Priyanka Gandhi’s first speech in Parliament: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने लोकसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान अपना पहला भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने उन्नाव रेप मामले, संभल में हुई सांप्रदायिक हिंसा सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की।

प्रियंका गांधी ने कहा, “कुछ दिन पहले संभल के शोकाकुल परिवारों के कुछ लोग हमसे मिलने आए थे। इनमें दो बच्चे थे, एक का नाम अदनान और दूसरे का नाम उजैर था। अदनान मेरे बेटे की उम्र का था और उजैर लगभग 17 साल का था। उनके पिता एक दर्जी थे, और उनका सपना था कि वह अपने बेटों को शिक्षित होते देखें।”

प्रियंका ने आगे कहा, पुलिस ने उनके पिता को गोली मार दी। अदनान ने मुझसे कहा था कि वह बड़ा होकर डॉक्टर बनेगा और अपने पिता के सपने को पूरा करेगा। यह सपना भारत के संविधान ने उसमें डाला था। प्रियंका ने बताया कि हमारा संविधान एक सुरक्षा कवच है, जो देशवासियों को सुरक्षित रखता है, न्याय और एकता का कवच है, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी। लेकिन दुख की बात है कि सत्तापक्ष ने पिछले 10 सालों में इस सुरक्षा कवच को तोड़ने की कोशिश की है।

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जाति जनगणना पर प्रियंका गांधी का बयान

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में जातिगत जनगणना पर भी बात की और कहा, आज देश की जनता मांग कर रही है कि जातिगत जनगणना हो। सत्ता पक्ष के साथी इस विषय को लेकर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन इसे लेकर सिर्फ चुनावी नतीजों का ही असर नहीं है, बल्कि इससे हम सबकी स्थिति समझ सकते हैं और नीति निर्माण में मदद मिल सकती है।

अडानी मुद्दे पर प्रियंका गांधी का हमला

प्रियंका गांधी ने अडानी मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि सत्तारूढ़ सरकार अमेरिका के आरोपों पर बहस करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया, देश देख रहा है कि एक व्यक्ति को बचाने के लिए 1.4 अरब लोगों की अनदेखी की जा रही है, जबकि सारी संपत्ति, बंदरगाह, सड़कें, खदानें उसे दे दी गई हैं। प्रियंका ने कहा, लैटरल एंट्री के जरिये यह सरकार रिजर्वेशन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। अगर चुनाव के नतीजे नहीं होते तो ये लोग संविधान बदलने की कोशिश करते।

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महिला आरक्षण विधेयक पर प्रियंका गांधी की मांग

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा, “इस देश की महिलाओं को 10 साल तक इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? केंद्र को इसे बिना देरी के लागू करना चाहिए।” उन्होंने अपनी दादी इंदिरा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार का भी बचाव किया और कहा, “यहां 1975 की बातें की जाती हैं, लेकिन मैं कहती हूं कि आप लोग सीख लिजिए। आप बैलेट पेपर से चुनाव करवा लीजिए, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”