नई दिल्‍ली । अपनी खास खूबियों के कारण दुनियाभर के देशों की तेजस युद्धक विमान पहली पंसद बनता जा रहा है। कई मामलों में यह सुखाई विमानों से भी आगे निकल गया है। आज इस कड़ी में हम यह भी जानेंगे कि आखिर तेजस युद्धक विमान और सुखोई में क्‍या अंतर है। अपनी किन खूबियों के कारण यह सुखाई युद्धक विमानों से भी बेहतर है। अब तक किन मुल्‍कों ने तेजस विमानों में अपनी दिलचस्‍पी दिखाई है।

रक्षा मामलों के विशेषज्ञ डा अभिषेक प्रताप सिंह का कहना है कि तेजस लड़ाकू विमान सुखाई विमानों से हल्‍के हैं। इसकी यही खूबी इसे सुखाई से अलग कर देता है। तेजस विमान आठ से नौ टन तक का यह बोझ उठा सकते हैं। यानी इतनी भारी मिसाइल के साथ तेजस विमान उड़ान भरने में सक्षम है। उन्‍होंने कहा कि इसकी दूसरी खासियत इसकी स्‍पीड है। हल्‍के होने के कारण यह दुश्‍मन विमानों की तुलना में तेज गति से उड़ान भर सकता है। इसकी गति यानी मैक 1.6 से लेकर 1.8 तक है। यह ऊंचे पहाड़ों पर भी उड़ान भरने में सक्षम है। यह 52 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।

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उन्‍होंने कहा कि एक तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमान की कीमत 550 करोड़ रुपये है, जो सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से 120 करोड़ रुपये अधिक है। बता दें कि सुखोई विमानों का उत्पादन भी एचएएल ही करती है। उनका कहना है कि तेजस मार्क-1ए, सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से इसलिए भी महंगा है क्योंकि इसमें कई आधुनिक उपक्रम जोड़े गए हैं जैसे इसराइल में विकसित रडार। इसके अलावा इस विमान में स्वदेश में विकसित किया हुआ रडार भी है। यह विमान हल्का है और इसकी मारक क्षमता भी अच्छी है। ये बहुआयामी लड़ाकू विमान है।

तेजस में जिस नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है वो है- क्रिटिकल आपरेशन क्षमता के लिए ‘एक्टिव इलेक्ट्रानिकली-स्कैन्ड रडार’ यानी इलेक्‍ट्रानिक रूप से स्‍कैन रडार, बियांड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल, इलेक्‍ट्रानिक वारफेयर सुइट और हवा में ईंधन भरने की व्यवस्था है। तेजस जेट विमान दूर से ही दुश्मन के विमानों पर निशाना साध सकता है। यह दुश्मन के रडार को भी चकमा देने की क्षमता रखता है। तेजस विमान उतने ही हथियार और मिसाइल लेकर उड़ सकता है, जितना इससे अधिक वजन वाला सुखोई विमान।

तेजस 2376 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से उड़ान भर सकता है। यह 45.4 फीट लंबा 14.9 फीट ऊंचा है। इसका कुल वजन 13500 किलोग्राम है। खास बात ये है कि ये बेहद कम महज 460 मीटर के रनवे से भी टेकआफ कर सकता है। यह एक सुपर सोनिक फाइटर जेट है, जो सबसे खतरनाक ब्रह्मोस मिसाइल को कैरी कर सकता है। उन्‍होंने कहा कि ऐसे समय में जब भारतीय वायु सेना के बेड़े में लड़ाकू विमानों की कमी हो रही है। तेजस विमान आशा की एक नई किरण लेकर आए हैं। उनका कहना है कि चूंकि स्वदेशी कम्पनियां ही इसके कलपुर्जे बनाएंगी, इससे बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा।

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रक्षा क्षेत्र में भी मेक इन इंडिया धूम
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के तहत अब विमानन से लेकर रक्षा क्षेत्र में भी मेक इन इंडिया धूम मचाने को तैयार है। भारत के स्‍वदेशी जेट विमान तेजस (Tejas) की डिमांड पूरी दुनिया में हो रही है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों ने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलीपीन समेत छह देशों ने भारत के तेजस विमान में रुचि दिखाई है। वहीं मलेशिया पहले ही इस विमान को खरीदने की तैयारी में है। भारत ने मलेशिया को 18 तेजस बेचने की पेशकश की है।

हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित तेजस बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है जिसकी क्षमता अत्यधिक खतरे वाले माहौल में परिचालन की है। बता दें कि तेजस विमानों की इस परियोजना की नींव 1983 में ही रखी गई थी। उस वक्‍त इसकी कुल लागत 560 करोड़ रुपये ही थी। अगले दो दशकों में इसकी लागत में इजाफा हुआ है। तेजस ने अपनी पहली उड़ान 2001 के जनवरी में भरी थी। इस विमान को भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन में वर्ष 2016 में ही शामिल किया गया था।

रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि तेजस विमान में दिलचस्पी दिखाने वाले अन्य दो देश अर्जेंटीना और मिस्र भी हैं। मलेशिया अपने पुराने रूसी मिग-29 लड़ाकू विमानों को बदलने के लिए तेजस विमान खरीद रहा है। भट्ट ने कहा कि एलसीए विमान में रुचि दिखाने वाले अन्य देशों में अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, मिस्र, अमेरिका, इंडोनेशिया और फिलीपीन हैं।

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