महासमुंद नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव पारित, बागी भाजपा पार्षदों के निष्कासन की पार्टी ने की अनुशंसा

महासमुंद। नगर पालिका महासमुंद में कांग्रेसी पार्षदों द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया। यहां के कुल तीस पार्षदों में से एक भाजपा पार्षद हेमलता यादव अनुपस्थित रहीं, वहीं 29 पार्षदों में से 20 ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। शेष 9 पार्षदों में से छह के वोट निरस्त हो गए और सिर्फ तीन मत भाजपा के पक्ष में आये।अविश्वास प्रस्ताव की इस प्रक्रिया में भाजपा समर्थित अध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर को अपनी कुर्सी खोनी पड़ी।

बॉउन्सरों की सुरक्षा में पहुंचे कांग्रेस समर्थित पार्षद

महासमुंद नगर पालिका में अविश्वास प्रस्ताव का सम्मिलन कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ था। यही वजह थी कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी PCC ने इसके लिए सुबोध हरितवाल, पीयूष केशरवानी, अमरजीत चावला और स्थानीय विधायक संसदीय सचिव विनोद चंद्राकर को जिम्मेदारी दे रखी थी। कांग्रेस पार्टी ने पूरी रणनीति और तामझाम के साथ तैयारी की। यहां तक कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए आयोजित सम्मिलन में कांग्रेस समर्थित पार्षदों को कार्यालय तक पहुँचाने के लिए सुरक्षा के बतौर दर्जन भर बाउंसर भी साथ पहुंचे। बताया जा रहा है कि इससे पूर्व ये सारे पार्षद शहर से बाहर किसी अज्ञात स्थान पर थे।

SDM की मौजूदगी में हुआ सम्मिलन

बीते 20 जून को कांग्रेस के 10 पार्षदों ने जिला निर्वाचन अधिकारी कलेक्टर निलेशकुमार को नपाध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आवेदन सौंपा था। जिस पर कलेक्टर ने आज चार जुलाई को सम्मिलन कराने के लिए एसडीएम भागवत जायसवाल को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया था। सम्मिलन और चुनाव की प्रक्रिया आज पालिका परिसर में सुबह शुरू हुई। यहां लगभग 12 बजे चुनाव शुरू हुआ और साढ़े बारह बजे मतगणना हुई। और फिर परिणाम की घोषणा कर दी गई। इसके मुताबिक 29 पार्षदों में से 20 ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। शेष 9 पार्षदों में से छह के वोट निरस्त हो गए और सिर्फ तीन मत भाजपा के पक्ष में आये। इस तरह भाजपा समर्थित अध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर को अपनी कुर्सी गवांनी पड़ी। कांग्रेस के चुनाव जीतते ही विधायक एवं संसदीय सचिव विनोद चंद्राकर, त्रिभुवन महिलांग अपने समर्थकों के साथ पालिका पहुंचे।

2 वर्ष पूर्व भारी बहुमत से जीते थे प्रकाश

आप को बता दें कि जनवरी 2020 मे भाजपा के प्रकाश चन्द्राकर ने अध्यक्ष पद की शपथ ली थी । उस समय भाजपा के 14 पार्षद , कांग्रेस के 08 पार्षद, 02 जोगी कांग्रेस के पार्षद, 01 आप का पार्षद एवं 05 निर्दलीय पार्षद थे। भाजपा ने 30 में से 19 पार्षदो के समर्थन से अपना अध्यक्ष बनाया था। जैसे-जैसे समय बीतता गया राजनीतिक समीकरण बदलता गया। 05 निर्दलीय पार्षदो मे से 03 ने कांग्रेस का दामन थाम लिया तो 02 निर्दलीय भाजपा के समर्थन में आ गए। वहीं 02 जोगी कांग्रेस के पार्षदो ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके बाद कांग्रेस के 13 पार्षद, भाजपा के 16 पार्षद एवं आप का 01 पार्षद थे। 20 जून 2022 को कांग्रेस के 10 पार्षदो ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी को आवेदन सौपा। उसके बाद भाजपा के 02 और पार्षदो ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इस तरह वर्तमान मे कांग्रेस के पास 15 पार्षद, भाजपा के पास 14 एवं आप का 01 पार्षद थे। आज 4 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पर मत डाले गये तो कांग्रेस को 20 मत, भाजपा को 03, वहीं 06 मत रिजेक्ट हो गये। इस प्रकार कांग्रेस बाजी पलटने मे कामयाब हो गयी।

नए अध्यक्ष की घोषणा आलाकमान करेगी

जीत के बाद कांग्रेस के खेमे में जश्न का माहौल था। नगरपालिका अध्यक्ष के संदर्भ मे कांग्रेस के विधायक विनोद चंद्राकर का कहना है कि अध्यक्ष के नाम की घोषणा आला कमान करेगी, तो वही हार का सामना करने वाले भाजपा के पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश ने कहा कि “कांग्रेस ने सत्ता व धनबल से ये जीत हासिल की है। जीत या हार मायने नहीं रखता। मैं महासमुंद की जनता के साथ आजीवन खड़ा रहूंगा।”

बागी भाजपा पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा

इस बीच महासमुंद नगर पालिका परिषद के 8 बागी भाजपा पार्षदों को पार्टी से निष्कासित करने की अनुशंसा प्रदेश कार्यालय को भेज दी गई है। पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए गठित जिला भाजपा की समन्वय समिति ने इसकी अनुशंसा की है। इन पार्षदों में हाफिज कुरैशी, मीना वर्मा, महेंद्र जैन, पवन पटेल, मंगेश टांकसाले, बड़े मुन्ना देवार, माधवी सिका व मनीष शर्मा शामिल हैं।

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