महतारी एक्सप्रेस

टीआरपी डेस्क। महतारी एक्सप्रेस 102 के लिए जारी निविदा में विभाग द्वारा बेवजह देरी की जा रही है। विभाग द्वारा आरकेटीसी कंपनी का सबसे कम रेट आने के बावजूद उसे किसी तरह ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया है। लगातार की जा रही शिकायतों के बावजूद विभाग टेंडर के नियमों को दरकिनार कर जय अंबे कंपनी को ही टेंडर देने की तैयारी में है। 7 फरवरी 2020 में इसकी शिकायत EOW में भी की गई थी। मगर विभागीय दबाव के चलते मामले की जांच नहीं की जा रही है।

जिसके बाद अब न्यूनतम रेट में सम्मिलित 108 का संचालन कर रहे जय अम्बे कंपनी को टेंडर देने की तैयारी कर ली गई है। बता दें कि108 के संचालन को लेकर जय अंबे पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसके बाद भी विभाग द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। वही अधिकारी जय अम्बे से मिलीभगत कर इस प्रयास में लगे हैं कि इस कंपनी को किसी तरह से 102 महतारी एक्सप्रेस का भी काम मिल जाए। ताकि दोनों योजना का आपस में झोल कर कंपनी को आर्थिक लाभ मिल सके और उन्हें भी इसका लाभ मिलता रहे।

प्रदेश में 400 से अधिका वाहनों का किया जा रहा है परिचालन

गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य लाभ देने के लिए 102 महतारी एक्सप्रेस सेवा का संचालन किया जाता है। प्रदेशभर में 400 से भी ज्यादा वाहनों का परिचालन किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं से संबंधित किसी भी तरह की सहायता जैसे घर से अस्पताल, अस्पताल से घर, प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9 तारीख को प्रसव पूर्व जांच, नसबंदी शल्य क्रिया के बाद घर पहुंचाने की सुविधा तथा एक वर्ष तक के बीमार नवजात शिशुओं के लिए महतारी एक्सप्रेस द्वारा परिवहन की निःशुल्क सुविधा प्रदान की जाती है। साल भर से टेंडर की पूरी प्रक्रिया होने के बावजूद एक कंपनी जय अम्बे को फायदा पहुंचाने निविदा को बेवजह विवादित कर दिया गया है।

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टेंडर में विवाद की वजह एक नजर में

स्वास्थ्य विभाग ने 102 महतारी एक्सप्रेस को लेकर एक साल पहले निविदा जारी की गई थी। विभाग के अधिकारी ने इस टेंडर को एक बार नहीं 5-5 बार कैंसिल कर दिया।

पांचवी बार जब टेंडर जारी किया गया तो इस बार 5 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। टेंडर को विधिवत खोला भी गया, जिसमें टेक्निकल बिड के बाद रेट सूची को भी खोला गया। इस निविदा में आरकेटीसी कंपनी का रेट सबसे कम आया। जिसके बाद विधिवत इस कंपनी को वर्कऑर्डर जारी कर दिया जाना था। मगर विभाग द्वारा ऐसा न कर जय अम्बे कंपनी को शिकायत करने का मौका दे दिया गया कि आरकेटीसी कंपनी NTPC में ब्लैकलिस्टेड है।

जबकि नियम यह है कि टेंडर खुलने के पूर्व आपत्ति दर्ज कराई जाती है। किंतु जब आरकेटीसी कंपनी का कम रेट आया तब जय अंबे कंपनी ने इसकी शिकायत की। हालांकि यह शिकायत झूठी तब साबित हो गई जब उक्त कंपनी को NTPC ने लिखित में इस आशय का पत्र जारी कर दिया कि आरकेटीसी कंपनी NTPC के वेस्टर्न रीजन 2 nd को छोड़ कर NTPC के अन्य किसी जोन या केन्द्र व राज्य शासन के किसी संस्था में किसी तरह की निविदा में भाग ले सकती है। इसमें उसे कोई आपत्ति नहीं होगी।

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शिकायत की आज तक नहीं हुई सुनवाई

इस निविदा में एल-1 के पात्र संस्था आरकेटीसी द्वारा स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को लिखित में कई बार अपना पक्ष रखते हुए वर्कऑर्डर जारी करने निवेदन किया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री सचिवालय में भी इस मामले की शिकायत की गई है। बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने इसे मामले में चुप्पी साध रखी है और एक साल से भी ज्यादा समय से एक षडयंत्र के तहत लंबित है।

जय अम्बे कंपनी की इस पूरे मामले में भूमिका

स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित 108 का संचालन जय अम्बे कम्पनी द्वारा किया जा रहा है। जय अम्बे को जब यह टेंडर दिया गया था तब भी निविदा में मांग किए गए वार्षिक टर्नओवर को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। मगर कंपनी के संचालक की विभाग में अच्छी पकड़ के चलते मामले को ही दबा दिया गया। इसके बाद 108 कि कुल संख्या से कम गाड़ियों को कार्य में सम्मिलित करने से लेकर पुरानी गाड़ियों का उपयोग सहित गाड़ियों का सही तरीका से मेंटनेंस न करना और समय पर सेवा में अनुपलब्धता को लेकर लगातार शिकायतें होती रही हैं। इसके बाद भी जय अम्बे पर किसी तरह की कोई कार्यवाही कभी नहीं हुई।

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102 के लिए जब निविदा जारी की गई तो विभाग की मंशा आरंभ से ही जय अम्बे को ही टेंडर देने की थी। विभाग के अधिकारी भी दबाव के चलते आरकेटीसी को वर्कऑर्डर देने हिलाहवाल कर रहे हैं।

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