नई दिल्ली। किसानों के हित में केंद्र सरकार की ओर से तीन कृषि कानून लाए गए थे। लेकिन केंद्र सरकार के इस तीन कानून के खिलाफ विभिन्न किसान संगठनों ने जमकर विरोध-प्रदर्शन किया जो लगातार लगभग 8 महीने तक जारी रहा। धरना-प्रदर्शन के दौरान कई अप्रिय घटनाएं भी हुई जिसमें कई किसानों की मौत हो गई। इस बीच किसान संगठन और केंद्र सरकार के बीच कई बैठकें भी हुई। किसान संगठन एमएसपी की मांग पर अड़े रहे। काफी जद्दोजहद के बाद किसान संगठन और सरकार के बीच एमएसपी को लेकर सहमति बनी और किसानों की मांग पर केंद्र सरकार ने तीन नए कृषि कानून को वापस लेने के फैसले के साथ किसानों का धरना-प्रदर्शन समाप्त हो गया।

युक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया है। जिसमें लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सरकार की कथित निष्क्रियता और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी आदि मुद्दों को लेकर हमला बोला। इस संबंध में संयुक्त किसान मोर्चा की एक बैठक आज होने जा रही है। विभिन्न किसान समूहों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में 60 से अधिक कृषि निकाय भाग लेंगे।

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किसान नेता और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य अभिमन्यु कोहर ने कहा कि पूरे भारत के कृषि संगठन बैठक में भाग लेंगे। पिछले हफ्ते, एसकेएम ने किसानों से लिखित में किए गए वादों से मुकर जाने” पर निराशा व्यक्त करते हुए अपने आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की। 9 दिसंबर को तीनों कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा के बाद किसानों ने आंदोलन समाप्त कर दिया था।

यह आंदोलन करीब एक साल तक चला था। मंगलवार की बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा होनी है, उनके बारे में पूछे जाने पर कोहर ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा ‘‘हम न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानूनी गारंटी के साथ-साथ एसकेएम को गैर-राजनीतिक बनाए रखने के लिए नियमों और विनियमनों पर चर्चा करेंगे। कृषि पर विश्व व्यापार संगठन के 2021 के फैसले पर भी चर्चा की जाएगी। यह एक गलत निर्णय है और भारत के किसानों को सीधे प्रभावित करता है।

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विश्व व्यापार संगठन की एक समिति ने 14 दिसंबर, 2021 को भारत से, रिपोर्ट को स्वीकार करने के 120 दिनों के भीतर उत्पादन सहायता, बफर स्टॉक और विपणन और परिवहन योजनाओं के तहत कथित रूप से प्रतिबंधित राजसहायता वापस लेने की सिफारिश की है। कोहर ने कहा,‘‘हम लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर भी चर्चा करेंगे। असली अपराधी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन किसानों को गिरफ्तार किया गया है।

लखीमपुर खीरी में पिछले साल तीन अक्टूबर को किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध कर रहे थे। और उस दौरान हुई हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे। सरकार के ‘विश्वासघात’ के विरोध में, एसकेएम 18 जुलाई से 31 जुलाई तक देश भर में विश्वासघात सम्मेलन’ आयोजित करेगा।

संसद का मानसून सत्र भी 18 जुलाई से शुरू हो कर 31 जुलाई तक चलेगा। एसकेएम के मुताबिक, भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर लखीमपुर खीरी में 18 अगस्त से 20 अगस्त तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त करने की मांग को लेकर 75 घंटे का सामूहिक धरना दिया जाएगा। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में अजय मिश्रा के पुत्र आशीष आरोपी हैं।

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