पानी के लिए कोयला खदान का काम ठप्प कराया भूविस्थापितों ने, SECL के खनन से गर्मी में सूख जाता है पूरा गांव

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड SECL की सबसे बड़ी गेवरा कोयला खदान में आज सुबह पास के दो गांवों के भूविस्थापित घुस आये और पानी की मांग को लेकर यहां हो रहे खुदाई के काम को ठप्प कर दिया। छत्तीसगढ़ किसान सभा के बैनर तले इन ग्रामीणों ने यह आंदोलन शुरू करने से पहले SECL को अल्टीमेटम भी दिया मगर गांव तक पानी नहीं पहुँच सका।

हर वर्ष टैंकर से पहुँचता है पानी

कोरबा जिले में SECL की अनेक कोयला खदानों की वजह से आसपास के गांवों का भूजल स्तर नीचे चला गया है। यही वजह है कि इन गांवों में हर वर्ष गर्मी के दिनों में SECL प्रबंधन ठेके पर पेयजल की आपूर्ति करवाता है। प्रबंधन द्वारा हर टैंकर के माध्यम से गांवों में पानी पहुँचाया जाता है, मगर इस बार ठेका जारी होने के 15 दिन बीत जाने के बावजूद ठेकेदार द्वारा बरभाठा और पंडरीपानी नामक गांवों में पानी नहीं पहुंचाया जा रहा है। इससे इन गांवों में पानी के लिए हाहाकार मच गया है। यही वजह है कि परेशान ग्रामीणों ने सीधे खदान में धावा बोल दिया और ओवरबर्डन की खुदाई के काम को ठप्प कर दिया है। इससे यहां लगाई गई ड्रिल मशीनों और दूसरी गाड़ियों का काम बंद हो गया है।


छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रमुख प्रशांत झा ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन जिन ग्रामीणों की जमीन पर कोयला खदान शुरू करता है, उन ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करना भी प्रबंधन भूल जाता है। ग्रामीण पेयजल के लिए परेशान हैं क्योंकि गांव के पूरे जलश्रोत सूख गए हैं।


ग्रामीणों द्वारा यहां पानी के लिए खदान का काम ठप्प कर दिए जाने से हड़बड़ाए अधिकारियों ने खदान स्थल पर पहुँच कर बातचीत शुरू की और मौके पर ही ठेकेदार को बुलवाया। यहां ठेकेदार दलील देता रहा कि वह तो रोज गांव में पानी पहुँचा रहा है, मगर गांव वालो ने उसकी बातों को झूठा करार दिया। यहां मौजूद अधिकारी ने भी पाया कि ठेकेदार ने गांव में पानी की आपूर्ति ही नहीं की है। बहरहाल अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि गांव में तत्काल पानी के टैंकर पहुँचाया जायेगा।

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