्फोटकों व अन्य सामानों के साथ भारी मात्रा में नक्सली साहित्य बरामद किया।

दंतेश्वरी फाइटर्स का दस्ता बनाने का उद्देश्य हुआ पूरा: एसपी

दंतेवाड़ा एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने ‘पत्रिका’ से बातचीत करते हुए कहा कि महिला कमांडो की टीम बनाने का मुख्य मकसद महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना था। इसके अलावा ऐसी लड़कियों को रोजगार देना भी था, जिन्होंने बचपन से नक्सलियों की प्रताडऩा को अपनी आंखों से देखा है, इनमें से कई ऐसी महिलाएं हैं जो कभी नक्सली प्रताडऩा झेल चुकी हैं। फिलहाल इस दस्ते में 70 युवतियां हैं। भर्ती लगातार जारी है।

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