यूक्रेन संकट से प्रभावित मेडिकल छात्र और परिजन अनशन पर
यूक्रेन संकट से प्रभावित मेडिकल छात्र और परिजन अनशन पर

नई दिल्ली। युद्ध के चलते यूक्रेन से लौटे भारतीय छात्र अपनी आगे की मेडिकल की पढ़ाई को लेकर काफी चिंतित हैं। स्वदेश लौटे भारतीय छात्र रविवार को अपनी मांगों और परेशानियों की ओर प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट करने के मकसद से अनशन शुरू किया है। दिल्ली के जंतर मंतर पर यह छात्र अपने परिजनों के साथ अनशन पर बैठे।

पेरेंट्स एसोसिएशन ऑफ यूक्रेन एमबीबीएस स्टूडेंट्स की ओर से कहा गया है कि “सरकार अब हमें आंदोलन करने पर मजबूर कर रही है। हम शांतिपूर्ण तरह से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते आए हैं, लेकिन सरकार अगर हमारी तरफ गौर नहीं करती है तो पेरेंट्स को आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ेगा।” हालांकि पुलिस की तरफ से इजाजत न मिलने के कारण यह प्रदर्शन एक दिन का होगा और पुलिस की तरफ से 300 लोगों की इजाजत दी गई है।

वापस बुलाकर यूं ही छोड़ दिया

यूक्रेन से लौटी एक छात्रा ने कहा कि ऑपरेशन गंगा के तहत हमें स्वदेश लाया गया, हम प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करते हैं। लेकिन वापस आने के बाद ऐसे ही हमें छोड़ दिया है, तो हमें वापस बुलाना ही नहीं चाहिए था।

See also  टीम इंडिया के प्रदर्शन को देख शोएब अख्तर ने अभी से कर दी भारत के वर्ल्ड कप 2023 जीतने की भविष्यवाणी, कहीं ये बात

NMC के लोग करते हैं शर्मिंदा

छात्रों ने बताया कि यदि हम अपनी मांगो को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के वरिष्ठ लोगों के पास जाते हैं तो वे लोग बदतमीजी से बात करते हैं, हमें नीचा दिखाया जाता है। हमें यह कहकर शर्मिदा किया जाता है कि ‘आप यहां पढ़ने लायक नहीं हो, आप यहां डॉक्टर नहीं बन सकते। आप हमसे पूछकर यूक्रेन नहीं गए थे।’ हम उनसे यह पूछना चाहेंगे कि क्या विदेश जाने के दौरान इनकी इजाजत नहीं चाहिए होती है? क्या इन्हें पता नहीं होता कि हम उधर पढ़ाई के लिए जा रहे हैं? तब ये हमसे क्यों बदतमीजी करते हैं?”

यूक्रेन में 6 साल की होती है पढाई

यूक्रेन में छह सालों में मेडिकल की पढ़ाई पूरी होती है। इसके बाद छात्रों को एक साल के लिए अनिवार्य इंटर्नशिप करनी पड़ती है। फिर भारत में प्रैक्टिस करने और लाइसेंस प्राप्त करने के लिए एफएमजीई यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम की पात्रता के लिए एक साल की सुपरवाइज्ड इंटर्नशिप भी करनी पड़ती है। इनके बाद एफएमजी एग्जाम क्वालीफाई करना पड़ता है।

See also  भारत में iOS 15 और iPadOS 15 की लॉन्चिंग आज, जानें नए फीचर्स से लेकर डाउनलोड के तरीके

सरकार ने अब तक नहीं की पहल

यूक्रेन से लौटे एक छात्र ने बताया, “अनशन पर बैठने को हमें अब मजबूर होना पड़ रहा है पिछले 3 महीने से हम भारत लौटे हुए हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई भी फैसला हमारी पढ़ाई को लेकर नहीं हुआ है। सरकार के जो मंत्री हमें लेने पहुंचे थे, उन्होंने हमसे वहां वादा किया था कि हम आपका भविष्य भी देखेंगे।”

सुको में पीआईएल दायर

इससे पहले छात्रों और परिजनों ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय के गेट के बाहर शुक्रवार को प्रदर्शन किया था। सुप्रीम कोर्ट में भी इससे संबंधित पीआईएल दायर किया गया है जिसमे केंद्र सरकार को जबाव भी 29 जून को दाखिल करना है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सहित देश के अनेक राज्यों से छात्र-छात्राएं यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं मगर रूस के हमले के चलते इन सभी को वापस लौटना पड़ा है। अब छात्र मांग कर रहे हैं कि उनकी मेडिकल की पढाई का इंतजाम भारत में ही किया जाये।

See also  दिनेश त्रिवेदी BJP में हुए शामिल, पूर्व रेल मंत्री ने ममता बनर्जी पर लगाया ये आरोप

Hindi News के लिए जुड़ें हमारे साथ हमारे
फेसबुक, ट्विटरयूट्यूब, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, टेलीग्रामकू और वॉट्सएप, पर