गरियाबंद। महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के गरियाबंद जिले के अंतर्गत आता है उदंती सीता नदी अभ्यारण्य, जिसके भीतर 30 से भी ज्यादा गांव बसे हुए हैं। बताया जा रहा है कि महीने भर से इन गांवों में पोस्टर-बैनर टंगे हुए थे, मगर 15 से 20 दिन पहले सभी झंडे-बैनर उतार दिए गए है। इन गांवों में एक तरह की ख़ामोशी है और ग्रामीण अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की बात कह रहे हैं। यहां के इंदागांव, कोयबा, बम्हनी झोला, करलाझर, नागेश, साहेबिन कछार, घुमरापदर, पीपलखुटा, जैसे 30 से ज्यादा अंदरूनी गांवों में इसी तरह का नजारा है।

घर पर ही रह गए बैनर-पोस्टर

ग्रामीणों से बातचीत से पता चला कि माह भर पहले तक गांव में भाजपा के बैनर पोस्टर लगे हुए थे, लेकिन अब यह आलम है कि सारे झंडे-बैनर गायब हैं। और तो और कोयबा में नेशनल हाइवे से लगे एक भाजपा नेता के घर पर भी पार्टी का झंडा नहीं लगा दिखा, जबकि इन्हें 20 बूथों में प्रचार सामग्री वितरण करने का जिम्मा दिया गया था। इस भाजपा नेता के अलावा अंदरुनी इलाके में कई कार्यकर्ता ऐसे भी दिखे जिनके घरों में पार्टी के झंडे से भरा बोरियों का ढेर जस का तस पड़ा हुआ है।

सवालों को टाल गए कार्यकर्ता

इस बारे में जानने के लिए मीडिया कर्मियों द्वारा किए गए सवाल पर ज्यादातर कार्यकर्ताओं ने कहा कि आपको इससे क्या लेना देना। कुछ ने इसे अपना आंतरिक मामला बता कर पल्ला झाड़ लिया। तो कुछ ने बताया कि माहौल ठीक नहीं है, उन्होंने इस विषय पर बात करने का इसे उचित समय नहीं होना बताया।

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‘चुनावी बैनर उतरे, बहिष्कार का पोस्टर टंगा’

दरअसल उदंती अभ्यारण्य में चुनाव प्रचार के बैनर पोस्टर तो उतर गए हैं, मगर उनके स्थान पर यहां चुनाव का बहिष्कार करने संबंधी बैनर-पोस्टर जगह-जगह लगा दिए गए हैं। इस बहिष्कार को लेकर गांवों में कई बैठकें भी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे 20 साल से मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं मगर प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली है, इसलिए इस बार वे मतदान नहीं करेंगे।

अभ्यारण्य के चलते नहीं मिल पा रही सुविधा

अधिकारी बताते हैं कि उदंती अभ्यारण्य का इलाका होने के कारण ग्रामीणों की ज्यादातर मांगें एनओसी के लिए दिल्ली में अटकी हुई हैं। जो मांगे मानी जा सकती थी उन्हें पूरा भी किया गया है। जो काम आचार संहिता हटने के बाद हो सकते हैं, उन्हें बाद में किया जाएगा। प्रशासन का कहना है ग्रामीणों को विस्तृत रूप से उनकी मांगों के बारे में समझा दिया गया है।

नक्सल गतिविधियां बढ़ने की सुगबुगाहट

सूत्र बताते है कि पिछले एक माह में इन इलाकों में नक्सलियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। कहा जाता है लंबित मांगों को लेकर बहिष्कार कर रहे गांव के अलावा कुछ गांव ऐसे भी है जहां माओवादियों ने वोट नहीं डालने के लिए ग्रामीणों पर दबाव बनाया है। इन गांवों में प्रचार प्रसार थमने और झंडे बैनर उतरने के पीछे नक्सलियों की बढ़ी हुई आवाजाही को ही वजह माना जा रहा है। पता चला है कि उदंती अभ्यारण्य में नक्सलियों की पहले की तरह आमद-रफ्त बढ़ गई है और नक्सलियों द्वारा इन गांवों के सरपंच-सचिवों की बैठक लेकर उन पर मतदान के बहिष्कार का दबाव बनाया गया है।

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रात को नक्सलियों की बैठक, दिन को ग्रामीणों की…

उदंती अभ्यारण्य के इन गांवों के लोग दबी जबान बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों से नक्सलियों की आहट बढ़ी है। नक्सली चोरी-छिपे रात के वक्त आकर सरपंच-सचिव की बैठक लेते हैं और उनके ऊपर गांव की मूलभूत समस्याओं को लेकर चुनाव बहिष्कार का दबाव बनाते हैं। अगले दिन सरपंच-सचिव इसी मुद्दे पर ग्रामीणों की बैठक लेकर चुनाव बहिष्कार के लिए माहौल बनाते हैं।

इन गांवों में चुनाव बहिष्कार के लिए लगे बैनर पोस्टर पर नजर डालें तो इसमें लिखी भाषा भी नक्सलियों लिखावट से मिलती-जुलती नजर आती है। कहा जा रहा है कि जिन गांवों के ग्रामीण बहिष्कार के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं, वहां रात के वक्त कोई चोरी-छिपे पोस्टर लगा जाता है। पोस्टर कौन लगा रहा है इसके बारे में अच्छी तरह समझा जा सकता है।

प्रशासन का ये है दावा

वहीं इस पर प्रशासन का दावा है कि ग्रामीणों की मांगे पूरी की गई हैं, चुनाव बहिष्कार नहीं होगा। जबकि उदंती सीता नदी अभ्यारण के भीतर बसे कई गांवों में पिछले कई दिनों से चुनाव बहिष्कार को लेकर बैठकों का दौर चलता रहा है, और प्रशासन की लाख समझाइस और जागरूकता अभियान के बावजूद कई गांव आज भी चुनाव बहिष्कार के लिए अड़े हुए हैं।

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इलाके में बढ़ाई गई सर्चिंग

एसपी गरियाबंद के मुताबिक़ पिछले चुनाव के अनुभवों को देखते हुए इस बार सर्चिंग बढ़ा दी गई है। संवेदनशील इलाकों का चिन्हांकन किया गया है। गांव-गांव में हमारे फोर्स पहुंचकर मतदान के पहले भयमुक्त और विश्वास का माहौल बना रहे हैं। मतदान तिथि तक हम लोगों के मन से डर हटाकर विश्वास और भयमुक्त वातावरण तैयार करने में सफल रहेंगे।

हेलीकाप्टर से रवाना हुए मतदान दल

इस बीच अति संवेदनशील इलाकों के लिए मतदान से दो दिन पहले गरियाबंद जिला मुख्यालय में हेलीकॉप्टर से मतदान दलों को रवाना कर दिया गया है। ऐसे केंद्रों में मतदान कर्मियों के अलावा रिजर्व बल को भी भेजा गया है।

बहरहाल देखना यह है कि उदंती अभ्यारण्य के इलाके में मतदान के लिए प्रशासन ग्रामीणों को मनाने में कितना सफल हो पाता है।