तेलीबांधा थाने के सामने फूटे पाइपलाइन का ज़िम्मेदार कौन..? अब तक तय नहीं कर पाए अधिकारी..!

० पाइपलाइन फोड़ने वाले ठेकेदार से जिओ कंपनी ने झाड़ा पल्ला
० जोन 10 के कमिश्नर ने कहा बिना वर्कऑर्डर के हो रहा था काम

रायपुर। बीते दिनों तेलीबांधा थाना के सामने फाइबर केबल बिछाने के दौरान मेन राइसिंग पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो जाने से लाखों लीटर पानी बर्बाद हो गया, लेकिन अब तक इस घटना के दोषियों पर न तो निगम ने कोई कार्यवाही की न ही पुलिस ने ज़िम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। Jio कंपनी ने इस सारे मामले से पल्ला झाड़ते हुए कलेक्टर,एसपी और थाना प्रभारी समेत जोन 10 के कमिश्नर को पत्र लिखा है।

Jio के कोऑर्डिनेटर की ओर से तेलीबांधा थाना प्रभारी को इस संबंध में पत्र ज़ारी किया गया है। इस पत्र में बताया गया है कि Jio द्वारा घटना की विभागीय जांच की गयी है। इस जांच में तेलीबांधा थाने के आसपास उनके किसी भी अधिकृत ठेकेदार के द्वारा फाइबर केबल विस्तार का कोई भी कार्य नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही पत्र में कहा गया है कि उक्त क्षेत्र के लिए उनके द्वारा किसी भी ठेकेदार या कंपनी को अधिकृत नहीं किया गया है।

TRP के सुलगते सवाल

  1. अगर पाइपलाइन Jio के ठेकेदार ने नहीं तोड़ा है तो किसने तोड़ा ?
  2. केबल का काम अगर Jio द्वारा नहीं किया जा रहा था तो कौन सी कंपनी यह काम कर रही है ?
  3. क्या अधिकारी अब तक ये तय नहीं कर पाए हैं कि ठेकेदार Jio का था या नहीं ?
  4. अगर ठेकेदार Jio के लिए ही काम कर रहा था तो क्या कंपनी में ठेकेदार का रजिस्ट्रेशन हुआ है ?
  5. ठेकेदार द्वारा बिछाए गए केबल पर किस कंपनी का नाम लिखा है ? (अमूमन हर कंपनी अपने Duct केबल पर अपना नाम लिखवाती ही है)
  6. दोषियों पर कितने का जुर्माना लगाया गया है ? क्या लगाया गया जुर्माना पर्याप्त है ? दो दिनों तक नहीं मिला लाखों रहवासियों को पानी

बता दें कि मेन राइसिंग पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के चलते लाखों लीटर पानी बर्बाद हो गया। आलम ये था कि फूटे हुए पाइप से पानी बहकर सडकों और थाने में भर गया। पाइप लाइन मरम्मत के दौरान 2 दिनों तक लगभग 7 लाख लोगों को पीने का पानी नहीं मिल सका।

रसूखदारों को बचाने बरती जा रही है ढिलाई

इस पूरे मामले में Jio के किनारा करने के बाद बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर इस पूरे मामले का ज़िम्मेदार कौन है। वहीं सूत्रों के अनुसार इस मामले के तार शहर के कुछ रसूखदारों से जुड़े हुए हैं। जिसके चलते मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। जिसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि घटना को एक हफ्ते से ज़्यादा समय हो चुका है लेकिन अब तक मामले की जांच कर रहे अधिकारी ये पता नहीं लगा पाए हैं कि ठेकेदार किस कंपनी के लिए कार्य कर रहा था। अधिकारियों के अनुसार ठेकेदार द्वारा अनुबंध और रजिस्ट्रेशन संबंधी दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं कराया गया है। ठेकेदार बिना किसी वर्क आर्डर के वहां काम कर रहा था। जिसके बाद इस पूरे घटना का ज़िम्मा ठेकेदार ने अपने ऊपर लिया है।

वहीं जुर्माने की अगर बात करें तो इस घटना में शहर के सबसे बड़े रिहायशी इलाकों में से एक तेलीबांधा के मेन राइसिंग पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त हो गयी। इससे पेयजल संकट होने के साथ ही तेलीबांधा थाने के सामने की सड़क का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रत हो गया। मरम्मत के लिए खोदे गए गड्ढे से सड़क को भी काफी नुकसान पहुंचा।

अधिकारियों द्वारा इन सबका अनुमानित जुर्माना 3 से 3.5 लाख बताया गया है। जबकि TRP की तफ्तीश में जुर्माना 5 से 7 गुना अधिक होना चाहिए। इसके साथ ही शहर भर के कई स्थानों पर बिना वर्कऑर्डर के फाइबर विस्तार के काम किये जा रहे हैं। इनकी भी समीक्षा होनी चाहिए।

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