नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी दलों के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा को करारी शिकश्त देकर वनडीए प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू ने रिकार्ड मतों से जीत हासिल कर लीं हैं। द्रौपदी मुर्मू की इस ऐतिहासिक जीत से एनडीए, भाजपा सहित देश भर में खुशी की लहार है। भाजपा अपने आदिवासी पहुंच कार्यक्रम के हिस्से के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए देशभर में विशेष रूप से आदिवासी बहुल राज्यों में विशाल स्वागत कार्यक्रम आयोजित करने पर विचार कर रही है।


जहां तत्काल फोकस चार प्रमुख चुनावी राज्यों गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान पर होगा, वहीं मुर्मू का उनके गृह राज्य ओडिशा और पड़ोसी झारखंड में भी जोरदार स्वागत किया जाएगा। समारोह जल्द ही शुरू होंगे और 2024 में लोकसभा चुनाव तक जारी रह सकते हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तर पूर्व और उत्तर भारत सहित 12 राज्यों में 109 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र फैले हुए हैं।


भाजपा का अनुसूचित जनजाति मोर्चा पहले से ही भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति को राजनीतिक रूप से स्थापित करने के लिए ‘अभिनंदन यात्रा की योजना बना रहा है। 2017 में ऐसा नहीं हुआ था जब रामनाथ कोविंद और एम. वेंकैया नायडू को क्रमश: राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के रूप में चुना गया। लेकिन मुर्मू एक अलग मुकाम पर हैं और भाजपा को 350 लोकसभा सीटों के आंकड़े को पार करने में मदद कर सकती हैं।

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पार्टी प्रबंधक इस बात को लेकर भी पूरी सावधानी बरत रहे हैं कि ऐसा संदेश न जाए कि वे राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रपति पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। एस.टी. मोर्चा पूरे भारत में स्वागत रैलियां करेगा। एक मॉडल तैयार किया जा रहा है कि कैसे राष्ट्रपति मुर्मू स्वागत समारोहों की शोभा बढ़ा सकती हैं।


गुजरात में 27 विधानसभा सीटों के साथ लगभग 15 प्रतिशत आदिवासी आबादी है, जबकि छत्तीसगढ़ में 29 सीटों के साथ 30 प्रतिशत वोट हैं। अगर एम.पी. में 21 प्रतिशत वोट और 47 सीटें हैं, तो राजस्थान में 25 सीटों के साथ 14 प्रतिशत वोट हैं।
भाजपा ने मुर्मू के लिए समर्थन मांगने के लिए सभी जनजातीय सांसदों और विधायकों से संपर्क किया चाहे वे किसी भी दल के हों। क्रॉस वोटिंग भी देखी गई। द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के मयूरभंज जिले की रहने वाली हैं, जहां भाजपा पहले ही कांग्रेस को पछाड़कर नंबर दो पार्टी बनकर उभरी है।

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