गांधीनगर मामला : केमिकल पाउच बनाकर पिलाने से, अब तक 39 की मौत 60 अस्पताल में भर्ती

गांधीनगर। देश के कई राज्यों में अवैध शराब विक्रेता बड़ी संख्या में सक्रिय हो गए हैं और ज्यादा कमाई के चक्कर में जहरीली शराब बनाकर कर बेच रहे हैं जिससे लोगों की मौत हो रही है। कई राज्यों से अब तक जहरीली शराब पीने से मौत के मामले आ चुके हैं। इसके बावजूद मदिराप्रेमियों में जागरूकता नहीं आई है और जहरीली शराब पीकर मौत के शिकार हो रहे हैं। कार्रवाई के आभाव में शराब विक्रेताओं के हौसले भी बुलंद हो गए है ।गुजरात के बोटाद जिले में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है। वहीं 60 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बोटाद के अलग-अलग गांवों के कुछ छोटे शराब तस्करों ने मिथाइल अल्कोहल’ (मेथेनॉल) में पानी मिलाकर नकली शराब बनाई थी, जो बेहद जहरीली होती है। वे 20 रुपए ‘पाउच’ के दाम पर उसे गांववालों को बेचते थे। मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। गांधीनगर में राज्य निगरानी प्रकोष्ठ से संबद्ध पुलिस अधिकारी ने कहा, ”जहरीली शराब पीने के बाद अब तक कुल 39 लोगों की मौत हो चुकी है।

गुजरात के पुलिस महानिदेशक आशीष भाटिया ने गांधीनगर में बताया कि 14 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 328 और 120-बी के तहत तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और उनमें से अधिकतर लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। मामला सोमवार सुबह तब सामने आया, जब बोटाद के रोजिड गांव और आसपास के अन्य गांवों में रहने वाले कुछ लोगों को उनकी हालत बिगड़ने पर बरवाला क्षेत्र और बोटाद कस्बों के सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। भाटिया ने कहा कि फोरेंसिक विश्लेषण में पता चला है कि पीड़ितों ने ‘मिथाइल अल्कोहल’ पी थी। हमने हत्या और अन्य अपराधों के आरोप में 14 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और अधिकतर आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है।

गुजरात आतंकवाद रोधी दस्ता (एटीएस) और अहमदाबाद अपराध शाखा भी जांच में शामिल है। भाटिया ने बताया कि अब तक पुलिस की जांच में सामने आया है कि जयेश उर्फ राजू ने अहमदाबाद में एक गोदाम से 600 लीटर ‘मिथाइल अल्कोहल’ चोरी किया था। राजू उस गोदाम में बतौर प्रबंधक काम करता था। उसने बोटाद में रहने वाले अपने एक रिश्ते के भाई संजय को 25 जुलाई को इसे 40 हजार रुपये में बेच दिया था। अधिकारी ने कहा, ‘‘ यह जानते हुए भी कि यह एक औद्योगिक विलायक (सॉल्वेंट) है, संजय ने बोटाद के विभिन्न गांवों के मादक पदार्थ तस्करों को इसे बेचा। इन मादक पदार्थ तस्करों ने इस रसायन को पानी में मिलाकर देशी शराब के तौर लोगों को बेचा।

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